जलबोर्ड मुख्यालय में ई-ऑफिस सिस्टम उद्घाटित
हैदराबाद, हैदराबाद महानगरीय पेयजलापूर्ति एवं मलजल निकास बोर्ड (जलबोर्ड) के प्रबंध निदेशक अशोक रेड्डी ने कहा कि जलबोर्ड के सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस सिस्टम पूरी तरह से लागू किया जा रहा है।
यहाँ खैरताबाद स्थित जलबोर्ड मुख्यालय में एमडी अशोक रेड्डी ने जेएमडी मयंक मित्तल के साथ मिलकर ई-ऑफिस सिस्टम प्रारंभ किया। इस मौके पर एमडी ने कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के आदेश के अनुसार सभी विभागों में ई-ऑफिस लागू किया जा रहा है। इससे ऑफिस में काम करने की क्षमता, ट्रांसपेरेंसी, अकाउंटेबिलिटी और सर्विस स्टैंडर्ड बेहतर होंगे। ई-ऑफिस सिस्टम से फाइलों का जल्दी सॉल्यूशन होगा और प्रशासन में जवाबदेही भी बढ़ेगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अब से हर फाइल मैनुअली नहीं ली जाएगी और उसे ई-ऑफिस के जरिए भेजा जाना चाहिए।
एमडी ने कहा कि ई-ऑफिस को न सिर्फ स्कैन करके स्टोर किया जाएगा, बल्कि अलग-अलग डिपार्टमेंट से जुड़ी पूरी जानकारी भी इस ऑफिस में शामिल की जाएगी और कोई भी संबंधित अधिकारी ई-ऑफिस में अपनी डिपार्टमेंट की फाइलें चेक कर सकेगा, जिससे प्रशासन का काम आसान हो जाएगा। एमडी ने बताया कि शुरुआत में जलबोर्ड के मुख्यालय में सभी काम ई-ऑफिस से किए जाएंगे। यह सिस्टम सभी डिवीजनों में अलग-अलग फेज़ में लागू किया जाएगा।
एमडी ने कहा कि ई-ऑफिस लागू करने का मुख्य उद्देश्य यही है कि पारंपरिक मैनुअल फाइल मूवमेंट प्रोसेस पूरी तरह से डिजिटल तरीके से किया जाएगा। सभी फाइलें ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म के ज़रिए इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में बनाई, प्रोसेस, भेजी और स्टोर की जाएंगी। इससे फिजिकल फाइलों पर निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं होगी।
पर्यावरण सुरक्षा और खर्च नियंत्रण में मदद मिलेगी
एमडी ने कहा कि कागज़ के इस्तेमाल में कमी का मकसद डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन, ई-नोटिंग और डिजिटल परमिशन के ज़रिए कागज़ के इस्तेमाल को काफी कम करना है। इससे न सिर्फ पर्यावरण बचाने में मदद मिलती है बल्कि खर्च कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक फाइल रूटिंग और ऑटोमेटेड वर्कफ्लो के जरिए फाइलें बिना किसी देरी के तेज़ी से प्रोसेस होती हैं।
अधिकारी अपने ऑफिस सिस्टम के जरिए फाइलों को रिव्यू और अनुमोदित कर सकते हैं। इससे फैसले लेने का प्रोसेस तेज़ हो जाता है। एमडी ने कहा कि फाइलों का स्टेटस हर स्टेज पर रियल टाइम में मॉनिटर किया जा सकता है। आप साफ-साफ जान सकते हैं कि फाइल कहां, किसके पास और कितने समय से पेंडिंग है। इससे देरी कम होती है। नई फाइल बनाना, नोट करना, फॉरवर्ड करना, मंजूरी या बदलाव जैसे हर ऐक्शन को डिजिटल टाइमस्टैम्प और यूजर डिटेल्स के साथ रिकॉर्ड किया जाता है। इससे पूरा ऑडिट ट्रेल पक्का होता है और ज़िम्मेदार एडमिनिस्ट्रेशन में मदद मिलती है।
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अशोक रेड्डी ने आगे कहा कि ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म के ज़रिए सभी डिपार्टमेंट में एक जैसी मानक प्रक्रिया लागू की जाएगी। फाइल मैनेजमेंट में एक जैसा तरीका अपनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस विभाग में होने से कार्य संचालन की क्षमता बढ़ेगी। फाइलों का प्रोसेसिंग टाइम कम होगा और रिकॉर्ड मैनेजमेंट बेहतर होगा। सिक्योर डिजिटल स्टोरेज के साथ-साथ जब भी ज़रूरत हो, चेक करने के लिए आसान एक्सेस मिलेगा। डिपार्टमेंट के बीच समन्वय बेहतर होगा। ई-ऑफिस सिस्टम को लागू करना पारदर्शिता, कौशल और तकनीकी आधारित प्रशासन के प्रति कटिबद्धता को दर्शाता है। अवसर पर कार्मिक निदेशक मोहम्मद अब्दुल खादर, राजस्व सीजीएम किरण कुमार के साथ-साथ राजस्व और आईटी विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
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