चैत्र मास है नए संकल्प का आगाज़
तिथि मुहूर्त
इस वर्ष चैत्र मास 4 मार्च, इसमासे शुरु चुका है, जो चैत्र 14 अप्रैल, मंगलवार को समाप्त होगा।
चैत्र मास, विक्रम पंचांग का पहला महीना होता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस महीने की पूर्णिमा को चंद्रमा चित्रा नक्षत्र में होता है, जिससे इसका नाम चैत्र पड़ा। पौराणिक संदर्भ में मान्यता है कि इस माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से ब्रह्मा ने ब्रह्मांड की सचना शुरु की थी। अधर्म के नाश तथा धर्म की रक्षा के लिए प्रथम अवतार मत्स्य का इसी माह लिया था।
महाराजा विक्रमा द्वितीय ने इसी माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से विक्रम संवत शुरु किया था। अतः इस माह के शुक्ल पक्ष से हिंदू नववर्ष की शुरूआत मानी जाती है। यह माह धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जाता है।
चैत्र माह में मौसम बदलता है। इस समय वसंत ऋतु खत्म होती है और गर्मी शुरू होने लगती है। आयुर्वेद के अनुसार, यह समय शरीर को स्वस्थ और मजबूत बनाने के लिए अच्छा होता है। इस दौरान हल्का, सात्विक और पौष्टिक भोजन करना चाहिए। इससे शरीर स्वस्थ रहता है और बीमारियों से बचाव होता है।
नए संकल्प का समय
चैत्र माह को नई शुरुआत और नए संकल्प लेने का सबसे अच्छा समय माना जाता है। इस माह लोग पूजा-पाठ, ध्यान और आध्यात्मिक साधना करते हैं। इसी माह में चैत्र नवरात्रि आती है, जिसमें मां दुर्गा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा करने पर मां दुर्गा भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। चैत्र माह धार्मिक, आध्यात्मिक और स्वास्थ्य के नजरिए से बहुत खास होता है। यह महीना नई शुरुआत, सकारात्मक सोच और भगवान की कृपा पाने का श्रेष्ठ समय माना जाता है।
दिनचर्या
चैत्र मास में बढ़ती गर्मी के कारण भोजन जल्दी दूषित हो जाता है, इसलिए इस माह में बासी भोजन करने से परहेज करें ताकि बीमार न पड़ें। इस माह गुड़ का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना गया है। मांस, मदिरा या किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए। मौसमी फलों का सेवन करना चाहिए।
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