क्या से क्या हो गया
घर तो बड़े-बड़े हैं
किंतु परिवार छोटे हो गए
भीड़ तो बढ़ गई
पर लोग तन्हा हो गए
पैसा तो बढ़ गया
पर दिल छोटे हो गए
सभा-समारोह तो बढ़ गए
लेकिन संवाद काम हो गए
सुविधाएं बढ़ गईं
पर सुख कम हो गया
साहित्य तो बढ़ गया
पर पढ़ना कम हो गया
व्यंजन तो बढ़ गए
किंतु भूख कम हो गई
उपचार तो बढ़ गए
पर ज़िंदगी छोटी हो गई
संख्या में परिधान बढ़ गए
परंतु आकार में छोटे हो गए
मंदिर जाने वाले तो बढ़ गए
पर सच्चे भक्त काम हो गए।
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