चंद्रमा की करें पूजा (एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत)
तिथि मुहूर्त
विक्रम पंचांग के आधार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 5 मई, मंगलवार की सुबह 5 बजकर 24 मिनट पर शुरू हो रही है, जो 6 मई, बुधवार की सुबह 7 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत 5 मई को रखा जाएगा।
एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। इस दिन व्रत रखकर विघ्नहर्ता श्रीगणेश के एकदंत स्वरूप की पूजा की जाती है। इस साल इस शुभावसर पर दो शुभ योग बन रहे हैं।
सुबह गणेश जी की पूजा करने के बाद शाम में चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करके पूजा करते हैं और अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करके व्रत पूर्ण करते हैं। संकष्टी चतुर्थी व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के कष्ट और संकटों का नाश होता है, जिससे जीवन में शुभता और सफलता मिलती है।
महत्व
एकदंत संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत और पूजा करने से बाधाएं दूर होती हैं, जीवन में सुख और शांति आती है, परिवार का कलह, अशुभता, जीवन में आने वाले संकट आदि दूर होते हैं। कॅरियर में सफलता प्राप्ति के लिए भी एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है।
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