राजभाषा विभाग द्वारा अगरतला में क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन संपन्न

भारत के पूर्वी राज्य त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में फरवरी की 20 तारीख को भारत सरकार, गृह मंत्रालाय पे अंतर्गत राजभाषा विभाग द्वारा पूर्व, पूर्वोत्तर एवं उत्तर क्षेत्र का संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन इंटरनेश्नल इंडोर एक्जीबिशन सेंटर में आयोजित किया गया। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह उपस्थित थे।

अवसर पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बंडी संजय कुमार, लोकसभा सांसद त्रिपुरा (पश्चिम) बिप्लब कुमार देब, लोकसभा सांसद त्रिपुरा (पूर्व) श्रीमती महारानी कृति देबबर्मन, राज्यसभा सांसद राजीव भट्टाचार्जी, त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग की अध्यक्ष प्रो. मिलन रानी जमातिया, नागरी लिपि परिषद, नागालैंड के अध्यक्ष डॉ. बी.पी.फिलिप, राजभाषा विभाग की सचिव श्रीमती अंशुली आर्या, संयुक्त सचिव डॉ. निधि पांडेय सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

भाषाओं का सह-अस्तित्व समझना हो तो त्रिपुरा आएँ : अमित शाह

अमित शाह ने कहा कि कई वर्षों तक हिन्दी के विरुद्ध प्रचार किया जाता रहा कि इसे थोपा जा रहा है, लेकिन हिन्दी और स्थानीय भाषाओं के बीच कभी झगड़ा हो ही नहीं सकता है, क्योंकि ये सभी एक ही माँ की बहनें हैं, जो एक साथ पनपीं और साथ आगे बढ़ीं। हिन्दी की कभी भी बंगाली, गुजराती, तमिल, तेलुगु या मलयालम जैसी भाषाओं से स्पर्धा नहीं हो सकती। जब हिन्दी को बढ़ावा मिलता है, तब ये सारी भाषाएं अपने आप ही मजबूत हो जाती हैं।

यहाँ तीन स्थानीय भाषाएँ समानांतर रूप से हर पल आगे बढ़ रही हैं। नॉर्थ ईस्ट के कई महानुभावों ने हिन्दी के माध्यम से देश और दुनिया में यहां का नाम रोशन किया है। त्रिपुरा के ही सुपुत्र डॉ. भूपेन हजारिका, एस.डी.बर्मन, आर.डी.बर्मन, सिक्किम के डैनी डेंजोगप्पा, जुबिन गर्ग सहित कइयों ने हिन्दी के माध्यम से दुनिया में प्रसिद्धि प्राप्त की। उनके लिये हिन्दी ही देश के बड़े फलक पर जाने का मंच बनी। राजभाषा देश भर में पहुंचने का माध्यम है और यही बात हर राज्य पर लागू होती है।

अनेक संस्कृतियों और भाषाओं का सुंदर

संगम है त्रिपुरा : बंडी संजय

क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन को हिन्दी में संबोधित करते हुए पेंद्रीय गृहराज्य मंत्री बंडी संजय ने कहा कि पेंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में हिन्दी और भारतीय भाषाओं को नई दिशा मिली है और प्रयास है कि भाषा बाधा नहीं, बल्कि सेतु बने। त्रिपुरा जैसे राज्य में अनेक भाषाएं और बोलियां स्वाभाविक रूप से सह-अस्तित्व में हैं।

पूर्वोत्तर जैसे बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक क्षेत्र में हिन्दी भाषा बोलचाल एवं राष्ट्रीय एकता का प्रभावी सेतु बनकर स्थापित हुई है। त्रिपुरा में हिन्दी भिन्नता में एकता के भारतीय आदर्श को साकार करने का सशक्त माध्यम है। मैं तेलुगु भाषी हूँ। मुझे हिन्दी सीखने की प्रेरणा पेंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिली।

हिन्दी का प्रचार होना चाहिए : डॉ.माणिक साहा

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने अपने संबोधन में कहा, सभी स्थानीय भाषाओं का संरक्षण और प्रचार साथ-साथ होना चाहिए। उत्तर पूर्व की भावना यही है कि हिन्दी का प्रचार होना चाहिए और साथ में स्थानीय भाषाओं का भी प्रयोग होते रहना चाहिए। हिन्दी दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है।

यह आम लोगों की भावनाओं से जुड़ी है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारतीय भाषा के नवजागरण का सुनहरा दौर शुरु हुआ है। प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय भाषाओं का प्रयोग करके भारतीय भाषाओं का गौरव बढ़ाया है। आज त्रिपुरा में हिन्दी बोलने वालों की संख्या लगातार बढ़ी है। त्रिपुरा केंद्रीय विश्विविद्यालय के हिन्दी विभाग ने भाषा एवं साहित्यक गतिविधियों को प्रोत्साहित करते हुए राष्ट्रीय महत्व को बढ़ाया है।

बोडो समुदाय ने अपनी भाषा के लिये देवनागरी लिपि चुनी : प्रो.मिलन रानी जमातिया

त्रिपुरा विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग की अध्यक्ष प्रो.मिलन रानी जमातिया ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत जिसे हम अष्टलक्ष्मी कहते हैं, उनकी संतानें और उनकी नई पीढ़ियां देश के विकास के साथ जुड़ने के लिये उठ खड़ी हुई हैं। अब वो इस पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। अरुणाचल के लोगों ने भी निर्णय लिया है कि वो भी अब देवनागरी को चुनेंगे।

नागालैंड में आठवीं कक्षा तक पढ़ाई जाती है हिन्दी : डॉ. बी.पी.फिलिप

नागरी लिपि परिषद, नागालैंड के अध्यक्ष डॉ. बी.पी.फिलिप ने कहा सात समुद्र पार की भाषा अंग्रेजी को पूरे विश्व ने आत्मसात किया है तो हमारी विरासत हिन्दी को हम क्यों न आत्मसात करें? बचपन। उन्होंने नागालैंड का उदाहरण देते हुए कहा कि नागालैंड में पांचवीं कक्षा से हिन्दी पढ़ाई जाती थी। यहाँ छठी व सातवीं कक्षा तक बच्चे पढ़ाई छोड़ देते थे।

अत: हमने नागालैंड में हिन्दी को कक्षा एक से लागू किया है। पूरे पूर्वोत्तर में सिर्फ नागालैंड में ही कक्षा एक से आठवीं तक हिन्दी पढ़ाई जाती है। मैं देश के सभी राज्यों में गया हूँ। मेरा काम हिन्दी से चल गया। मेरा गृहमंत्री और राजभाषा विभाग से अनुरोध है कि राजभाषा हिन्दी को आगे बढ़ाने के लिये नागरी लिपि को आगे बढ़ाया जाए।

हिन्दी दोस्ती की भाषा है : वी.आर. वाल्ते

मिजौरम में सन् 1966 में भारत से अलग होने का जातीय आन्दोलन शुरु हुआ था। जनता को भारतीय सेनाओं (हिन्दी बोलने वालों) के प्रहार सहने पड़े, जिससे वो हिन्दी को दुश्मनों की भाषा मान बैठे। उनका मानना था कि हिन्दी सिखोगे या सिखाओगे तो गोली खाओगे। वर्तमान में हम भूमिपुत्र (मिजौ लोग) हिन्दी को अब दोस्ती की भाषा समझने लगे हैं। इसमें वर्तमान मीडिया का बड़ा योगदान है।

त्रिपुरा के पड़ोसी राज्य मिजौरम हिन्दीतर भाषी प्रदेश है, जिसकी मुख्य भाषा मिजा है। यह भारत की मुख्य भाषाओं के न तो निकट है और न ही उनसे संबंधित है। इसलिये मिजौ समुदाय के लिए हिन्दी विदेशी भाषा जैसा थी। इतनी भिन्नता के बावजूद मिजौ भाषी लोग पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों से पीछे नहीं हैं। एक बड़ी खबर है मिजौरम सरकार ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी की है कि शैक्षणिक वर्ष 2026-2027 से मीडिल व हाई स्कूलों में हिन्दी स्पीकिंग पीरियड प्रारंभ किया जाएगा।

छात्रों को समझा रहे हैं हिन्दी का महत्त्व : प्रिया रॉय

अवसर पर हिन्दी शिक्षिका प्रिया रॉय ने कहा कि आज यह सिर्फ हिन्दी का सम्मेलन नहीं है। यह भारत की आत्मा और हिन्दी भाषा का उत्सव है। मैं बंगाली हूँ, त्रिपुरा की निवासी हूँ। मुझे अपनी मातृभाषा बांगला से प्यार है और मैं हिन्दी की शिक्षिका हूँ। विगत 30 वर्षों से हिन्दी पढ़ा रही हूँ। हमें छात्रों को समझाना पड़ता है, उदाहरणों के द्वारा, कविताओं के द्वारा, रचनाओं के द्वारा। पहले अपनी मातफभाषा का सम्मान करो।

उसके बाद दूसरी भाषाओं का सम्मान भी करो। यहाँ हिन्दी बढ़ रही है। युवा पीढ़ी, बच्चे, छात्र हिन्दी के माध्यम से आगे आ रहे हैं। वो अपने विचारों को किताबों व पत्रिकाओं में प्रकाशित कर रहे हैं। उन्होंने अपने मन की बातें व विचारों को दो या तीन पंक्तियों में नहीं, बल्कि किताबों के द्वारा लिखना शुरू किया है।

राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय और त्रिपुरा सरकार की टीमों के बीच मैत्री क्रिकेट मैच

-प्रकाश जैन

संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन, त्रिपुरा के आयोजन से पूर्व 19 फरवरी, 2026 को राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय और त्रिपुरा सरकार की टीमों के बीच मैत्रीपूर्ण क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि, त्रिपुरा सरकार के मुख्य सचिव जे.के.सिन्हा थे, जिनके कर-कमलों से पुरस्कार वितरण किया गया। इसमें त्रिपुरा सरकार की टीम विजेता रही।

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