तीन आईएएस अधिकारियों को अदालत की अवमानना का नोटिस

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने प्रिया दर्शिनी जुराला प्रॉजेक्ट की बाईं मुख्य नहर के समानांतर नहर के निर्माण हेतु खुदाई के लिए किसानों से अधिग्रहित की गई भूमि के संबंध में आर्थिक मुआवजा जारी न किए जाने पर कड़ा असंतोष जताया। अदालत ने भू-अधिग्रहण किए 15 वर्ष बीत जाने और अदालत द्वारा आदेश दिए जाने के बावजूद भी आर्थिक मुआवजा जारी न करने पर सरकार को खरी-खोटी सुनाई।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि आदेश का पालन न करने पर इसे अदालत की अवमानना के रूप में देखा जाएगा। अदालत की अवमानना के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए, इसका हवाला देते हुए तीन आईएएस अधिकारियों समेत भू-अधिग्रहण अधिकारी को नोटिस जारी की गयी। इसके साथ ही उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस सी.वी. भास्कर रेड्डी ने मामले की सुनवाई 28 मार्च तक स्थगित कर दी।

मुआवजे की अदायगी में देरी पर किसानों ने दायर की याचिका

अगली सुनवाई पर सिंचाई विभाग के विशेष सचिव राहुल बोज्जा, वित्त विभाग के विशेष सचिव के. रामकृष्णा राव, वनपर्ती ज़िलाधीश आदर्श सुरभि और वनपर्ती भू-अधिग्रहण अधिकारी डी. सुब्रमण्यम को नोटिस जारी व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर जवाब देने के आदेश दिए। सुनवाई के दौरान बताया गया कि प्रियादर्शिनी जूराला प्रॉजेक्ट की बाईं मुख्य नहर के समानांतर नहर के निर्माण हेतु खुदवाई के लिए वर्ष 2009 के दौरान भू-अधिग्रहण प्रक्रिया प्रारंभ की गई।

इसके बाद भू-अधिग्रहण के लिए आर्थिक मुआवजा की घोषणा करते हुए बताया गया कि सूखी भूमि के लिए 61,500 रुपये प्रति एकड़ और सिंचाई सुविधा युक्त भूमि के लिए 74,500 रुपये प्रति एकड़ व अन्य भूमि के लिए 89,500 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाएगा। मुआवजे की रकम बढ़ाने के लिए किसानों ने ज़िला अदालतों की शरण ली और उच्च न्यायालय में भी याचिका दायर की।

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अदालत ने एक वर्ग मीटर के लिए 700 रुपये बढ़ाने के आदेश दिए। उच्च न्यायालय के आदेश को सरकार की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार की अपील को खारिज कर दिया। इसके बावजूद भी संबंधित अधिकारियों ने मुआवजा जारी नहीं किया। इस कारण संयुक्त महबूबनगर ज़िले के आत्माकूर निवासी के. जगदीश्वर समेत 6 लोगों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।

सरकार के आदेश की अवहेलना पर अदालत का कड़ा रुख

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने गत सितंबर माह के दौरान मुआवजे की रकम बैंक में जमा करने और तीन माह के भीतर किसानों को मुआवजा जारी करने के आदेश दिए। इस आदेश का भी पालन न होने पर याचिकाकर्ताओं ने अदालत की अवमानना की याचिका दायर की।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील देते हुए बताया कि सरकार की ओर से बैंक में मुआवजे की रकम जमा नहीं की गई। इतना ही नहीं, अदालत के आदेश पर सरकार की ओर से अपील भी नहीं की गई। वहीं दूसरी ओर अदालत के आदेश पर अमल भी नहीं किया गया। सरकार का यह व्यवहार अदालत की अवमानना के समान है।

इस पर न्यायाधीश ने हस्तक्षेप कर सरकार के इस रवैये पर गुस्सा जताया। न्यायाधीश ने बताया कि सरकार की कार्रवाई संविधान के विरुद्ध है। क्योंकि अदालत के आदेश का पालन नहीं किया गया। न्यायाधीश ने सरकार के इस व्यवहार पर कड़ा असंतोष जतया और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नोटिस जारी उन्हें इस मामले की आगामी 28 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के आदेश दिए।

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