मानसून का बिगड़ता पैटर्न बढ़ती लाल, पीली, नारंगी चेतावनियां
अगर आप मौसम संबंधी खबरें सुनते हैं या मानसून के आगमन, उसके उतार-चढ़ाव पर नजर रखते हैं, तो आजकल आपको रह-रहकर मौसम विभाग की तरफ से अक्सर किए जाने वाले लाल, पीले और नारंगी एलर्ट सुनने को मिलते होंगे। आज से 15-20 साल पहले इस तरह की मानसून संबंधी चेतावनियां सुनने को नहीं मिलती थीं, लेकिन अब समय की तरह मानसून को कहीं भी जाना जा सकता है। टीवी, रेडियो, मोबाइल और अन्य डिजिटल डिवाइसेस में मानसून संबंधी जानकारियां अक्सर लैश होती रहती हैं।

बड़े शहरों के चौराहों, बड़े पेट्रोल पंप और मशहूर सार्वजनिक जगहों पर भी अक्सर पीन में उस समय का तापमान और बीच-बीच में मौसम संबंधी चेतावनियां लैश होती रहती हैं। क्या आप इनका असली मतलब जानते हैं? दरअसल भारतीय मौसम विभाग पिछले एक दशक से मौसम की भविष्यवाणी खास करके मानसून की भविष्यवाणी करने में काफी हद तक सफल हो गया है। सच बात तो यह है कि जहां अमेरिका और यूरोप कम से कम 20 किलोमीटर के दायरे के मौसम की भविष्यवाणी कर पाते हैं, वहीं भारतीय मौसम विभाग हाल की एक खबर के मुताबिक सिर्फ 6 किलोमीटर के दायरे की भी मौसम संबंधी भविष्यवाणी करने में सक्षम है।
इसी वजह से आजकल मौसम विभाग एक ही समय में भारत के कम से कम 100 से ज्यादा क्षेत्रों की मानसून संबंधी बारिश के पैटर्न की भविष्यवाणी करता है। यही कारण है कि जब पंजाब गर्मी से तप रहा होता है, बिहार तड़ित बिजली और सूखी आंधी के खौफ से जूझ रहा हो तो उसी समय असम की बराक घाटी मौसम संबंधी खतरनाक चेतावनी के दायरे में होती है और भोपाल, पंचमढी, इंदौर आदि में सुकून देने वाली रिमझिम फुहारें पड़ रही होती हैं। ..तो गोवा, केरल में मूसलाधार और रत्नागिरी से लेकर खाड़ी तक महाराष्ट्र में पीला एलर्ट रहा होता है।
मौसम विभाग की कलर कोडेड चेतावनियाँ: जानें हरे, पीले और नारंगी अलर्ट का मतलब
मतलब यह कि भारतीय मौसम विभाग देश के लगभग हर इलाके के मौसम की भविष्यवाणी करीब-करीब रियल टाइम पर करने में सक्षम है, यही कारण है कि आजकल हम रेडियो, टेलीविजन या तमाम दूसरे प्रसारणों में मानसून को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में लाल, पीली, नारंगी चेतावनियों से अक्सर दो-चार हो रहे हैं। जब किसी इलाके में भारी बारिश, बाढ़, तेज हवा, तूफान या अन्य गंभीर मौसम के खतरे की संभावना होती है, तो मौसम विभाग आम लोगों व प्रसारण को सतर्क करने के लिए कलर कोडिड एलर्ट जारी करता है।

ये एलर्ट मौसम की गंभीरता और उसके संभावित असर को दर्शाते हैं। अगर हम शहरों और सुरक्षित संस्थानों में काम कर रहे होते हैं, तो कई बार हम सोचते हैं कि इतनी एलर्ट की चेतावनियों का क्या मतलब है? मछुआरे हों, खेतों में काम कर रहे किसान हों, सड़कों पर चल रहे डिलीवरी ब्वॉय हों, लंबी दूरी के ट्रक चालक या ऐसे ही अनेक दूसरे पेशों से संबंधित होते हैं, तब हमें मौसम विभाग की इन कलर कोडिड चेतावनियों का लाभ पता चलता है। इससे देश के खुले में रहने वाले किसानों और मछुआरों को बहुत फायदा हुआ है। देश के कई हिस्सों में इन सूचनाओं की निरंतरता से वहां के फसल पों में सुधार हुआ है और गहरे समुद्र या नदियों में मछली पकड़ने आदि के लिए उतरने वाले मछवारों को समय रहते इन चेतावनियों के मिलने से उनकी जान के जोखिम कम हुए हैं।
मौसम विभाग चार तरह के एलर्ट जारी करता है, जो चार अलग-अलग रंगों में होते हैं। मानसून से संबंधित पहला एलर्ट का रंग हरा होता है। इसका मतलब होता है कि स्थिति सामान्य है और किसी तरह की विशेष सावधानी की जरूरत नहीं है। दूसरे एलर्ट का रंग पीला होता है। इसका मतलब होता है कि घर से बाहर रहने वालों को हल्की-फुल्की परेशानी हो सकती है। शहरों में निचली सड़कों में पानी भर सकता है आदि, इसलिए सावधान रहें और मौसम या बारिश संबंधी एलर्ट अपडेट लेते रहें। तीसरे एलर्ट का रंग नारंगी होता है। इसका मतलब है कि मौसम बेकाबू भी हो सकता है।
लाल अलर्ट का मतलब और भारत में कलर कोडेड मौसम चेतावनियों की शुरुआत की कहानी

सड़कें जाम हो सकती हैं, जल भराव की स्थिति हो सकती है, बाढ़ भी आ सकती है और बिजली गिरने की भी आशंका रहती है। अत घर से बाहर रहें तो सतर्क रहें, जरूरी सावधानी अपनाएं। इस एलर्ट का प्रशासन के लिए संदेश होता है कि वह तैयार मोड में रहे। मौसम विभाग की चौथी एलर्ट का रंग लाल होता है। इस चेतावनी का मतलब होता है कि स्थिति बहुत गंभीर है। जान-माल का खतरा हो सकता है। भारी से बहुत भारी बाढ़, बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है। अत तत्काल कार्यवाई करें और लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाएं यानी एलर्ट मोड पर रहें।
भारत में इन रंगीन चेतावनियों का सिलसिला 2000 के दशक के मध्य से शुरु होता है। साल 2007-08 के आस-पास इसे औपचारिक तरीके से शुरु किया गया था। खासकर जब लोगों के पास इंटरनेट युक्त मोबाइल और कई दूसरे डिजिटल डिवाइसेस होने लगे और समाज में डिजिटल मीडिया से सीधे पब्लिक जुड़ने लगी और इस तरह के एलर्ट को जानने की सुविधा बढ़ गई। पहले सिर्फ खबरें ही मौसम संबंधी सूचनाएं पाने का जरिया होती थीं, लेकिन डिजिटल डिवाइसिस का युग आया तो तमाम साधन मौसम संबंधी पल-पल सूचना पाने के लिए उपलब्ध हो गए। इसलिए इन चेतावनियों का फायदा भी हुआ और उनका असर भी।
मौसम की चेतावनी क्यों है जरूरी: आम लोगों और प्रशासन के लिए सुरक्षा का पूर्व संकेत
सवाल है कि इससे मौसम के मिजाज के बारे में आम आदमी को क्या-क्या पता चलता है?
आम आदमी मौसम के सामान्य हावभाव देखकर उसके मिजाज को समझ नहीं पाता। वह नहीं जान पाता कि उमड़-घुमड़ रहे बादल सिर्फ भौकाल बना रहे हैं या वाकई टूटकर बरसने जा रहे हैं। मौसम विभाग अपने उच्च स्तरीय वैज्ञानिक उपकरणों के जरिये मौसम के मिजाज को भली तरह से जान रहे होते हैं और आने वाले समय में वह कैसा व्यवहार करेगा, इसकी जानकारी उन्हें होती है।
इसलिए मौसम विभाग द्वारा जारी मौसम मिजाज संबंधी चेतावनियां आम लोगों के बहुत काम की होती हैं। इन पूर्व चेतावनियों के चलते नागरिक प्रशासन सुचारू रूप से अपना काम करते हैं। कहीं विकट समस्या होने जा रही हो, तो पहले से ही राहत दल तैयार कर लिए जाते हैं। ज्यादा स्थिति बिगड़ने की आशंका होती है, तो पहले से ही स्कूल बंद कर दिए जाते हैं। ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया जाता है, लोगों को समय रहते यह चेतावनी दे दी जाती है कि वह किसी तरह की परेशानी में फंसने के पहले ही सुरक्षित तरीके से अपने घर पहुंच जाएं।
मौसम संबंधी इन भविष्यवाणियों के चलते आम लोग अपनी यात्राओं के कार्पाम बदल लेते हैं। किसी बड़े काम को करने के पहले तैयारी कर लेते हैं। इस तरह की सूचनाओं से बहुत फायदा होता है। ये एलर्ट एक तरह का पूर्वानुमान आधारित सुरक्षा संकेत हैं, इससे आम लोगों और प्रशासन दोनों को अचानक मौसम के बिगड़ने से होने वाली परेशानियों से बचने का मौका मिलता है।
लोकमित्र गौतम
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