परिसंपत्तियों और देनदारियों के बंटवारे के लिए टास्कफोर्स
हैदराबाद, नागरिक प्रशासन एवं शहरी विकास विभाग के विशेष मुख्य सचिव तथा हैदराबाद के तीनों निगमों के विशेष अधिकारी जयेश रंजन ने कहा कि कोर अर्बन रीजन ढाँचे के तहत गठित तीनों नए नगर निगमों को नागरिकों को उत्तरदायी और प्रभावी प्रशासन प्रदान करने के लिए कड़े प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि जीएचएमसी की देनदारियों एवं परिसंपत्तियों के बंटवारे के लिए विशेष टास्कफोर्स का गठन किया जाएगा।

विशेष मुख्य सचिव जयेश रंजन ने विशेष अधिकारी के रूप में ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम मुख्यालय में आयोजित पहली स्थायी समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में स्थायी समिति ने क्यूर पुनर्गठन से संबंधित तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी। मंज़ूर प्रस्तावों के अनुसार, साइबराबाद, मल्काजगिरी और ग्रेटर हैदराबाद नगर निगमों के गठन के बाद शमशाबाद, राजेंद्र नगर, चारमीनार, गोलकोंडा, खैरताबाद और सिकंदराबाद जोन जीएचएमसी में बने रहेंगे। साइबराबाद और मल्काजगिरी नगर निगमों को कर्मचारियों का आवंटन किया जाएगा। दोनों निगमों को पाँच-पाँच सौ करोड़ का बजटीय आवंटन किया जाएगा।
निगम पुनर्गठन से प्रशासन को नागरिकों के करीब लाने पर ध्यान
जयेश रंजन ने कहा कि अधिकारियों को जन अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य करना चाहिए। आयुक्तों, अतिरिक्त आयुक्तों, जोनल आयुक्तों और वरिष्ठ अधिकारियों को विकास कार्यों में तेजी लाने तथा नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि निगम का पुनर्गठन प्रशासन को लोगों के करीब लाने का महत्वपूर्ण अवसर है। छह माह के भीतर सर्किल और वार्ड स्तर पर स्पष्ट सुधार दिखाई देना चाहिए। आगामी छह माह को महत्वपूर्ण कार्यकाल बताते हुए उन्होंने अधिकारियों को एसआरडीपी, एसएनडीपी और एचसिटी परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने, शहर की सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने तथा समुचित स्ट्रीट लाइटिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जयेश रंजन ने कहा कि जीएचएमसी के विभाजन को ध्यान में रखते हुए सेंटर फॉर गुड गवर्नेंन्स के अधीन एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो तीनों नगर निगमों के बीच परिसंपत्तियों, देनदारियों और मानव संसाधन का तर्कसंगत बंटवारा सुनिश्चित करेगी। टास्क फोर्स आवंटनों और समझौतों का विस्तृत अध्ययन कर 10 दिनों के भीतर सिफारिशें प्रस्तुत करेगी। उन्होंने कहा कि आईटी-सक्षम सेवाओं जैसे कुछ सुधारों के परिणाम आने में समय लग सकता है, लेकिन नगर प्रशासन में प्रभावी कार्यप्रणाली से तुरंत और स्पष्ट परिणाम दिखाई दे सकते हैं। छह माह का समय शहरी प्रशासन में सार्थक बदलाव लाने के लिए पर्याप्त है।
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स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट और डंपिंग यार्ड सुधार पर चर्चा
जीएचएमसी आयुक्त आर.वी. कर्णन ने स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, डंपिंग यार्ड के वैकल्पिक प्रस्ताव, जलभराव निवारण, अवसंरचना विकास, स्टाफ आवंटन, एसआरडीपी, एसएनडीपी और एच सिटी कार्यों की प्रगति, मानसून तैयारी, स्ट्रीट लाइट रखरखाव, जन शिकायत निवारण और सड़क सुरक्षा पहलों पर विस्तृत पावर प्वाइंट प्रस्तुति दी।
बैठक में तय किया गया कि स्वच्छता मानकों को और बेहतर बनाने के लिए तीनों नगर निगमों के बीच प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँगी। कूड़ा-संवेदनशील बिंदुओं से मुक्त वार्ड और सर्किल विकसित करने वाले अधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र और वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाएँगे। स्वच्छता प्रयासों में सक्रिय योगदान देने वाले पार्षदों, गैर-सरकारी संगठनों को भी सम्मानित किया जाएगा।
बैठक में जीएचएमसी अतिरिक्त आयुक्त के.ए. मंगतायारू, के. सत्यनारायण, जोनल आयुक्त अनुराग जयंती, प्रियंका अला, एन. रवि किरण, एस. श्रीनिवास रेड्डी, जी. मुकुंदा रेड्डी, जल बोर्ड के संयुक्त प्रबंध निदेशक मयंक मित्तल, कार्यकारी निदेशक एन. सम्राट अशोक, एएसपी (विजिलेंस) नरसिम्हा रेड्डी, मुख्य अभियंता रत्नाकर, सीसीपी के. श्रीनिवास, वित्तीय सलाहकार शरथ चंद्र तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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