हाईकोर्ट ने माँगी शिक्षा का अधिकार कानून पर अमलावरी रिपोर्ट

हैदराबाद, उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को राज्य में शिक्षा का अधिकार कानून लागू करने की पूरी जानकारी देने के आदेश जारी किये। अदालत ने सरकारी अधिवक्ता से स्पष्ट कह दिया है कि वह अधिकारियों से जानकारी लेकर पूरी जानकारी दें। इसके साथ ही इस मामले पर अगली सुनवाई तीन हफ्ते के लिए टाल दी गई है। रजिस्ट्री को आदेश दिया गया कि इस याचिका को इसी मुद्दे पर पहले दायर जनहित याचिका के साथ नत्थी किया जाए।

मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने अधिवक्ता बी. कोमुरैया के लिखे पत्र को सुनवाई के लिए स्वत: संज्ञान के तौर पर जनहित याचिका स्वीकार कर लिया, जिसमें सरकार को यूनिवर्सल एलीमेंट्री एजुकेशन (यूईई) को सख्ती से लागू करने के निर्देश देने की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जीएम मोहिउद्दीन की खंडपीठ ने गुरुवार को इस जनहित याचिका पर सुनवाई की।

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विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य व योग कक्षाओं की मांग

कोमुरैया ने दलील देत हुए कहा है कि राज्य में स्कूलों की अच्छी-खासी संख्या होने के बावजूद ड्रॉपआउट दर बहुत ज्यादा है। इस वजह से यूईई का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। कोमुरैया का कहना है कि विद्यार्थियों के दिमागी स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कोई योग क्लास भी नहीं हैं। केन्द्र ने शिक्षा को पब्लिक यूटिलिटी सर्विस घोषित किया है। इस पर एक गजट भी जारी हो चुका है और कई याचिकाएँ डाली जा चुकी हैं, लेकिन अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।

राज्य में यूईई को लागू करना कागजी शेर जैसा हो गया है। राइट टू फ्री एंड कंपल्सरी एजुकेशन एक्ट के मकसद को पाने के लिए एक स्कूल एजुकेशन कमीशन बनाया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि स्कूल एजुकेशन प्रोसेस पर एक रिपोर्ट मांगी जानी चाहिए। दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने सरकारी अधिवक्ता को विवरण देने का आदेश दिया और सुनवाई टाल दी।

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