मिलाप के 75 साल – बेमिसाल

बंजर धरती को बिरले ही हरा-भरा कर सकते हैं। हिन्दी के लिए दक्षिण भारत की धरती भी कुछ इसी तरह की है। हालाँकि यह युद्धवीरजी की जुझारू प्रवृत्ति ही थी, जिस कारण 75 वर्ष पहले मिलाप अखबार का बीजारोपण किया गया। आज यह बीज, बट वृक्ष बन चुका है, जिसकी छाया में हिन्दी प्रेमी सुकून का अनुभव करते हैं। इसका कारण हैं कि मिलाप ने जिस तरह उद्दात्त पत्रकारिता का उदाहरण स्थापित किया है, वह बिरले ही मिलता है।

पत्रकारिता के क्षेत्र में इतिहास रचने वाले मिलाप अख़बार ने आज हैदराबाद में अपनी स्थापना के 75 वर्ष पूरे कर लिये हैं। इस जश्न के मौके पर मिलाप परिवार अपने पाठकों का अभिनंदन करता है। जुझारू स्वंत्रता सेनानी एवं समाजसेवी युद्धवीर जी स्कवयं किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं और उनके द्वारा स्थापित अखबार भी किसी परिचय का मोहताज नहों है। पत्रकारिता की जो मशाल, युद्धवीर जी ने स्वतंत्र भारत के हैदराबाद प्रांत में 1 अक्तूबर 1950 में जलाई थी, वह आज भी सामाजिक, राजनीतिक, साहित्यिक, शैक्षणिक एवं सामुदायिक क्षेत्रों को लगातार रोशनी दे रही है।

‘मिलाप’: स्वतंत्रता संग्राम से डिजिटल युग तक की मशाल

युद्धवीर जी वर्ष 1948 में हैदराबाद आये थे। उन्होंने यहाँ से 1950 में मिलाप को पहले उर्दू में और बाद हिन्दी में समानांतर रूप से प्रकाशित करना शुरू किया। स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लेकर वर्षों जेल की यातनाएँ सहने वाले युद्धवीरजी जानते थे कि लोकतंत्र को मज़बूत करने का मात्र माध्यम अख़बार निकालना ही है, जिससे समाज को जागरूक किया जा सकता हैं।

यह तजुर्बा वे पहले भी देश की स्वतंत्रता के लिए कर चुके थे, तब कहा जाता था कि ‘खींचो न कमानों को, न तलवार निकालो, जब तोप मुकाबिल हो तो अख़बार निकालो। और अखबार निकल गया और मिलाप के प्रकाशन ने 75 साल तक निरंतर पाठक समुदाय से जुड़े रहने का इतिहास रच दिया। यूँ मिलाप ने पूरी सदी को रोशन किया है। आज्ञदी से पहले लाला खुशहालचंद (महात्मा आनंद स्वामी) ने मिलाप का प्रकाशन 1923 में बैसाखी के दिन लाहौर से शुरू किया था।

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पिछले लगभग एक सर्दी के दौरान हिंदी मिलाप ने हर उस दौर को देखा और जिया है, जो आधुनिक भारत के इतिहास का हिस्सा है। आज़ादी का संघर्ष, राज्यों का पुनर्गठन, आपातकाल के उतार-चढ़ाव और डिजिटल युग का उदय, इन सबमें मिलाप अख़बार एक साक्षी और मार्गदर्शक रहा है। ‘मिलाप’ ने हमेशा अपने सरोकारों में देश और समाज को प्राथमिकता दी है और यही वजह है कि इस अख़बार ने पीढ़ियों के विश्वास को बनाए रखा है। पत्रकारिता की इस हीरक यात्रा की कई सारी यादें हम इस पूरे महीने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे।

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