हैदराबाद में वेयरहाउसिंग लेन-देन में गिरावट, किराए में 4 वृद्धि
हैदराबाद, हैदराबाद के वेयरहाउसिंग बाजार में 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है। हालाँकि गोदामों के किराए में 4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। इसके बावजूद उच्च गुणवत्ता वाली लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के प्रति कंपनियों की रुचि में वृद्धि दर्ज की गयी।
अंतरराष्ट्रीय प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी नाइट फ्रैंक इंडिया की नवीनतम रिपोर्ट इंडिया वेयरहाउसिंग मार्केट 2025 के अनुसार, बीते वर्ष 2025 के दौरान लगभग 3.4 मिलियन वर्ग फुट क्षेत्र में लेनदेन दर्ज किया गया। वर्ष 2024 में यह आँकड़ा 3.5 मिलियन वर्ग फुट था, जिससे वर्ष-दर-वर्ष आधार पर लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। रिपोर्ट में बताया गया है कि गोदामों के लेनदेन में थोड़ी कमी के बावजूद बाजार की स्थिति स्थिर बनी हुई है।
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ग्रेड-ए वेयरहाउस की लेनदेन में 55% हिस्सेदारी
मजबूत औद्योगिक माँग, बेहतर अवसंरचना विकास और विभिन्न क्षेत्रों से लगातार आ रहे प्रस्तावों के कारण वेयरहाउसिंग क्षेत्र में सक्रियता बनी हुई है। कुल लेनदेन में ग्रेड-ए वेयरहाउस की 55 प्रतिशत हिस्सेदारी से स्पष्ट है कि उच्च गुणवत्ता वाली लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के प्रति कंपनियों की रुचि में इजाफा हुआ है।
उद्योगवार विश्लेषण के अनुसार, थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स और अन्य मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों ने वेयरहाउसिंग स्थान की माँग में प्रमुख भूमिका निभाई। इन दोनों क्षेत्रों की कुल लीजिंग गतिविधियों में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रही, जबकि बाद ई-कॉमर्स क्षेत्र की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत दर्ज की गई। वर्ष 2025 में कुल लेनदेन का 92 प्रतिशत हिस्सा वेयरहाउसिंग उपयोग के लिए रहा, जबकि शेष 8 प्रतिशत हिस्सा औद्योगिक गतिविधियों, जैसे हल्के निर्माण और असेंबली कार्यों के लिए उपयोग में लाया गया। इससे स्पष्ट है कि हैदराबाद तेजी से क्षेत्रीय वितरण केंद्र के रूप में उभर रहा है।
क्लस्टर के आधार पर देखें तो उत्तर हैदराबाद का मेड़चल क्षेत्र सबसे बड़ा वेयरहाउसिंग केंद्र बनाकर उभरा है, जिसने वर्ष 2025 में कुल लेनदेन का 60 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया। इसका प्रमुख कारण एनएच-44 और आउटर रिंग रोड के निकट इसकी रणनीतिक स्थिति है।
शमशाबाद क्लस्टर में 30% वेयरहाउसिंग हिस्सेदारी दर्ज
वहीं दक्षिण हैदराबाद के शमशाबाद क्लस्टर ने 30 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की। यह क्षेत्र राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और एरोट्रोपोलिस के निकट होने के कारण लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस क्षेत्र में ग्रेड-ए वेयरहाउस की हिस्सेदारी 61 प्रतिशत रही। पश्चिम हैदराबाद के पटनचेरू क्लस्टर ने कुल लेनदेन का 10 प्रतिशत योगदान दिया। मुंबई-हैदराबाद राजमार्ग से अच्छी कनेक्टिविटी के कारण यह क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा और ई-कॉमर्स कंपनियों को आकर्षित कर रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि हैदराबाद के वेयरहाउसिंग बाजार में औसत किराया 20.7 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रति माह से बढ़कर 21.5 रुपये प्रति वर्गफुट प्रति माह हो गया, जो 4 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है। ग्रेड-ए वेयरहाउस का सबसे अधिक किराया पटनचेरू क्लस्टर में दर्ज किया गया, जहाँ यह 24 से 28 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रति माह के बीच रहा।
नाइट फ्रैंक इंडिया के राष्ट्रीय निदेशक जोसेफ थिलक ने कहा कि 2025 में लीजिंग की गति थोड़ी संतुलित रही, लेकिन हैदराबाद के वेयरहाउसिंग बाजार की बुनियादी मजबूती बरकरार है। बेहतर अवसंरचना, विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से बढ़ती माँग और संस्थागत स्तर की आपूर्ति के कारण शहर आने वाले समय में दक्षिण और मध्य भारत के प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में और मजबूत होगा।
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