उँग्ली कटाको शहीदाँ में नाम लिखारइँ

उँग्ली कटाको शहीदाँ में नाम लिखारइँ
आता-जाता क्याबी1 नइँ है, पनकी2 शानाँ भौतिच करइँ,
ज़र्रा करको भौत बतातइँ, चमचा गिरी से आगे बड़रइँ।।
ऐसे लोगाँ काइच3 ज़माना, म्हेनत करको कोन कमाना,
हौंदे चित्ते कामाँ करको, अपने कू क़ाबिल बतलाना।
पैसा देको, अख़बाराँ में नाम दलारइँ,
उँग्ली कटाको, शहीदाँ में नाम लिखारइँ।।

मुलुक के वास्ते लड़तऊँ बोलरइँ, झगड़ा हुवा घर में घुस जातइँ,
झूटे सर्टिफिकेट बनाको, लोगाँ कू बेखूब बनातइँ।
आज़ादी के व़कत इनोतो, पेट में से बाहेर नइँ आए थे,
गलत काम्पो4 लोगाँ थपके5, इन बोलरैं दण्डे खाए थे।
बड़े सो वाले काँ गुम है की, पन6 इन देखो पेन्शन खारइँ,
उँग्ली कटाको, शहीदाँ में नाम लिखारइँ।।

पड़ने-लिखने में कच्चे थे, घर में इन सोब से लुच्चे थे,
म्हेनत करने कू बोले तो, म्हेनत में सोब से पिच्छे थे।
लोप्पाडोप्पी7 में अव्वल थे, शऱाफत में भौतिच8 डल9 थे,
खाने में औकाली समजो, वजन में पूरे दो कुंटल थे।
लोगाँ कू फुसला-फुसला को, बिचारों का माल दबारइँ,
उँग्ली कटाको, शहीदों में नाम लिखारइँ।।

भूक हड़ताल पो बैठैं, पनकी क्या बोलूँ म्इँ, ख़ूब दबारइँ,
एक नंबर कू जातऊँ बोल्को, चिकना-चिकना ख़ाको आरइँ।
पेट में खाना-पानी नइँ तो, काएका एक नंबर दो नंबर,
सूरत सुका को बैठैं, पनकी, सोब चलराए जी अंदर-अंदर।
एक नंबर के भेड़िये पनकी, बकरी के सरका मिमियारइँ,
उँग्ली कटाको, शहीदाँ में नाम लिखारइँ।।

यह भी पढ़ें: घर से बाहर हो जाता है इंसान

देश से इनकू मतलब नइँ हैं, मतलब है तो बस पैसों से,
कपड़े तो भौतिच उजलेपन, रिश्ते हैं कैसे-कैसों से।
अंदर कुछ है, बाहर कुछ है, दिल में कुछ है, ज़ाहिर कुछ है,
दिखने में भोले हैं पनकी, श़ातिर एक नंबर के ठग हैं।
वतनपरस्ती10 का मतलब हमकू समजारइँ,
उँग्ली कटाको, शहीदाँ में नाम लिखारइँ।।

1.कुछ भी, 2.परन्तु, 3.का ही, 4.काम पर, 5.मारे, 6.पर, 7.धोखाधड़ी, 8.बहुत ही, 9.कमज़ोर, 10.देशभक्ति।

-नरेंद्र राय

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