हनुमान चालीसा पढ़ते समय करें नियमों का पालन

आजकल भागदौड़ भरी ज़िंदगी में जब मन बेचैन होता है, तो लोग हनुमान चालीसा पढ़ते हैं ताकि थोड़ा सुकून मिले। कई लोग इसे रोज़ सुबह पढ़ते हैं तो कुछ किसी मुश्किल समय में ही इसका सहारा लेते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अगर इस पाठ को सही तरीके से न किया जाए, तो इसका पूरा असर नहीं मिलता है।

सिर्फ शब्द बोलना काफी नहीं होता, भाव और तरीका दोनों का ध्यान रखना भी ज़रूरी होता है। यहाँ हनुमान चालीसा पढ़ते समय ध्यान रखने वाली कुछ जरूरी बातों का पा कर रहे हैं। हनुमान चालीसा पढ़ने से पहले नहाना और साफ कपड़े पहनना तो ज़रूरी है और उतना ही ज़रूरी है, मन को भी साफ करना।

अगर आप किसी से झगड़कर या गुस्से में चालीसा पढ़ने बैठते हैं, तो उसका असर कम हो सकता है। कोशिश करें कि पाठ से पहले खुद को मानसिक रूप से शांत कर लें, अगर मुमकिन हो तो एक हल्का-सा दीया और अगरबत्ती भी जला लें।

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हनुमान चालीसा पाठ में ध्यान, नियम और वातावरण का महत्व

  • चालीसा पढ़ते समय कोई अन्य कार्य भी कर रहे हों, तो ये आपकी भक्ति नहीं कहलाएगी। हनुमान जी को सच्ची श्रद्धा और ध्यान पसंद है। जब भी चालीसा पढ़ें, तब ध्यान सिर्फ वहीं रखें। अगर समय कम है, तो थोड़े में ही पूरी श्रद्धा से पढ़ें, न कि जल्दबाज़ी में। पाठ के समय राम जी और हनुमान जी की छवि मन में रखें, तभी असर मिलेगा।
  • चालीसा पढ़ने के लिए शांत और साफ जगह चुनें। हो सके तो रोज़ उसी जगह पर बैठें, अगर आप मंदिर में नहीं जा सकते, तो घर का एक कोना तय कर लें, जहां शांति हो और बा -बार कोई टोके नहीं। टीवी चलती हो या बच्चे शोर कर रहे हों, तो मन लगाना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में पाठ अधूरा रह सकता है।
  • कई बार लोग बीच में ही पाठ रोक देते हैं या किसी वजह से पूरा नहीं कर पाते है। अगर आपने चालीसा शुरू की है, तो उसे पूरा ज़रूर करें। अधूरा पाठ करने से उसका प्रभाव भी अधूरा रह जाता है। कोशिश करें कि रोज़ एक तय समय पर, जैसे सुबह या शाम को, पूरी चालीसा पढ़ें। इससे एक नियमितता बनी रहती है और मन भी धीरे-धीरे एकाग्र होने लगता है।
  • चालीसा पाठ सिर्फ एक रूटीन न बन जाए, इसके लिए थोड़ा माहौल बनाना ज़रूरी है। एक छोटा-सा दीपक, अगरबत्ती या धूपबत्ती जलाने से माहौल पवित्र बनता है और मन जल्दी शांत होता है। पढ़ते समय जल्दबाज़ी न करें। हनुमान जी को नियम और अनुशासन पसंद है, इसलिए पाठ में भी उनका पालन करें।

-पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा

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