भारत के विरुद्ध आतंकी षड्यंत्र

(दुनिया की शत्रुशक्तियां आज तक भारत के हिंदू धर्म को पाखंड बताकर भारतीय पराभव के लिए जितने भी हिंदू विरोधी षड्यंत्र करती रही हैं, राम मंदिर के प्रति हिंदुओं के आस्था प्रवेग और महाकुंभ में 66 करोड़ देशी-विदेशी हिंदुओं के आगमन के बाद निश्चित रूप में उनमें कमी आयेगी। यह शुभसत्य शत्रुओं, विशेषकर पाकिस्तान को पीड़ित-दुखित कर रहा है। इसीलिए वह अपनी खुफिया एजेंसी आईएसआई के माध्यम से भारतीय मुसलमानों में से आतंकी मनोविज्ञान का समर्थन करनेवाले मुसलमान का चयन कर उसे राम मंदिर और अन्य हिंदू आस्था केंद्रों पर आतंकी हमला करने के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं।)

गत दिनों हरियाणा एसटीएफ और गुजरात एटीएस ने फरीदाबाद से एक संदिग्ध आतंकी को पकड़ा। आतंकी से पूछताछ करने पर पता चला कि वह राम मंदिर पर आतंकी हमला करने की साजिश का हिस्सा था। यह आतंकी उत्तर प्रदेश के मिल्कीपुर, जनपद फैजाबाद अयोध्या का रहनेवाला है। यह वहां पर मांस काटने-बेचने का काम करता है।

हमले के लिए इस्तेमाल होनेवाले हैंड ग्रेनेड को लेने फरीदाबाद आया हुआ था। इसका नाम अब्दुल रहमान है और इसकी आयु केवल 19 वर्ष है लेकिन फरीदाबाद में ये नाम बदलकर छुपा हुआ था। आतंकी योजना के अनुसार उसे यह विस्फोटक लेकर राम मंदिर में फेंकना था। पूछताछ में उसने बताया कि यह पूरी योजना पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने बनाई थी।

भारत में सुशासन से सुरक्षा तंत्र में आई सकारात्मकता

इसने पूरे राम मंदिर परिसर की रेकी भी की थी। फरीदाबाद में इसे हैंड ग्रेनेड की आपूर्ति भी आईएसआई के हैंडलर ने की थी। इसके पास से दो हैंड ग्रेनेड मिले, जिन्हें तुरंत निपिय कर दिया गया। भारत के केंद्रीय एवं राज्यों के गुप्तचर अभिकरणों की ऐसी सतर्कता प्रशंसनीय है। देश-विरोधी गतिविधियों और इनके षड्यंत्रकर्ताओं के प्रति अभिकरणों के मध्य जैसा पारस्परिक संपर्क व समन्वय स्थापित हुआ है, वह केंद्र के सुशासन के बूते ही संभव हुआ है।

अन्यथा, 2014 से पूर्व संप्रग के प्रथम एवं द्वितीय कार्यकाल में तो भारत देश आए दिन दो प्रकार की दुर्घटनाओं के लिए सर्वाधिक कुख्यात रहा था। एक, भारत के महानगरों, नगरों और जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाओं की पुनरावृत्ति के लिए। दो, सरकारी तंत्र में चरण-प्रति चरण होनेवाले घपलों, घोटालों व भ्रष्टाचार के लिए।

कांग्रेसी नेतृत्व वाले संप्रग शासन के अंत के बाद भाजपा के नेतृत्व वाला राजग शासन गत 11 वर्षों से निरंतर सुशासन की स्थापना में कार्यरत है। इस संदर्भ में यह अत्यंत विचारणीय है कि जब अभी भी केंद्र व राज्य के शासन-प्रशासन में कार्य करनेवाला कर्मचारी वर्ग तो वही है, जो संप्रग के समय में था तो फिर अब शासकीय-प्रशासकीय सकारात्मकता और अनुकूलता का वातावरण कैसे निर्मित हो गया। इस पर गंभीरतापूर्वक विचार किये जाने की आवश्यकता है।

ऐसे ही सेना, पुलिस, केंद्रीय व प्रांतीय जांच एजेंसियों तथा गुप्तचर अभिकरणों में भी वही कर्मचारी अब भी कार्यरत हैं जो आज से 11 वर्ष पहले थे, तो फिर अपने-अपने कार्य दायित्वों के प्रति इनमें नवदृष्टि, नवीन ऊर्जा, समर्पण भावना, राष्ट्रभक्ति का विचार तथा सर्वोपरि परिणामोन्मुखी कार्यपरायणता कैसे उभर आई। यह भी अत्यधिक विचारणीय है।

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भारत में सुशासन और सुरक्षा से आतंकी साजिशों पर नियंत्रण

दस-ग्यारह वर्ष पूर्व जिस देश में आतंकवादी अपनी योजनाओं को मनमाने ढंग से क्रियान्वित कर दिया करते थे, 11 वर्षों में ऐसा क्या बदल गया कि देश के प्रमुख महानगरों में एक भी ऐसी आतंकी घटना नहीं घटी है, जिसमें जीवन-संसाधन की हानि हुई हो। ऐसा नहीं है कि शत्रु देश पाकिस्तान द्वारा भारत के विरुद्ध आतंकवादी षड्यंत्र नहीं किये जा रहे हैं।

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई भारत के विरुद्ध दिन-रात गहरी साजिशें रच रही है, किंतु सुशासन द्वारा संचालित भारतीय गुप्तचर अभिकरणों की कार्यपरायणता एवं सािढयता से सभी साजिशों का पता लगाकर उनमें लिप्त आईएसआई के भारतीय हैंडलरों को दबोच दिया जा रहा है। गत दस वर्षों में भारत विरोधी ऐसे अनेक षड्यंत्रों को ध्वस्त कर उनमें संलिप्त देशी-विदेशी आतंकियों तक जांच एजेंसियों की पहुंच सुगम हुई है।

भारत के पड़ोस में जब तक पाकिस्तान नामक देश बना रहेगा, तब तक वहां से शत्रुतापूर्ण षड्यंत्र किये जाते रहेंगे और अब तो भारत के दूसरे कोने पर एक अन्य शत्रु बांग्लादेश के रूप में खड़ा हो गया है। ऐसे में भारतीय सेना, पुलिस, रक्षा-सुरक्षा एजेंसियों, गुप्तचर अभिकरणों और इन सभी के प्रमुख नियंत्रकों के रूप में विद्यमान भारतीय गृह, रक्षा व विदेश मंत्रालयों का कार्यदायित्व पहले से अधिक बढ़ गया है।

भारत में हिंदू धर्म की अत्यधिक धार्मिक गतिविधियों को देखकर कोई भी सहज अनुमान लगा सकता है कि यह देश धर्मगत प्रतीक के रूप में एक हिंदू देश ही दिखाई देता है। ऐसा अनुमान गर्व का विषय होना चाहिए।

हिंदू आस्था और आर्थिक समृद्धि पर शत्रुओं का षड्यंत्र

देशी-विदेशी हिंदुओं के लिए यह गर्व का विषय है भी, किंतु मजहब के बहाने भारत व भारत के हिंदुओं, हिंदू धर्म की गतिविधियों व आस्था के केंद्र मंदिरों के विरुद्ध शत्रुतापूर्ण संकुचित नजरिया रखनेवाला पाकिस्तान तथा पाकिस्तान की अनुचित हरकतों की गुप्त संरक्षक क्रिश्चियन शक्तियां देशी-विदेशी हर स्तर पर भारत का पराभव करने को तत्पर रहती आई हैं।

इसी का दुष्परिणाम है कि भारत के विरुद्ध अब भी आतंकी षड्यंत्र हो रहे हैं। भारत ने जहां राम मंदिर की स्थापना के एक वर्ष बाद मंदिर, धर्म, आस्था व भक्ति के आधार पर सृजित नव-अर्थव्यवस्था से विशाल जीएसटी राजस्व अर्जित किया है, वहीं 45 दिवसों तक चले महाकुंभ के आयोजन से भी अत्यधिक राजस्व एकत्र किया है।

उत्तर प्रदेश के नोएडा व गाजियाबाद में स्थित उद्योगों व व्यावसायिक उपामों से एक वर्ष में उतनी जीएसटी अर्जित नहीं हुई, जितनी राम मंदिर के प्रति हिंदुओं की आस्था के बाद अकेले अयोध्या में संपन्न व्यावसायिक गतिविधियें से हुई है। यह अप्रतिम है। धर्म एवं आस्था के बलबूते अर्थव्यवस्था की वृद्धि का अभूतपूर्व प्रतिमान है।

ऐसा किसी अन्य मजहब, मत या आस्था के द्वारा हो ही नहीं सकता है। भारत के इस उद्भव से इस्लामी और इसाई शक्तियां विचलित, भयभीत हैं। इसीलिए वे इसके विरोध में हर संभव षड्यंत्र कर रही हैं। राम मंदिर पर हैंड ग्रेनेड फेंककर हमला करने की साजिश भी इसी का परिणाम है।

शत्रुओं के षड्यंत्र और भारत की सुरक्षा रणनीति

दुनिया की शत्रुशक्तियां आज तक भारत के हिंदू धर्म को पाखंड बताकर भारतीय पराभव के लिए जितने भी हिंदू विरोधी षड्यंत्र करती रही हैं, राम मंदिर के प्रति हिंदुओं के आस्था प्रवेग और महाकुंभ में 66 करोड़ देशी-विदेशी हिंदुओं के आगमन के बाद निश्चित रूप में उनमें कमी आयेगी। यह शुभसत्य शत्रुओं, विशेषकर पाकिस्तान को पीड़ित-दुखित कर रहा है।

इसीलिए वह अपनी खुफिया एजेंसी आईएसआई के माध्यम से भारतीय मुसलमानों में से आतंकी मनोविज्ञान का समर्थन करनेवाले मुसलमान का चयन कर उसे राम मंदिर और अन्य हिंदू आस्था केंद्रों पर आतंकी हमला करने के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं।

राम मंदिर पर हमला करने के षड्यंत्र में पकड़े गये आतंकी के खुलासे से यह शंका भी अनुचित प्रतीत नहीं होती कि महाकुंभ में हुई भगदड़ और पुंभ स्नान हेतु जाने के लिए दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एकत्र लोगों की भीड़ में हुई भगदड़ भी आतंकी षड्यंत्रों का ही हिस्सा हैं। इस परिप्रेक्ष्य में भारतीय शासन को जैसे को तैसा की नीति पर चलना चाहिए।

पाकिस्तान के विरुद्ध और विशेषकर पाकिस्तान स्थित उस क्रूर वर्ग के विरुद्ध भारत भी कठोरतापूर्वक आचरण करे, जो अपने देश की चहुंदिश बर्बादी पर दुख, शोक न करके भारत की संतुलित प्रगति से चिढ़-कुढ़ रहा है। भारत का यही प्रयास हो कि वह शत्रुओं के विरुद्ध कठोर से भी अति कठोर होकर हर संभव चहुंदिश प्रतिघात करे।-(विकेश कुमार बडोला)

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