टीएस सेट परीक्षाओं पर एकल न्यायाधीश के आदेशों में हस्तक्षेप नहीं
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य पात्रता परीक्षा (टीएस सेट के परिणामों को स्थगित करने से इनकार करने वाले एकल न्यायाधीश के आदेशों में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि याचिका परिणाम घोषित होने के एक वर्ष बाद दायर की गई थी, इसीलिए एकल न्यायाधीश का निर्णय उचित है।
वी. शरण्या व अन्य तीन याचिकाकर्ताओं ने सितंबर-2024 में आयोजित टीएस सेट परीक्षा की उत्तर कुंजी में 29 दोषपूर्ण प्रश्नों के कारण परिणामों को स्थगित करने और भर्ती प्रक्रिया को निलम्बित करने की माँग करते हुए उच्च न्यायालय में याचिकाएँ दायर की थी। मामले की सुनवाई करने वाले एकल न्यायाधीश ने अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया, क्योंकि आपत्तियाँ समय सीमा के भीतर नहीं उठाई गई थीं।
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शरण्या व अन्य ने एकल न्यायाधीश के फैसले को चुनौती दी
शरण्या और अन्य ने एकल न्यायाधीश के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन की खण्डपीठ ने अपील याचिका की सुनवाई की। उस्मानिया विश्वविद्यालय के अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि प्रारंभिक उत्तर कुंजी 23 सितंबर, 2023 को जारी की गई थी और किसी भी आपत्ति को 11 अक्तूबर तक सूचित किया जाना चाहिए था।
विशेषज्ञ समिति द्वारा समयसीमा के भीतर प्राप्त आपत्तियों की जाँच के बाद अंतिम उत्तर कुंजी 16 नवंबर को जारी की गई। दलील सुनने के बाद खण्डपीठ ने कहा कि प्रारंभिक उत्तर कुंजी जारी होने के बाद प्राप्त आपत्तियों की जाँच करने वाली विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के अनुसार 25 प्रश्नों को अंक दिए गए थे। हालाँकि अपीलकर्ताओं द्वारा एक वर्ष बाद यह कहते हुए याचिका दायर करना उचित नहीं है कि 14 और प्रश्न हैं। अपील को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि मुख्य याचिका वर्तमान में लम्बित है, इसीलिए एकल न्यायाधीश के आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
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