नीतिगत स्थिरता और विकसित भारत विजन बजट की नींव: सीतारमण

नयी दिल्ली, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नीतियों में बार-बार बदलाव से बचने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जोर ने आम बजट 2026-27 को आकार दिया है। यह बजट नीतिगत स्थिरता पर आधारित है और इसके केंद्र में ‘विकसित भारत’ के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को रखा गया है।

एक नए पांच वर्षीय वित्तीय चक्र और 21वीं सदी की दूसरी तिहाई के पहले बजट के रूप में तैयार यह दस्तावेज राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए पूंजीगत व्यय, बुनियादी ढांचे के विस्तार और संरचनात्मक सुधारों को प्राथमिकता देता है।

सीतारमण ने पीटीआई-भाषा को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ”लोग स्थिरता चाहते हैं, और इसीलिए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को तीसरी बार चुना है। उस वोट में स्थिरता निहित है, और यह बात पिछले बजटों के माध्यम से नीतियों के क्रियान्वयन के तरीके में भी दिखाई देती है।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की लगातार तीसरी चुनावी जीत राजनीतिक और नीतिगत स्थिरता का स्पष्ट सार्वजनिक समर्थन है, जिसे सरकार भारत की दीर्घकालिक विकास रणनीति के लिए महत्वपूर्ण मानती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने दिशा में अचानक बदलाव से बचने की जरूरत पर लगातार जोर दिया है। उन्होंने कहा, ”प्रधानमंत्री हमेशा नीतियों में बार-बार बदलाव से बचने की बात करते हैं। एक बार जब नीतिगत दिशा की घोषणा हो जाती है, तो सरकार उसके क्रियान्वयन में स्थिर रहती है।”

सभी क्षेत्रों में नीति-निर्माण का मार्गदर्शन करेगा

सीतारमण ने कहा कि बजट को केवल एक साल की वित्तीय कवायद के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे एक लंबी योजना के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ”हम 2047 और उसके बाद 2050 तक भी देख रहे हैं। ध्यान स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक एक विकसित भारत के निर्माण पर है और अगले 25 वर्षों में भारत को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करना है।”

वित्त मंत्री के अनुसार यह दीर्घकालिक नजरिया आने वाले दशकों में निरंतर विकास, संस्थागत मजबूती और आर्थिक लचीलेपन पर जोर देने के साथ सभी क्षेत्रों में नीति-निर्माण का मार्गदर्शन करेगा। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सार्वजनिक व्यय के बारे में सीतारमण ने कहा कि पूंजीगत व्यय इस सरकार की सफलता की कहानियों में से एक है। उन्होंने बताया कि विभिन्न सरकारी विभागों के लिए बजटीय प्रावधानों ने कोविड महामारी के बाद बुनियादी ढांचे के विकास में उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं। उन्होंने आगे कहा कि 50 वर्षीय ब्याज मुक्त ऋण का उपयोग करने में राज्यों की भूमिका भी उतनी ही प्रभावशाली रही है, और कई राज्यों ने अपनी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पूरा कर अधिक धन का उपयोग करने की अपनी क्षमता साबित की है।

सरकार जल्द ही बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति का गठन करेगी: सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार विकसित भारत की वित्त पोषण जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बड़े बैंक बनाने का खाका तैयार करने के लिए जल्द ही ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति’ का गठन करेगी। उन्होंने पीटीआई वीडियो को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ”हम चाहते हैं कि समिति हमें बताए कि हमें किस तरह के कदम उठाने की जरूरत है ताकि विकसित भारत के वित्त पोषण के लिए बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।”

यह पूछने पर कि क्या यह समिति सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय का सुझाव देगी, सीतारमण ने कहा कि किसी को इसे इस तरह सीमित दायरे में नहीं देखना चाहिए।उन्होंने कहा, ”यह भारत के बैंकिंग क्षेत्र को इतना बड़ा बनाने के लिए है कि वह विकसित भारत के वित्त पोषण का ध्यान रख सके। आपको विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचना है… इसके लिए धन, वित्त पोषण, ऋण और आम आदमी तक बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच की आवश्यकता है।”

कंपनियों को एकीकृत करने की दिशा में एक कदम

समिति के गठन की समय सीमा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ”हम इसे जल्द से जल्द करेंगे।” उन्होंने एक फरवरी को बजट भाषण में कहा था, ”मैं वित्तीय स्थिरता, समावेश और उपभोक्ता संरक्षण को सुरक्षित रखते हुए, बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करने और इसे भारत के विकास के अगले चरण के अनुरूप तैयार करने के लिए ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति’ स्थापित करने का प्रस्ताव करती हूं।”

सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी में दक्षता सुधारने के लिए बजट में पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन (आरईसी) के पुनर्गठन का प्रस्ताव भी दिया गया था। विलय की संभावना के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ”संबंधित मंत्रालय में काफी काम हुआ है। देखते हैं कि वे इसे कैसे आगे बढ़ाते हैं।” पीएफसी और आरईसी दोनों ही ‘नवरत्न’ केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम हैं, और यह अधिग्रहण एक ही क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को एकीकृत करने की दिशा में एक कदम है। (भाषा)

यह भी पढ़े25 को धर्म ध्वजा फहराएँगे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button