अनुसंधान – उन्मुख सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल पर कार्यशाला आरंभ
हैदराबाद, केन्द्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) के अधीन राष्ट्रीय भारतीय आयुर्विज्ञान विरासत संस्थान (एनआईआईएमएच), हैदराबाद द्वारा नामपल्ली स्थित होटल क्वालिटी इन के इम्पीरियल हॉल में अनुसंधान-उन्मुख सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रमों के अंतर्गत तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया।

जारी प्रेस विज्ञप्ति के अुनसार, कार्यशाला का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को आधुनिक अनुसंधान पद्धतियों से जोड़ना है। वर्तमान में कई महत्वपूर्ण शोध परियोजनाएँ इन कार्यक्रमों के साथ एकीकृत हैं, जैसे सिकल सेल एनीमिया में आयुर्वेद-आधारित जीवनशैली और औषधीय पौधों के प्रभाव का मूल्यांकन, तथा विरुद्ध आहार एवं सोरायसिस के बीच संबंध पर केस-कंट्रोल सर्वे अध्ययन का समावेश है।
संस्थान के अनुसार, उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए यह प्रशिक्षण देशभर के विभिन्न आयुर्वेद संस्थानों से जुड़े चिकित्सा अधिकारियों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों को कार्यप्रणाली, प्रलेखन और सर्वेक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर कौशल प्रदान करेगा। अनुसंधान प्रक्रिया में अन्वेषकों की टीम की अनुसंधानपरक क्षमता का निर्माण ही वास्तव में जमीनी प्रभाव लाने की कुंजी साबित होती है।
उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में तेलंगाना सरकार के आयुष विभाग के निदेशक डॉ. पेरुगु श्रीकांत बाबू, केन्द्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के महानिदेशक प्रो. (वैद्य) रबिनारायण आचार्य, उप-महानिदेशक डॉ. एन. श्रीकांत, एनआईआईएमएच, हैदराबाद प्रभारी सहायक निदेशक डॉ. जी.पी. प्रसाद सहित सीसीआरएएस के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और सीसीआरएएस कुलगीत से
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं सीसीआरएएस कुलगीत के साथ हुई। जिसके पश्चात डॉ. जी.पी. प्रसाद ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संबोधन दिया। तत्पश्चात, कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दीपा माखीजा (सहायक अनुसंधान अधिकारी, आयुर्वेद) ने उपस्थित प्रतिनिधियों को कार्यशाला के उद्देश्य, नियोजन और महत्व के बारे में जानकारी प्रदान की।

कार्यक्रम समन्वयक और सह-अध्यक्ष डॉ. एन. श्रीकांत ने अन्वेषकों के लिए आवश्यक अनुसंधान बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इसकी आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य अतिथि डॉ. पेरुगु श्रीकांत बाबू ने सीसीआरएएस एवं तेलंगाना आयुष विभाग के बीच सहयोगात्मक कार्यों में विशेष रुचि दिखाते हुए आयुर्वेद को जन-सामान्य तक पहुँचाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। महानिदेशक ने परिषद द्वारा अनुसंधान-उन्मुख सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में दिए जा रहे योगदान और इसे अधिक लोकोपयोगी बनाने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों को साझा किया।
उद्घाटन सत्र के दौरान संस्थान द्वारा प्रकाशित दो पुस्तकों सीसीआरएएस-राष्ट्रीय भारतीय आयुर्विज्ञान विरासत संस्थान (एनआईआईएमएच), हैदराबाद, भारत में संरक्षित 105 यूनानी चिकित्सा पांडुलिपियों की वर्णनात्मक सूची तथा इब्न सीना आकदमी ऑफ मेडिकल मेडिसिन एंड साइंसेज (आईएएमएमएस), अलीगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत में संरक्षित 373 यूनानी चिकित्सा पांडुलिपियों की वर्णनात्मक सूची का विमोचन किया गया। कार्यशाला में देशभर के 31 राज्यों से 150 से अधिक आयुर्वेद वैज्ञानिक एवं अनुसंधानकतासिहस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम में डॉ. सुभोस (एडी), डॉ. गोविंदा रेड्डी (एडी), डॉ. अशफाक अहमद, डॉ. वी. श्रीदेवी, संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सक्रिय सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. साकेत राम (अनुसंधान अधिकारी) ने किया। डॉ. संतोष माने (अनुसंधान अधिकारी) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
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