वैशाख संकष्टी चतुर्थी व्रत शुभ-मंगल की कामना करने का पर्व
तिथि मुहूर्त
विक्रम पंचांग के अनुसार वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 5 अप्रैल, रविवार की दोपहर 11 बजकर 59 मिनट पर शुरू हो रही है, जो 6 अप्रैल, सोमवार की दोपहर 2 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर वैशाख संकष्टी चतुर्थी व्रत 5 अप्रैल, रविवार को रखा जाएगा।
शुभ योग
इस साल वैशाख संकष्टी चतुर्थी वज्र योग और विशाखा नक्षत्र में है। वज्र योग सुबह से दोपहर 2 बजकर 44 मिनट तक है। उसके बाद से सिद्धि योग बनेगा। विशाखा नक्षत्र सुबह से देर रात 12 बजकर 8 मिनट तक है, उसके बाद से अनुराधा नक्षत्र रहेगा।
पूजा मुहूर्त
5 अप्रैल, रविवार की सुबह 7 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक।
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना गया है। प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को विकट संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के कठिन से कठिन संकट दूर हो जाते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
पूजा विधि
व्रत के दिन सुबह स्नान करके लाल या पीले वस्त्र धारण करें। भगवान गणेश के सामने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। दिनभर सात्विक रहें और क्रोध या अपशब्द कहने से बचें। सूर्यास्त के बाद गणेश जी की मूर्ति को लाल कपड़े पर स्थापित करें। उन्हें सिंदूर, अक्षत, फूल और 21 दूर्वा चढ़ाएं। बप्पा को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। शाम को चंद्रोदय के समय चांदी के पात्र में दूध, जल और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद ही व्रत का पारण करें। पूजा का समापन आरती से करें और पूजा में हुई गलती के लिए माफी मांगे।
पूजा मंत्र
- ॐ नमो सिद्धिविनायकाय सर्वकार्यकर्त्रे, सर्वविघ्न प्रशमनाय।।
- वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ,
निर्विघ्नं कुरु मे देवा, सर्व कार्येषु सर्वदा।। - ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे, प्रियाणां त्वा प्रियपतिं हवामहे, निधीनां त्वा निधिपतिं हवामहे।।
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



