रेवड़ी रेवड़ी में बड़ा फ़र्क है!

भाजपा के दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए जारी आरंभिक संकल्प पत्र से राजधानी के मतदाताओं के प्रति पार्टी की रणनीति में अहम बदलाव का पता चलता है। इस घोषणा पत्र में सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को दूर करने और दिल्ली के निवासियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए कई कल्याणकारी उपाय पेश किए गए हैं।
मुख्य वादों में महिला समृद्धि योजना के तहत महिलाओं को 2,500 रुपये मासिक वित्तीय सहायता, हर गर्भवती महिला के लिए 21,000 रुपये की अनुदान राशि, होली और दीवाली पर एक अतिरिक्त मुफ्त सिलेंडर के साथ 500 रुपये में एलपीजी सिलेंडर की व्यवस्था, और 60 से 70 वर्ष की आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए 2,500 रुपये की पेंशन योजना तथा 70 वर्ष से ऊपर के लोगों, विधवाओं और विकलांग व्यक्तियों के लिए 3,000 रुपये की पेंशन शामिल है।
आयुष्मान भारत योजना को दिल्ली में लागू करने का वादा भी बहुत ख़ास है। इसके तहत दिल्ली सरकार की ओर से अतिरिक्त 5 लाख रुपये जोड़कर प्रत्येक परिवार को कुल 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य दिल्ली में स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता में सुधार लाना है, जो लंबे समय से एक समस्या रही है।
ज़ाहिर है कि भाजपा के इन लुभावने वादों ने इन कल्याणकारी उपायों की स्थिरता और वास्तविकता पर बहस छेड़ दी है। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तो भाजपा के घोषणा पत्र की आलोचना करते हुए, इसे आप की मौजूदा योजनाओं की नकल तक कह डाला है। उन्होंने भाजपा की ईमानदारी पर सवाल उठाया है, क्योंकि वह पहले ऐसी ही कल्याणकारी पहलों की आलोचना रेवड़ी कहकर करती आई है। केजरीवाल की यह टिप्पणी, अतीत में लोकलुभावन उपायों के ख़िल़ाफ भाजपा के रुख पर आधारित है। कल तक रेवड़ी कल्चर का मखौल उड़ाने वाले अगर आज खुद दोनों हाथों से रेवड़ियाँ लुटा रहे हैं, तो नैतिकता और इरादों पर सवाल तो उठेंगे ही!
भाजपा के घोषणा पत्र में मोहल्ला क्लीनिकों को बंद करने का भी प्रस्ताव है, क्योंकि उसकी नज़र में वे भ्रष्टाचार के अड्डे भर हैं। याद रहे कि मोहल्ला क्लीनिक आप सरकार की एक प्रमुख पहल थी। कहा जाता है कि उसे प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रशंसा मिली है। डर है कि इस लोकप्रिय योजना का विरोध कहीं भाजपा के लिए उल्टा वार साबित न हो! इन्हें बंद करने के प्रस्ताव को आप सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में बढ़े कदम को पीछे खींचने की तरह प्रचारित करेगी। देखना मनोरंजक होगा कि भाजपा अपनी इस घोषणा का बचाव कैसे करती है।
सीधा-सा सवाल है कि अपनी वाली रेवड़ियों को लेकर दिल्ली के बजट पर संभावित दबाव के बारे में भाजपा का क्या नज़रिया है? इतनी व्यापक योजनाओं को लागू करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की ज़रूर होती है, और अगर राजस्व पैदा करने या पुन: आवंटित करने की स्पष्ट योजना के बिना इन्हें लागू किया गया, तो वित्तीय असंतुलन का खतरा हो सकता है। यह ज़रूरी है कि भाजपा यह बताए कि वह इन कार्पामों को कैसे वित्तपोषित करेगी? कहीं इनके लिए अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों, जैसे कि बुनियादी ढाँचे, शिक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा के बजट में तो कटौती नहीं की जाएगी न?
अस्तु। इसमें संदेह नहीं कि दिल्ली में आप की पहचान रही इस बहुप्रचारित रेवड़ी संस्कृति की ओर भाजपा का अचानक रुझान व्यापक मतदाता आधार को आकर्षित करने की रणनीतिक कोशिश का हिस्सा है। वैसे तो भाजपा को देश भर में मतदाता को लाभार्थी समूहों में बदलने में बड़ी सफलता मिली है! फिर भी अचरज नहीं कि दिल्ली चुनाव में उसके इन संकल्पों को कुछ लोग अवसरवाद के रूप में देखें – पार्टी इन उपायों की निंदक जो रही है! देखना होगा कि कथित रूप से मुफ़्तख़ोरी का आदी बन चुका मतदाता इस बार किस पर ज़्यादा कृपा बरसाता है!
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