कलियुग के चमत्कारी देव बाबा गंगाराम

राजस्थान के शेखावाटी राज्य के झुंझुनूं नगर में स्थित है- श्रीपंचदेव मंदिर। यह विष्णु अवतारी बाबा गंगाराम का अवतरण स्थल माना जाता है। इस मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था निरंतर बढ़ती जा रही है। यह भव्य देवालय अपनी आकर्षक बनावट, उत्कृष्ट वास्तुशिल्प और अलौकिक वैभव से दर्शनार्थियों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

मंदिर के मुख्य गर्भगृह में विष्णु अवतारी बाबा गंगाराम का श्रीविग्रह स्थापित है। बाबा की प्रतिमा अत्यंत आकर्षक एंव दिव्य तेजोमय है। इसके बायीं ओर दो अलग-अलग गर्भगृह में भगवती दुर्गा एवं वीर हनुमान की विशाल प्रतिमाएँ स्थापित हैं। दाहिनी ओर महालक्ष्मी एवं शिव परिवार की मूर्तियां स्थापित हैं। इन पांच गर्भग्रहों के कारण इस मंदिर को पंचदेव मंदिर कहा जाता है।

कलियुग में विष्णु अवतार के रूप में पूजे गए बाबा गंगाराम

बाबा के परम आराधक भक्त शिरोमणि देवकीनंदन ने सन् 1975 में गंगादशहरा के दिन इस धाम की स्थापना की थी। जन आस्था है कि कलियुग में श्रीहरि विष्णु ने बाबा गंगाराम के रूप में झुंझुनूं में अग्रवंशीय वैश्य कुल में श्री झूथारामजी एवं माता लक्ष्मीदेवी के यहां श्रावण शुक्ल दशमी सन् 1895 को अवतार लिया। इनका प्रादुर्भाव होते ही एक दिव्य प्रकाश चारों ओर फैल गया था। वातावरण में अलौकिक तेज छा गया था।

इसे परिजन परमपिता परमेश्वर की लीला समझकर हर्ष से पुलकित हो गये। युवा होते-होते बाबा के उद्गारों और चमत्कारों की चर्चा आम हो चली थी। बाबा के कुछ ही क्षणों के सान्निध्य से लोगों के कष्ट दूर होने लगे। बाबा गंगाराम झुंझुनूं में धार्मिक वातावरण और भगवद्भक्ति का प्रसारण करते हुए उत्तरप्रदेश के कौशल प्रदेश में पधारे। बाराबंकी जनपद के सफदरगंज में स्थित कल्याणी नदी के तट को अपनी कर्मभूमि बनाया।

उसी समय एक बार बाबा कल्याणी के पावन जल में स्नान व तर्पण कर रहे थे। वहां उपस्थित भगवद्भक्तों ने जल में बाबा की परछाई देखी, जो दिव्य रूप धारण करके मुस्कुराते हुए सबको आशीर्वाद दे रही थी। यह बात धीरे-धीरे फैल गई। बाबा गंगाराम मात्र बयालीस वर्ष की आयु में स्वधाम प्रयाण कर गये। आज देश के हर छोटे-बड़े नगर में बाबा के मंदिर, ट्रस्ट एवं सेवा समितियां स्थापित हैं।

जहाँ भक्त की भक्ति बनी अलौकिक चमत्कार

श्रीपंचदेव मंदिर की स्थापना का पुनीत कारण यही है कि बाबा की कृपा से विश्व शांति एवं जनकल्याण का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। मुख्य मंदिर की दाहिनी ओर बाबा के परम आराधक भक्त शिरोमणि देवकीनंदन एवं शक्ति स्वरूपा गायत्री देवी की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं। श्रीपंचदेव मंदिर की स्थापना के पश्चात ये बाबा की भक्ति में इस प्रकार लीन हो गये थे कि उन्होंने सांसारिक अग्नि परीक्षाओं से गुजरते हुए अपनी सारी संपदा त्याग सबके लिए एक उदाहरण बन गए।

भक्त शिरोमणि देवकीनंदन के महाप्रयाण के समय उनके पार्थिव शरीर से अनेक अलौकिक चमत्कार हुए। जब चिता के सम्मुख उनकी धर्मपत्नि शक्तिस्वरूपा गायत्री देवी ने अपने दोनों हाथ उठाकर बाबा से संसार को कोई चमत्कार दिखाने के लिये करूण पुकार की, तो भक्त शिरोमणि देवकीनंदन का दाहिना हाथ जलती हुई चिता से ऊपर उठकर आशीर्वाद देता हुआ हिलने लगा, मस्तक से जल की धार निकलने लगी और चेहरा बाल रूप में परिवर्तित हो गया।

ये किसी पौराणिक कथा के अंश नहीं हैं वरन् उस समय खींचे गये छायाचित्र आज भी सर्वत्र उपलब्ध हैं। बाबा के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना निष्फल नहीं होती है। त्याग, तपस्या एवं सत्य के अभूतपूर्व वातावरण के कारण यह क्षेत्र आज मात्र पूजा-स्थल न होकर आध्यात्म और शांति का अग्रदूत बन गया है।

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