केंद्रीय बजट-2026 : अनिश्चितता में स्थिरता की तलाश

अगर गौर से देखा जाए तो वित्त मंत्री ने इस बार अपने बजट को स्थिर रखकर लोगों की अपेक्षा से उलट उनके खर्च करने की हैसियत को बढ़ाने पर फोकस किया है। यह बजट भारत की आर्थिक, सामाजिक और राजकोषीय स्थितियों को भली-भांति दर्शाता है। बजट के समूचे गठन को अगर हम गहराई से देखें तो भले इसमें कोई बड़ी घोषणा शामिल न हो, लेकिन इसका मूल लक्ष्य विकास को गति देना, नौकरियां पैदा करने की कोशिशों को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और सामाजिक कल्याण सुनिश्चित करना है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था जिस तरह अनिश्चितताओं और धीमी वृद्धि दर से जूझ रही है, वैसे में अगर भारत अमेरिकी टैरिफ का दबाव झेलते हुए अपनी घरेलू मांग और निवेश के बल पर विकास को सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है, तो यह स्वाभाविक ही है। शायद इसलिए बीती 1 फरवरी 2026 को लगातार अपना 9वां केंद्रीय बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने 85 मिनट लंबे भाषण में बड़ी सजगता से कोई बड़ा ऐलान नहीं किया। दरअसल, जब अर्थव्यवस्था स्थिर होती है, तो सरकारें बजट में कोई बड़ा ऐलान करने से बचती हैं।

भारत की अर्थव्यवस्था इस समय 7 प्रतिशत सालाना विकास के दर से आगे बढ़ रही है और किसी हद तक यह विकास दर स्थिर भी है। शायद यही कारण है कि वित्त मंत्री ने कोई बड़ा लोक-लुभावन ऐलान तो नहीं किया, लेकिन बजट के साइज को बढ़ा दिया है। इस साल का बजट 53.47 लाख करोड़ रुपये का है, जो कि पिछले साल के बजट के मुकाबले 7.1 फीसदी ज्यादा है। अगर गौर से देखा जाए तो वित्त मंत्री ने इस बार अपने बजट को स्थिर रखकर लोगों की अपेक्षा से उलट उनके खर्च करने की हैसियत को बढ़ाने पर फोकस किया है।

बड़ी घोषणाओं के बिना विकास और रोजगार पर फोकस

यह बजट भारत की आर्थिक, सामाजिक और राजकोषीय स्थितियों को भली-भांति दर्शाता है। बजट के समूचे गठन को अगर हम गहराई से देखें तो भले इसमें कोई बड़ी घोषणा शामिल न हो, लेकिन इसका मूल लक्ष्य विकास को गति देना, नौकरियां पैदा करने की कोशिशों को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और सामाजिक कल्याण सुनिश्चित करना है। इस बार के केंद्रीय बजट के कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े इस तरह हैं-

जहां बजट में कुल व्यय का अनुमान 53.5 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, वहीं नॉन-डेट रिसिप्ट 36.5 लाख करोड़ रुपये है। जबकि राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.3 फीसदी पर रखने की कोशिश की गई है और कुल ऋण जीडीपी के अनुपात में 55.6 फीसदी है। 28.7 लाख करोड़ राजस्व कर प्राप्तियों के अनुमान वाला यह बजट राजकोषीय अनुशासन और स्थिरता बनाये रखते हुए सूचीबद्ध विकास की दिशा में केंद्रित है। इस बजट का महत्व इसलिए बढ़ जाता है, क्योंकि राजकोषीय और आर्थिक लक्ष्य को संतुलित रखने की मंशा इसमें साफ तौर पर दिखती है।

बजट ने राजकोषीय अनुशासन को प्राथमिकता दी है और राजकोषीय घाटे को 4.3 फीसदी पर केंद्रित रखा, जो पिछले अनुमान 4.4 फीसदी से कम है। यह ऋण प्रबंधन वास्तव में वित्तीय नियंत्रण का संकेत है, खासकर तब जब सरकार बड़े पैमाने पर पूंजीगत खर्च कर रही हो। साल 2026 के केंद्रीय बजट का सकारात्मक पक्ष यह है कि सार्वजनिक वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार का इरादा साफ दिखता है। लेकिन आलोचना के केंद्र में यह प्रश्न भी है कि क्या घटी हुई घाटा दर विकास की गति को सीमित नहीं करेगी?

बेरोजगारी और ग्रामीण चुनौतियों के बीच पूंजीगत निवेश की जरूरत

जैसा कि कई अर्थशास्त्री तर्क देते हैं उच्च पूंजीगत निवेश और खर्च की भारी आवश्यकता होती है, जब बेरोजगारी, अवसंरचना के अंतर और ग्रामीण क्षेत्र की चुनौतियां एक साथ मौजूद हों। इसके बावजूद बजट ने पूंजीगत व्यय को 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया है। देखा जाए तो यह पिछले सालों की तुलना में रिकॉर्ड स्तर पर है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, जल आपूर्ति और शहरों के विकास के लिए खर्च किया जायेगा।

केंद्रीय बजट में हालांकि आयकर स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया यानी कि कर की मूल संरचना अपरिवर्तित है, जिसका मतलब है कि कर धारक को सरकार ने तुरंत कोई राहत नहीं दी है। लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता और प्रत्याशित राजस्व सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है, जिससे मध्यमवर्ग और निवेशकों पर असर पड़ना लाजिमी है। हालांकि बजट में कुछ टैक्स कोषों पर बदलाव किए हैं, जैसे कि टीसीएस (टैक्स कॉलेक्टेड एट सॉर्स) दरों में कटौती की है। विशेष रूप से शिक्षा, चिकित्सा और विदेश यात्रा के लिए जिससे उपभोक्ता खर्च कम हो सके।

कुछ दवाओं पर सरकार ने बुनियादी कर माफ करने की घोषणा की है जिसमें कैंसर की 17 दवाएं शामिल हैं। निश्चित रूप से इससे कैंसर के गंभीर मरीजों को राहत मिलेगी। कुछ और भी ऐसे उपाय जो कि ज्यादातर अप्रत्यक्ष हैं, के जरिये सरकार ने मध्यमवर्ग के खुदरा खर्चों पर सकारात्मक प्रभाव डालने की संभावना बढ़ायी है। लेकिन इसे पर्याप्त प्रत्यक्ष कर राहत के रूप में नहीं देखा जा सकता। जैसे कि कर रहित आय बढ़ाने से दिखती है।

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पूंजीगत व्यय और अवसंरचना निवेश पर सरकार का बड़ा दांव

सरकार ने पूंजीगत निवेश की केंद्रित रणनीति और अवसंरचना के निवेश पर जोर दिया है, इसलिए इस बजट में पूंजीगत व्यय में भारी वृद्धि की संभावना है। सरकार ने 7 हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की योजना बनायी है और राष्ट्रीय जलमार्गों का विस्तार करने की भी योजना है। इसी तरह देश के सभी जिलों में नौकरीपेशा महिलाओं के लिए हॉस्टल बनाने की योजना है तथा शहरों में लॉजिस्टिक हब्स की विकास की भी दीर्घकालिक योजना पर काम कर रही है, जिससे उत्पादन क्षमता, व्यापार कनेक्टिविटी और रोजगार सृजन में मदद मिलेगी। लेकिन यह सब तभी उत्पादक और उपयोगी साबित होगा, जब समय पर कार्यान्वयन हो और लागत नियंत्रित रहे। ऐसी योजनाओं में लागत पर काबू रखना बड़ी चुनौती होती है।

सरकार ने साल 2026-27 के केंद्रीय बजट में टेक्नोलॉजी आधारित और रणनीतिक क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया है। इंडिया सेमी कंडक्टर मिशन 2.0 देश को वैश्विक स्तर पर चिप निर्माण केंद्र बनने की महत्वाकांक्षा को साकार करेगा तथा रेयर अर्थ मिनिरल्स और उच्च प्रौद्योगिकी के निर्माण को भी समर्थन दिया है। इससे रोजगार के साथ-साथ निर्यात में भी प्रभावशाली वृद्धि की संभावना है।

सरकार ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस समर्थित कृषि व कुटीर उद्योगों में बड़े पैमाने पर निवेश की योजना बनायी है, जो अंतत अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। सरकार की नीतियों से साफ संकेत मिलता है कि भारत मैन्यूफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल वैल्यू चेन में अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहता है। क्योंकि लंबी अवधि की प्रतिस्पर्धात्मक अर्थव्यवस्था बनने और निर्यात में प्रभावशाली वृद्धि के लिए यह बहुत जरूरी है। लेकिन विशेषज्ञ सरकार की इस कदम की यह कहकर आलोचना कर रहे हैं कि सिर्फ बड़ी-बड़ी घोषणाओं से काम नहीं बनने वाला।

उच्च तकनीकी रोजगार के लिए कौशल और नीति समर्थन की जरूरत

इसके लिए बड़े पैमाने पर व्यवहारिक पूंजी, कौशल विकास और निरंतर नीति समर्थन की आवश्यकता होगी, जिससे वास्तव में उच्च तकनीकी रोजगार उत्पन्न हो सके। जिसकी अभी मौजूदगी कम दिखती है। साल 2026 के केंद्रीय बजट में कृषि, ग्रामीण विकास और सामाजिक क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया गया है। बजट में कृषि क्षेत्र को 1.63 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और उच्च मूल्य वाली फसलों, समर्थन सेवाओं तथा तकनीक आधारित खेती को प्रोत्साहन देने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार ने ग्रामीण रोजगार योजनाओं के लिए भी बजट में भारी आवंटन किया है। जी राम जी और मनरेगा के लिए निधि को बढ़ाया गया है, जो कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी। लेकिन वास्तविक परिवर्तन, वेतन, बाजार उपलब्धता और सिंचाई जैसे मूल चुनौतियों के समाधान से ही हासिल होगा। साल 2026 के बजट में गृह मंत्रालय को 2.55 लाख करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं। इस बजट में सीमा सुरक्षा और आंतरिक जांच क्षमताओं को बेहतर व सुदृढ़ करने की जरूरत पर बल दिया गया है। जाहिर है इसके लिए ज्यादा बजट की जरूरत होगी।

सरकार द्वारा व्यवस्थित प्रशासनिक खर्चों में की गई वृद्धि से यह साफ होता है कि देश की सुरक्षा चुनौतियों को वित्तीय प्राथमिकता मिली है। लेकिन सवाल है क्या सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों को भी पर्याप्त संसाधन मिल रहे हैं? कुल मिलाकर साल 2026-27 का केंद्रीय बजट सजगता के साथ वैश्विक अनिश्चितता की स्थिति में विकास दर बनाये रखने के लिए हर तरह की कोशिशों को करता दिख रहा है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और पूंजीगत निवेश से दीर्घकालिक विकास का लक्ष्य

सबसे ज्यादा जोर इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी दक्षता और पूंजीगत निवेश को बढ़ावा देने में दिया गया है, जो कि बजट को दीर्घकालिक विकास के दृष्टिकोण वाला साबित करता है। साथ ही अमेरिका की टैरिफ नीतियों और दुनियाभर में पुनर्संयोजित हो रही अर्थव्यवस्थाओं के संक्रमणकाल में स्थिर और विकासवान बने रहने की कोशिश की गई है। अगर बजट की मुख्य आलोचनाओं पर ध्यान केंद्रित करें तो यह बजट करदाताओं को स्पष्ट कर राहत देने से बचा है, जो कि मध्यमवर्ग उम्मीद लगाये बैठा था। इसकी दूसरी प्रमुख आलोचना यह हो सकती है कि बजट पूंजीगत व्यय पर बुरी तरह से निर्भर है। ऐसे में वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब परियोजनाएं सरकार के अनुमान के मुताबिक समय पर पूरी होंगी।

-लोकमित्र गौतम
-लोकमित्र गौतम

इस बजट की तीसरी प्रमुख आलोचना इस रूप में की जा सकती है कि बजट ने व्यापक सामाजिक चुनौतियों जैसे बेरोजगारी, स्वास्थ्य और शिक्षा में प्रणालीगत सुधार पर विशेष जोर नहीं दिया, जबकि उसकी बहुत जरूरत थी। खासकर बेरोगजारी तो इस समय हमारे देश का नहीं बल्कि पूरी दुनिया का प्रमुख आर्थिक मुद्दा बन गई है। फिर भी साल 2026-27 का केंद्रीय बजट एक व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण के साथ पेश हुआ है, जिसमें विकास, निवेश और प्रतिस्पर्धा के मुद्दों को प्राथमिकता से शामिल किया गया है। यह एक तरह से भावी आर्थिक चुनौतियों के लिए तैयार रहने की कोशिश है। लेकिन ये अभी घोषणाएं हैं, इनका सही लाभ समयबद्ध, पारदर्शी क्रियान्वयन और प्रभाव नीति संचालन के साथ ही संभव होगा।

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