एचसीए के क्रियाकलापों की सिट जाँच के आदेश
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने हैदराबाद क्रिकेट संघ (एचसीए) के क्रियाकलापों में गत कुछ वर्षों से हो रही अनियमितताओं की जाँच सीबीसीआईडी के विशेष जाँच दल (सिट) द्वारा कराने के आदेश जारी किए। इसके लिए अतिरिक्त पुलिस आयुक्त स्तर के आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन करने के आदेश दिए। साथ ही अदालत ने एचसीए की एपेक्स काउंसिल के एक सदस्य समिति जस्टिस पी. नवीन राव के नेतृत्व में कार्य करने के भी आदेश दिए।
एचसीए का बीसीसीआई द्वारा अधिग्रहण करने, एचसीए के अनियमितताओं की सीबीआई जाँच करवाने और वर्ष 2025 के दौरान सम्पन्न साधारण सभा की बैठक को रद्द करने की माँग करते हुए सफीलगुड़ा क्रिकेट क्लब की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर उच्च न्यायालय की न्यायाधीश जस्टिस नागेश भीमपाका ने आज फैसला सुनाया। फैसला सुनाते हुए जस्टिस ने कहा कि लम्बे समय से एचसीए में चली आ रही अनियमितताओं को पूर्ण विराम लगाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एचसीए को एक निजी संस्थान के रूप में नहीं माना जा सकता, क्योंकि इसमें खिलाड़ियों को अवसर देने के अलावा बड़े पैमाने पर आर्थिक लेन-देन भी किया जाता है।
लंबे समय से आर्थिक अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप
इसके साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर यह संस्था प्रतिनिधित्व करती है और इस संस्था की कार्रवाई खिलाड़ियों और अन्य जुड़े हुए लोगों को प्रभावित करती है। लम्बे समय से आर्थिक अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप चले आ रहे हैं। अदालत द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक द्वारा इनकी पहचान की गई और इनकी जाँच के लिए एक स्वतंत्र जाँच की आवश्यकता बताई गई है। अदालत के अधिकार क्षेत्र में केवल प्रबंधन और वित्तीय लेन-देन तक सीमित है।
न्यायाधीश ने बताया कि एचसीए की आर्थिक अनियमितताओं की जाँच हेतु उच्च न्यायालय से लेकर उच्चतम न्यायालय तक कुछ समितियों का गठन किया गया और इन समितियों द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में आर्थिक अनियमितता स्पष्ट उभर कर आई है। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता की माँग पर तत्काल सीबीआई जाँच के आदेश नहीं दिए गए और एपेक्स काउंसिल को जिम्मेदारी सौंपने पर पुन: विवाद उभर कर आए।
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लीग मैच संचालन में पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल
इस कारण पूर्व न्यायाधीश जस्टिस पी. नवीन राव को अपेक्स काउंसिल की कार्रवाई का पर्यवेक्षण करने के लिए नियुक्त किया गया। इसके बाद वर्ष 2024-25 में सम्पन्न लीग मैच के संचालन से लेकर अन्य कार्यों में भी पारदर्शिता को लेकर आरोप सामने आए। इसके चलते आपराधिक मामले में दर्ज किए गए और वर्ष 2025 के दौरान एचसीए के सचिव को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा मामले दर्ज किए गए।
इससे स्पष्ट हो रहा है कि प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से संबंधित कुछ वर्चस्व वाले व्यक्तियों के प्रोत्साहन से मामले की जाँच-पड़ताल समाप्त नहीं हो रही है। इस कारण एचसीए की अनियमितताओं पर पूर्णविराम लगाने के उद्देश्य से ही सीबीसीआईडी के सिट द्वारा जाँच करने के आदेश जारी किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिट समिति के पास उपलब्ध रिकॉर्ड, जस्टिस अनिल आर. दवे, जस्टिस जी.वी. सीतापति, जस्टिस निसार अहमद काकरू और जस्टिस नवीन राव द्वारा पेश की गई रिपोर्ट समेत अन्य जानकारियाँ प्राप्त करेगी।
इसके साथ ही एचसीए के पदाधिकारियों, कर्मियों और एचसीए से जुड़ी एजेंसियों को उनके पास उपलब्ध रिकॉर्ड व दस्तावेज सिट को सौंपते हुए जाँच में सहयोग करने के आदेश दिए गए। इसके अलावा न्यायाधीश ने एक सदस्य समिति के रूप में नियुक्त किए गए जस्टिस नवीन राव को 5 लाख रुपये का वेतन देने के भी आदेश दिए।
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