जल्द शुरू होगी अंडरग्राउंड केबलिंग परियोजना, केबल फ्री हैदराबाद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
हैदराबाद, हैदराबाद को बहुत जल्द अस्त-व्यस्त केबल व्यवस्था तथा खतरों की स्थिति को आमंत्रित करने वाले बिजली के लटकते तारों से मुक्ति मिल सकती है। सरकार इसी महीने महत्वाकांक्षी अंडर ग्राउंड केबलिंग परियोजना पर जमीनी कार्य शुरू करने का इरादा रखती है।
ऊर्जा विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने आज विधानसभा परिसर में बातचीत के दौरान बताया कि शहर की बिजली अवसंरचना को आधुनिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के तहत के ग्रेटर हैदराबाद मेट्रो ज़ोन में चार हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत की अंडरग्राउंड केबलिंग परियोजना के लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह परियोजना शहर के उच्च घनत्व वाले इलाकों पर केंद्रित होगी, जिनमें बिजली विभाग के अंतर्गत आने वाले बंजारा हिल्स, सिकंदराबाद, हैदराबाद सेंट्रल और हैदराबाद साउथ सर्किल शामिल हैं।
योजना के अंतर्गत प्रमुख सड़कों पर फैली अव्यवस्थित 11 केवी, 33 केवी और एलटी (लो टेंशन) ओवरहेड लाइनों को हटाकर एक मज़बूत अंडरग्राउंड नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। इससे न केवल बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि शहर की सुंदरता और सुरक्षा में भी सुधार होगा। अव्यवस्थित केबलों का जंजाल हैदराबाद शहर के लिए दीर्घकालिक समस्या रही है।
लटकते केबल और भद्दा दृश्य, वर्षों से बनी गंभीर समस्या
बिजली के अलावा सेवा विभागों जैसे टेलीफोन, इंटरनेट और केबल टीवी नेटवर्क के केबल के जाल यहाँ-वहाँ लकटते हुए भद्दी तस्वीरें पेश करते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए जीएचएमसी ने लगभग दो दशक पहले केबल डक्ट की व्यवस्था पर विचार करना शुरू किया था और आबिड्स, मेहदीपटनम, खैरताबाद एवं पंजागुट्टा सहित कुछ स्थानों पर कुछ काम भी हुआ, लेकिन इस पर पूरी तरह अमलावरी नहीं की जा सकी।
दूसरी ओर बिजली के तारों की अलग समस्या है, जो न केवल भद्दे दृश्य प्रस्तुत करते हैं, बल्कि कई बार जानलेवा भी साबित हुए हैं। इससे बिजली की आपूर्ति में कई तरह की खामियाँ भी उजागर हुई हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अंडरग्राउंड केबल परियोजना पर विचार किया और पिछले वर्ष इसे मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। हैदराबाद शहर के लिए इस महत्वाकांक्षा के लिए बेंगलुरू को एक प्रमुख बेंचमार्क माना जा रहा है।
बेंगलुरू में बिजली वितरण कंपनी बेस्कॉम ने इंदिरानगर और कोरमंगला जैसे कोर इलाकों में अपनी लगभग 6,600 किलोमीटर लंबी हाई-टेंशन लाइनों में से करीब 90 प्रतिशत को अंडरग्राउंड केबल में बदल दिया है। इस बदलाव से सुरक्षा और शहर के दृश्य सौंदर्य में तो सुधार हुआ, लेकिन शुरुआत में कई चुनौतियाँ भी सामने आईं। खुदाई के दौरान यातायात बाधित हुआ और कई बार बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई।
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खुदाई और ट्रेंचिंग से लागत बढ़ी, प्रति किमी खर्च 80 लाख
शहर के भीतर खुदाई, ट्रेंचिंग, नये केबल बिछाने और संकरी गलियों में एरियल बंडल्ड केबल लगाने जैसे कारणों से परियोजना में देरी हुई। इसके चलते परियोजना की लागत प्रति किलोमीटर 60 लाख रुपये के शुरुआती अनुमान से बढ़कर 80 लाख रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुँच गई। सूत्रों के अनुसार, बेंगलुरू के अनुभवों के आधार पर हैदराबाद में परियोजना में अमलावरी के दौरान कुछ सुधार किये जा सकते हैं। सरकार ने इस परियोजना के लिए 4,100 करोड़ की लागत का आकलन किया है।
वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह कदम केवल सौंदर्यीकरण के लिए नहीं है, बल्कि इसके पीछे मज़बूत आर्थिक उद्देश्य भी हैं। अंडरग्राउंड केबलिंग पूरी होने के बाद कार्यालयों और आवासीय इलाकों को लगभग शून्य बाधा वाली बिजली आपूर्ति मिल सकेगी। इससे उद्योगों को आकर्षित करने, बिजली कटौती कम करने और मेट्रो ज़ोन में आर्थिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है। यदि इस परियोजना को कुशलतापूर्वक लागू किया गया तो हैदराबाद को विश्वस्तरीय बिजली ग्रिड प्रदान कर सकता है और इस क्षेत्र में शहर की बिजली व्यवस्था को बेंगलुरू से भी आगे ले जाने की क्षमता रखता है।
बताया जाता है कि परियोजना के लिए आवश्यक धनराशि डिस्कॉम द्वारा ऋण के माध्यम से जुटाई जाएगी। जहाँ खुदाई व्यावहारिक नहीं होगी, खासकर संकरी गलियों में, वहाँ अंडरग्राउंड केबल के साथ-साथ एरियल बंडल्ड केबल का उपयोग किया जाएगा। इससे मानसून, पेड़ गिरने और खुले तारों से होने वाली दुर्घटनाओं से बचा जा सकेगा। बिजली कटौती और करंट लगने की घटनाओं में भारी कमी आएगी तथा शहर की स्काईलाइन भी अधिक साफ-सुथरी दिखेगी।
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