अपना अल्हड़पन


अल्हड़पन में टूट गया दिल, टूटे दिल के तार।
अल्हड़पन में छुपा न सके, अपने व्यवहार ।।
किसी के झाँसे में आना, अल्हड़पन था
किसी को दिया वक्त प्याला, बड़प्पन था
समझ गया दिल अपना, प्रीत पराई की
बिन समझे जो दिल लगाया, जग हंसाई की
समझ सके न प्रीत का कैसा सरोकार।
अल्हड़पन में टूट गया दिल, टूटे दिल के तार ।।
मेरे अर्थ को बेअर्थ कर, मुझ पर लगे इल्ज़ाम
जज़्बात मेरे काम न आए, होने लगे बदनाम
अपने व गैर की पहचान के, अब चख लिये जाम
प्रेम में असफलता के, मिल गये परिणाम
समझ की अपनी नहीं रही, तेज तलवार।

अल्हड़पन में टूट गया दिल, टूटे दिल के तार ।।
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