पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करें : शिवधर रेड्डी

हैदराबाद, तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी ने आज पुलिस अधिकारियों को नगर निगम और नगरपालिकाओं के चुनाव कानून के तहत असरदार तरीके से पारदर्शितापूर्ण वातावरण में सम्पन्न करवाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि पुलिस महानिदेशक शिवधर रेड्डी ने आज ज़िला पुलिस अधीक्षकों और पुलिस थानों के इंस्पेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए नगर निगम व नगरपालिका चुनावों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नगर निगम व नगरपालिकाओं के चुनाव कानून के हिसाब से असरदार तरीके से होने चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में 7 नगर निगमों और 116 नगरपालिकाओं में चुनाव होने जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को कोत्तागुड़ेम, करीमनगर, महबूबनगर, मंचीरियाल, निजामाबाद, नलगोंडा और रामागुंडम नगर निगमों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 414 वार्डों तथा 116 नगरपालिकाओं के 2,582 वार्डों में असरदार तरीके से चुनाव करवाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
शिवधर रेड्डी ने बताया कि आगामी 11 फरवरी को मतदान होगा और 13 फरवरी को मतगणना होगी। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि इन चुनावों में किसी भी तरह की कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए। अवांछनीय घटनाओं को रोकने के लिए सशक्त कदम उठाए जाएँ। डीजीपी ने नियमों के अनुसार सख्ती से काम करने के निर्देश दिए।
चुनाव से जुड़े कानूनों की दी गयी जानकारी
अवसर पर नगर पुलिस के लीगल एडवाइजर रामुलू ने चुनाव से जुड़े कानूनों की जानकारी देते हुए बताया कि कानून के अनुसार मतदाताओं को प्रभावित करने, उन पर सिर्फ एक व्यक्ति को वोट देने के लिए दबाव डालने या उन्हें नामांकन जमा करने से रोकने जैसे कार्यों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके अलावा पीड़ितों का आर्थिक और सामाजिक बहिष्कार किया जाता है, तो ऐसी घटनाओं को प्राथमिकता देते हुए कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। इसी तरह यदि शांतिपूर्ण माहौल को खराब करने के लिए शराब बाँटी जाती है, तब इसे आबकारी अधिनियम का उल्लंघन माना जाना चाहिए।
इसके तहत दर्ज मामलों के अंतर्गत कम से कम 6 माह से दो वर्ष तक जेल की सजा का प्रावधान रहता है। हथियार अधिनियम के तहत जिनके पास लाइसेंस युक्त हथियार है, उन्हें अपने हथियार संबंधित पुलिस थानों में जमा करने होंगे। ऐसा न करने पर तीन साल की सजा हो सकती है। दूसरी ओर अधिकारियों को चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों द्वारा पालन किए जाने वाले नियमों को लेकर सख्त होना चाहिए।
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लाउडस्पीकर उपयोग पर सख्ती, ध्वनि प्रदूषण पर नजर
शिवधर रेड्डी ने कहा कि डिफेसमेंट ऑफ पब्लिक प्लेसेस एक्ट 1997 के अनुसार, अगर कोई बिना अनुमति के दीवारों पर पोस्टर लगाता है या अश्लील विज्ञापन दिखाता है, तो उसे न सिर्फ हटाया जा सकता है, बल्कि ऐसा करने वाले लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज किए जा सकते हैं। ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए संबंधित कानून का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। पुलिस अधिकारियों से अनुमति लिए बिना सार्वजनिक क्षेत्रों में लाउड स्पीकर का इस्तेमाल करना भी अपराध है।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत प्रचार के लिए गाड़ियों के मामले पर भी कई पाबंदियाँ हैं और चुनाव प्रचार के लिए उपयोग में लाए जाने वाले वाहनों के लिए निर्वाचन अधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि धार्मिक संस्थाओं और प्रार्थना स्थलों का उपयोग राजनीतिक उद्देश्य और पार्टी प्रचार के लिए करना संबंधित अधिनियम के तहत एक गंभीर अपराध माना जाता है। जो लोग नफरत फैलाने वाले भाषण देते हैं और जातियों व धर्मों के बीच झगड़ा करने वाला काम करते हैं, उन्हें पाँच वर्ष तक जेल की सजा हो सकती है।
शिवधर रेड्डी ने बताया कि जनसभा और जुलूस निकालने के लिए ज़िला पुलिस अधिनियम के तहत पहले अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके लिए यदि सामान्य जनजीवन प्रभावित होता है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि जो कोई भी चुनाव ड्यूटी में रुकावट डालता है, धांधली जैसी गड़बड़ियाँ करता है, तो वह तेलंगाना म्युनिसिपालिटीस एक्ट-2019 के तहत सजा का हकदार है। समीक्षा बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।
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