चेंचू आदिवासियों का घर का सपना साकार होगा : पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी
हैदराबाद, राजस्व, आवास, सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने घोषणा की कि इंदिरम्मा सरकार आदिम जनजाति चेंचू लोगों के लिए घर का सपना साकार करने जा रही है। चेंचू आदिम जनजातियों में सबसे कमजोर समूह है, जिन्होंने कई पीढ़ियों से अपना घर नहीं देखा है। उन्होंने कहा कि राज्य के उटनूर, भद्राचलम, मुन्नानूर और एटूरू नागारम की चार एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसियों (आईटीडीए) की सीमाओं के भीतर लगभग दस हजार चेंचू परिवारों की पहचान की गई है और उन्हें इंदिरम्मा आवास दिए जा रहे हैं।
उन्होंने आज सचिवालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर इंदिरम्मा आवास योजना की समीक्षा की। अवसर पर मंत्री ने याद दिलाया कि राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कई अवसरों पर सुझाव दिया है कि आदिवासी क्षेत्रों में स्थायी घरों का निर्माण किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भी कई अवसरों पर आदिवासी क्षेत्रों में विकास, विशेष रूप से उनके घरों के निर्माण के लिए कई सुझाव दिए हैं।
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इंदिरम्मा सरकार आदिम जनजाति घरों की व्यापक मंजूरी योजना
इसके मद्देजनर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के सुझाव और सलाह के अनुसार आदिवासी क्षेत्रों में चेंचू लोगों के लिए इंदिरम्मा मकान मंजूर कर रहे हैं। उन्होंने घोषणा की कि आसिफाबाद में 3,551, बोध में 695, खानापुर में 1,802, सिरपुर में 311, आदिलाबाद में 1,430, बेल्लमपल्ली में 326, भद्राचलम आईटीडीए सीमा में अश्वारावपेट में 105, मुन्नानूर चेंचू विशेष परियोजना की परिधि वाले अच्चमपेट में 518, महबूबनगर में 153, परिगी में 138, तांडूर में 184 कुल 9,395 इंदिरम्मा घर मंजूर कर रहे हैं।
मंत्री ने आगे कहा कि इस वर्ष राज्य के प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 3,500 इंदिरम्मा मकान मंजूर किये गये हैं। आईटीडीए क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जनजातीय निर्वाचन क्षेत्रों को अतिरिक्त 500 से 700 आवास उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्यभर में इंदिरम्मा आवास लाभार्थियों की चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में 3,500 घरों में से 20 प्रतिशत को बफर में रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों, विशेषकर जीएचएमसी सीमा के भीतर इंदिरम्मा घरों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि शहर के प्रमुख क्षेत्रों में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीब लोग वहीं रहना पसंद कर रहे हैं और हैदराबाद से दूर मकान बनाने में उनकी कोई रुचि नहीं है। उन्होंने बताया कि जब पिछली सरकार ने कोल्लूर में डबल बेडरूम वाले मकान बनवाए और उन्हें हैदराबाद के गरीबों में आवंटित किया तो कोई भी उन्हें लेने के लिए आगे नहीं आया। उन्होंने कहा कि इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए जहाँ गरीब लोग झोपड़ियों में रह रहे हैं, वहीं पर जी प्लस थ्री मॉडल के अपार्टमेंट बनाने का विचार कर रहे हैं।
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