हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कालेश्वरम आयोग रिपोर्ट को बताया गया एकपक्षीय

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय में कालेश्वरम परियोजना को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पूर्व-मंत्री टी. हरीश राव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एम. सुंदरम ने दलील पेश की।

आर.एम. सुंदरम ने कहा कि कालेश्वरम परियोजना पर जाँच कर रहे सेवानिवृत्त न्यायाधीश चन्द्रघोष की रिपोर्ट स्वीकार्य योग्य नहीं है। इतना ही नहीं, परियोजना की जाँच के लिए आयोग का गठन भी गैर-कानूनी है। विपक्षी नेताओं को फँसाने के लिए पूर्व-उद्देश्य से साजिश के तहत राज्य सरकार ने आयोग का गठन किया। सबूत और गवाहों के बिना आरोप लगाते हुए मीडिया को पावर पाइंट प्रेजेंटेशन देना पक्षपात दर्शाता है।

पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्रि नायुडू ने दलील रखी। दो घंटों की सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहिउद्दीन की खंडपीठ ने सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित कर दी। इस दौरान पूर्व-मंख्यमंत्री केसीआर, हरीश राव, पूर्व मुख्य सचिव शैलेन्द्र कुमार जोशी, तत्कालीन मुख्यमंत्री के विशेष सचिव स्मिता सभरवाल के खिलाफ किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही न करने के लिए इससे पूर्व जारी अंतरिम आदेश को विस्तारित किया।

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गौरतलब है कि कालेश्वरम परियोजना को लेकर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही न करने का आदेश देने के आग्रह के साथ केसीआर, हरीश राव, एस. के. जोशी और स्मिता सभरवाल ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिस पर आज पुनः एक बार सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान स्मिता सभरवाल और एस. के. जोशी की ओर से अधिवक्ता जे. रामचन्द्र राव, तरुण जी. रेड्डी पेश हुए। वहीं सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी, पी. श्रीराम और महाधिवक्ता ए. सुदर्शन रेड्डी हाजिर हुए।

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