चल उठ, चुनाव लड़

चल उठ चुनाव लड़, बहुत मौज मार ली। नारे लगा, पोस्टर चिपका। जा जनता के पास जा, उसे रेवड़ी, गाज़र और सुनहरे सपने दिखा। सब कुछ फ्री मिलेगा बस वोट मुझे देना,जनता को समझा, चुनाव के लिए कमर कस। दूसरे की धोती खोल और खुद का बरमुडा पहन। चुनाव की वैतरणी को पार करने की तरकीब सोच। कहीं ऐसा न हो कि तू टापता ही रह जाये और विरोधी सत्ता का चाँद अपने आँगन में उगा ले। सत्ता है तो सब कुछ है, सत्ता नहीं तो जेल के दरवाजे और सूखी रोटी है।

क्या कर रहा है तू? उठ तरकस में तीर भर और कुरुक्षेत्र में उतर जा,अर्जुन की तरह मोह -आविष्ट होने का नहीं, कृष्ण की गीता बाद में सुन लेना पहले राज्य पर कब्ज़ा कर विरोधी को देश निकाला दे। सत्ता का सुख भोग , वीर भोग्या वसुंधरा। विरोधी के कपडे फाड़। ये पुलिस प्रशासन कब काम आयेंगे। ये पेपर लीक करने वाले कब काम आयेंगे,ये साहित्य कला संस्कृति के चमचे कब काम आयेंगे? हाई कमांड की तरफ मत ताक ,चुनावी सूचियों की और मत झांक, इनमें क्या रखा है? मैं सब संभाल लूँगा।

चुनावी समंदर में सभी को नहाना है। प्रेम,युद्ध व चुनाव में सब जायज़ है ,बस तू तो कूद पड़। चढ़ जा बेटा झाड़ पर राम सब भली करेगा। आत्मालाप बंद कर। अपशब्दों का भंडार भर। बस चुनाव लड़ और जीत। मीडिया को गोद में बैठा या उनकी गोद में जाकर बैठ,देर मत कर। विदेशी धन को अपना मान। वोटिंग मशीन में मेनेजेरिअल स्किल लगा ,जा सफल होकर आना, विजयी भव। हेलिकोप्टर,जे सी बी, ट्रैक्टर खरीद हाई टेक प्रचार कर। पानी, बिजली, सड़क, रेल की राजनीति कर और बस जीत। साहित्य-संस्कृति-कला वालों को टुकड़ा डाल।

चुनाव में इवीएम और प्रक्रिया पर पूरा ध्यान दें

चिड़िया की आँख की तरह केवल कुर्सी का ध्यान धर। मछली की आँख देख। बस एक बार सत्ता आई तो फिर क्या है चारों तरफ बस तू ही तू .पोबारा पच्चीस। इवीएम का ध्यान धर, समाधि नहीं ,चुनाव का बिगुल बजा। फालतू के अर्थशास्त्र में दिमाग मत लगा,चुनाव का अर्थशास्त्र पढ़। ये मत सोच वोटर तो सब कुठ फ्री देने में क्या खर्चा आएगा?इस खर्चें को कौन भुगतेगा और भुगतने वाले को सरकार बनने के बाद कैसे कौन-से बैंक से लोन दिला कर तड़ी पार करवाना है, ये सोच।

या उसे या उसके चमचे को राज्य सभा में लेना है, इस पर विचार कर, व्यावहारिक अर्थ शास्त्र पढ़, किताबी ज्ञान छोड़। ये पार्टी टिकट न दे तो उस पार्टी को पकड़। वो भी न दे तो निर्दलीय लड़, बस जीत। तुझे तो केवल चुनाव जीतना है, फिर तो अमचे-चमचे सब तेरे खेमे में होंगे। बस आनंद ही आनंद। साहब ,सरकार ,महामहिम गरीब के परवरदिगार बस केवल ये ही शब्द सुनाई देंगे। चरण स्पर्श, प्रणाम ही सुनेगा। चल जिद्द छोड़ और चुनाव लड़।

यह भी पढ़ें… अपने ही देश में घिर गए हैं ट्रंप

गैस बाँट, मोबाइल बाँट ,नकदी बाँट साडी में नोट बाँट, मंगल सूत्र बाँट, दारू बाँट, बस बाँट और जीत। अगर हार गया तो लाल, काली, पिली डायरी खुल जायेगी। तेरा लड़ना और जीतना दोनों जरूरी है। बेशर्म बन अपराधियों को जेल से रिहा कर। ये ही तुझे जिताएंगे। ये ही वोट मशीन पर जबरन उंगली रखवायेंगे ,चल जल्दी कर। उठ चुनाव का फार्म भर। जमानत राशि वापस मिल जायेगी। घबरा मत मैं हूँ न। सब ठीक कर दूंगा। सबको जिता के लाऊंगा। सरकार बनाऊंगा .फिकर नॉट। सरकार मैं ही बनाउंगा।

यशवंत कोठारी

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button