पश्चिम एशिया संकट से भारतीय दवा कंपनियों को बड़ा झटका

नयी दिल्ली, पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष और वैश्विक ढुलाई लागत में बढ़ोतरी होने से भारतीय दवा उद्योग को मार्च महीने के निर्यात में व्यवधान से 2,500 करोड़ रुपये से 5,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। भारतीय औषधि निर्यात प्रोत्साहन परिषद (फार्मेक्सिल) के चेयरमैन नमित जोशी ने कहा कि खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों का हिस्सा भारतीय दवा कंपनियों के कुल निर्यात में 5.58 प्रतिशत है।

औषधि निर्यात का मूल्य पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र में वित्त वर्ष 2020-21 के 132.04 करोड़ डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 174.96 करोड़ डॉलर हो गया।

दवा निर्यात पर संकट का गहरा असर पड़ने की आशंका

जोशी के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, ओमान, कुवैत और यमन जैसे प्रमुख बाजार भारत पर सस्ती और जेनेरिक दवाओं के लिए काफी निर्भर हैं। जॉर्डन, कुवैत और लीबिया जैसे उभरते बाजारों में भी निर्यात बढ़ा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक माल ढुलाई बाजार में जारी चुनौतियों से भारतीय दवाओं का खाड़ी और उत्तरी अफ्रीकी देशों में निर्यात प्रभावित हो सकता है।

फार्मेक्सिल प्रमुख ने कहा कि आयात और निर्यात दोनों के लिए मालढुलाई की दरें दोगुनी हो गई हैं तथा प्रति खेप 4,000 से 8,000 डॉलर तक अतिरिक्त शुल्क लगने से कंपनियों पर भारी दबाव है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण मार्च में निर्यात पूरी तरह बाधित होने की स्थिति में उद्योग को लगभग 2,500 करोड़ रुपये से 5,000 करोड़ रुपये तक का संभावित नुकसान हो सकता है। जोशी ने सरकार से अपील की कि दवा निर्यातकों के लिए मालभाड़ा राहत, सब्सिडी और लॉजिस्टिक सहायता जैसे उपायों पर विचार किया जाए। (भाषा)

-यह भी पढ़ेदमरे महाप्रबंधक ने किया नामपल्ली और चेर्लापल्ली स्टेशन का निरीक्षण

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button