मिरगी मस्तिष्क से सम्बद्ध बीमारी है जो कमोबेश सभी देशों में समान रूप से पाई जाती है। लंदन में किए गए एक शोध से पता चला है कि गरीबों को मिरगी की बीमारी होने का खतरा ज्यादा रहता है। ब्रिटेन के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजी की रिपोर्ट के मुताबिक मिरगी और गरीबी के बीच संबंध को रेखांकित करने वाले कई तथ्य हैं।
अध्ययन के अनुसार कई कारणों से मिरगी के रोगियों की निर्धनता और बढ़ने की आशंका रहती है, मसलन उनका नौकरी नहीं कर पाना आदि। अनुसंधान के अनुसार मिरगी के मरीजों के जीन से उनकी शैक्षिक उपलब्धि और उनकी सेहत भी निर्धारित होती है। जन्म से जुड़ी विकृतियां और अपर्याप्त आहार जैसे कारण गरीबों में मिरगी का खतरा बढ़ाते हैं।
मिरगी रोग से पीड़ित मरीज अगर अपने मनोबल को बढ़ाए तथा अपने आत्मविश्वास को मजबूत रखें तो काफी हद तक मिरगी के पड़ने वाले दौरों से छुट्टी पा सकता है। मिरगी का रोग गंभीर रूप अख्यितार न करे, इसके लिए जरूरी है कि इसके आरम्भिक संभावित लक्षणों को पहचान कर कारगर कदम उठाने चाहिए।
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मिरगी के कतिपय लक्षण
अचानक जमीन पर गिरना, मुंह का एक ओर घूमना, आंखें पथरा जाना, मुट्ठियाँ कसना, गर्दन टेढ़ी पड़ना, मुंह से झाग निकलना, केवल आधे सेकेन्ड के लिए चक्कर आना, जीभ का बाहर दांतों के बीच आ जाना, सिर में दर्द व चक्कर आना, महिलाओं में मासिक धर्म (माहवारी) के दौरान दौरे आना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं।
रोकथाम के उपाय
इन लक्षणों में से कोई हो तो मिरगी होने की संभावना 70 प्रतिशत होती है। अत निम्न बातों पर अमल करें।
- नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र व नर्सिंग होम में सम्बंधित व्यक्ति की मेडिकल जांच जल्द से जल्द कराएँ या बड़े सरकारी, गैर सरकारी अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के योग्य चिकित्सक से व्यक्ति का मेडिकल चेक-अप करवाएं।
- मिरगी से पीड़ित व्यक्ति को वाहन नहीं चलाना चाहिए।
- मिरगी के रोगी जब सीढ़ियाँ चढ़ें तो परिवार के अन्य सदस्यों को मरीज का पूरा ख्याल रखना चाहिए।
- मिरगी के रोगी को घर में चूल्हे व रसोई गैस पर खाना, चाय आदि नहीं बनाना चाहिए।
- मरीज को अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखना आवश्यक है। इस बीच भारी काम-काज नहीं करना चाहिए।
गणपत पंवार
