पूर्व अधिकारियों ने राहुल गांधी पर सवाल उठाते हुए माफी की मांग की

नयी दिल्ली, भारतीय सेना एवं प्रशासन के पूर्व एवं सेवा निवृत्त अधिकारियों तथा अधिवक्ताओं समेत 204 प्रतिष्ठित लोगों ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से 12 मार्च को संसद परिसर के अंदर किये गए व्यवहार के लिए देश से माफी मांगने की मांग की।
इन भूतपूर्व सैन्य अधिकारियों और नौकरशाहों ने राहुल गांधी के उक्त व्यवहार को शालीनता और संस्थागत गरिमा का ‘उल्लंघन’ करार दिया। एक खुले पत्र में हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि 12 मार्च को संसद भवन परिसर के भीतर विरोध प्रदर्शन के दौरान गांधी के कार्यों ने अध्यक्ष की ‘जानबूझकर अवहेलना’ की और ‘संसदीय प्राधिकार के प्रति अनादर’ दिखाया।
पत्र में कहा गया, ‘‘संसद परिसर के भीतर प्रदर्शन या विरोध करने पर रोक लगाने के वास्ते अध्यक्ष द्वारा जारी किए गए स्पष्ट निर्देश के बावजूद, गांधी के नेतृत्व वाले विपक्ष ने इसकी अवहेलना का रास्ता चुना।’’ एक संयुक्त बयान में कहा गया,‘‘अध्यक्ष की इस तरह की जानबूझकर अवहेलना केवल प्रक्रियाओं का उल्लंघन नहीं है, यह संसदीय अधिकार के प्रति जानबूझकर की गई अवहेलना और एक संवैधानिक संस्था की गरिमा से ऊपर व्यक्तिगत राजनीतिक तमाशे को रखने की इच्छा को दर्शाती है।’’
अवहेलना और अहंकार और विशेषाधिकार की ‘‘भावना’’ को दर्शाता
पत्र में कहा गया, ‘‘गांधी को इस व्यवहार के लिए राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए और उस रवैये पर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए जिसके कारण यह व्यवहार हुआ, ताकि संसद की गरिमा, अधिकार और संस्थागत सुचिता पूरी तरह से संरक्षित रहे।’’ इसमें कहा गया है कि ऐसा आचरण स्थापित व्यवहार और शिष्टाचार के मानदंडों की स्पष्ट अवहेलना और अहंकार और विशेषाधिकार की ‘‘भावना’’ को दर्शाता है।
पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों ने आरोप लगाया कि गांधी ने अन्य सांसदों के साथ मिलकर संसद परिसर के अंदर प्रदर्शनों पर रोक लगाने वाले अध्यक्ष के निर्देशों की अवेहलना करते हुए संसद की सीढ़ियों पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने दावा किया कि ऐसा आचरण देश की सर्वोच्च विधायी संस्था के सदस्यों के लिए ‘बिल्कुल अनुचित’ था और इसने संसद को ‘राजनीतिक तमाशे का मंच’ बना दिया।
पत्र में कहा गया, ‘‘गांधी कई सांसदों के साथ संसद की सीढ़ियों पर बैठे चाय-बिस्किट खाते हुए देखे गए, जो देश की शीर्ष विधायी संस्था के सदस्यों के लिए बिल्कुल अशोभनीय था। संसद की सीढ़ियां तमाशे या राजनीतिक नाटक का स्थान नहीं हैं।’’संसद को ‘लोकतंत्र का मंदिर’ करार देते हुए पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों ने कहा कि परिसर के गलियारों और सीढ़ियों सहित हर जगह और हर समय इसकी गरिमा को संरक्षित किया जाना चाहिए।
यह पत्र जम्मू और कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एस पी वैद द्वारा समन्वित किया गया है। इस पर 204 व्यक्तियों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें सेवानिवृत्त सशस्त्र बल अधिकारी एवं पूर्व नौकरशाह शामिल हैं। इस पर पूर्व राजदूतों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के भी हस्ताक्षर हैं। भाषा
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