एक करोड़ के डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड मामले में तीन गिरफ्तार

हैदराबाद, हैदराबाद की साइबर अपराध पुलिस ने 1.07 करोड़ रुपये के डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के मामले में बैंक खाते उपलब्ध करवाने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। नगर पुलिस उपायुक्त (साइबर अपराध) वी. अरविंद बाबू ने बताया कि हैदराबाद निवासी 62 वर्षीय शिकायतकर्ता ने गत 16 अक्तूबर को डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड की शिकायत की थी। साइबर ठगों ने शिकायतकर्ता को फोन कर अपने आपको मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। इसके बाद साइबर ठगों ने शिकायतकर्ता को यह कहकर डराया-धमकाया कि उसका सेलफोन नंबर और आधार कार्ड अवैध क्रियाकलापों के लिए उपयोग किया गया है। इस कारण उसके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।

फोन करने वाले साइबर ठग ने अपने आपको इन मामलों का जाँच अधिकारी बताते हुए शिकायतकर्ता को डिजिटल अरेस्ट करने की धमकी दी। इसके बाद इस मामले से उसे बरी करवाने का आश्वासन देकर विभिन्न किश्तों में 1.07 करोड़ रुपये अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित करवाए।

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साइबर ठगी में बैंक खाते उपलब्ध कराने का खुलासा

साइबर अपराध पुलिस इंस्पेक्टर के. प्रसाद राव ने एसीपी आर.जी. शिवा मारुति के नेतृत्व में तकनीकी रूप से छानबीन करने के बाद दिल्ली निवासी गुरदीप सिंह उर्फ लक्की नारंग उर्फ लक्की (42), हरप्रीत सिंह उर्फ करण कौशिक उर्फ विराज (36) और कुमार मोहित उर्फ मोहित कौशिक (30) को गिरफ्तार कर लिया। जाँच-पड़ताल करने पर पता चला कि गुरदीप सिंह दिल्ली में मणि एक्सचेंज और ट्रैवेल का बिजनेस करता है।

हरप्रीत सिंह आरो टेक्निशियन के रूप में कार्यरत है। तीसरा आरोपी कुमार मोहित फूड व्यापार प्रारंभ करने की योजना बना रहा था। तीनों दोस्त हैं और तीनों ने अपने दो साथियों प्रशांत कुमार और दीपक कुमार के साथ मिलकर बैंक खातेधारों को दिल्ली और जयपुर बुलाकर उन्हें कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खातों का विवरण प्राप्त कर साइबर ठगी को अंजाम देने वाले मुख्य साजिशकर्ता तक इसे पहुँचाते थे। इस प्रकार कमीशन के आधार पर पाँचों बैंक खाते उपलब्ध करवा रहे थे। दीपक और प्रशांत कुमार को इसके पूर्व इसी प्रकार के मामलों में पुलिस गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज चुकी है।

इन तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद उन्हें ट्रांजिट वारंट पर हैदराबाद लाकर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
तीनों ने गुजरात, केरल, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना समेत देश के अन्य राज्यों में इसी प्रकार की साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम दिया। आरोपी अपने आपको सीबीआई, कस्टम और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर लोगों को डरा-धमकाकर उन्हें साइबर ठगी का शिकार बना रहे थे।

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