इजराइल-अमेरिका-ईरान : जंग पर भारी पड़ रहे हैं ड्रोन !
दुबई एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले से पहले, खाड़ी देशों में 1,800 से अधिक ड्रोन-मिसाइल हमले होने की रिपोर्ट है। वर्तमान में सैन्य ड्रोन का इस्तेमाल बुरी तरह बढ़ गया है। छोटे आकार, लंबी उड़ान और स्वार्म क्षमता में क्रांतिकारी प्रगति हो रही है। ईरान रडार को चकमा देने वाले हाइपरसोनिक ड्रोन विकसित कर रहा है, अमेरिका स्वार्म तकनीक और एआई एकीकरण पर जोर दे रहा है। ईरान सस्ते ड्रोन से महंगे अमेरिकी सिस्टम को थका सकता है। ये ड्रोन गुप्त हमले, तेल, बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हैं, जिससे संघर्ष फैलता और इससे संघर्ष लंबा खिंचता है। यह युद्ध ड्रोन के चलते अगले बरस तक जा सकता है। ड्रोन-क्रांति, युद्ध को लोकतांत्रिक बनाती है लेकिन मानवीय हानि कम नहीं। भविष्य में भारत को भी दक्षिण एशिया में समान खतरे का सामना करना पड़ सकता है।
दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर ईरान का ड्रोन हमला एक क्षेत्रीय युद्ध के प्रभाव को वैश्विक बनाने का प्रयास था। विगत वर्ष दुनिया के इस सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक से लगभग दस करोड़ यात्रियों की आवाजाही हुई थी। जब ऐसे वैश्विक परिवहन केंद्र युद्ध का निशाना बनते हैं, तो उसका प्रभाव वैश्विक होता है। अब ऐसे हमले बहुधा ड्रोन के जरिये होने लगे हैं, जो आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति का संकेत है। पश्चिम एशिया के इस संघर्ष में ऐसा ड्रोन हमला न तो पहला है, न आखिरी। इसी युद्ध में खाड़ी देशों पर अब तक 1,800 से अधिक ड्रोन हमले होने की रिपोर्ट है।
दुबई एयरपोर्ट, फुजैराह तेल टर्मिनल और अन्य ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमलों ने यह संकेत दिया है कि इस युद्ध में ड्रोन अब प्रमुख भूमिका में हैं। ईरान ने ड्रोन और रॉकेटों की कतारों से भरी सुरंगों के एक विशाल भूमिगत नेटवर्क के प्रदर्शन और अपने ड्रोन के जखीरे को दिखा यह धमकाया है कि उसके पास लंबी लड़ाई का सामान मौजूद है और यह सच है कि अगर इनका इस्तेमाल बढ़ा, तो यह युद्ध बहुत लंबा खिंच सकता है। रूस-यूक्रेन जंग का उदाहरण हमारे सामने हैं। वहां भी जंग को बरसों तक खींचने के लिये ड्रोन बहुत हद तक जिम्मेदार हैं।
ड्रोन ने कमजोर देशों को भी दी नई सैन्य ताकत
ड्रोन एक ऐसे युद्धक हथियार के रूप में उभरे हैं, जो किसी कमजोर पड़ते देश को भी बराबरी या बढ़तरी के तौरपर खड़ा कर देते हैं। ईरानी ड्रोन के इस्तेमाल ने आज महाशक्ति अमेरिकी रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा दी है। इस संघर्ष के दौरान उसे सबक मिल चुका है कि ईरान ने हाल के वर्षों में जिस प्रकार ड्रोन तकनीक पर जोर दिया है, वह आधुनिक युद्ध की रणनीति को किस तरह बदल रहा है।
ड्रोन अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं, बड़ी संख्या में छोड़े जा सकते हैं और इन्हें रोकना पारंपरिक वायु रक्षा प्रणाली के लिए कठिन होता है। एफबीआई को कहना पड़ा है, ईरान का घातक ड्रोन शस्त्रागार अमेरिका के लिए एक वेक-अप कॉल है। लंबी दूरी के हमलावर ड्रोन विकसित और निर्मित करने के मामले में उन्होंने हमसे बढ़त हासिल कर ली है। वे काफी समय से इसकी तैयारी कर रहे हैं। अमेरिकी रक्षा प्रणालियां ड्रोंस के झुंड हमलों यानी स्वार्म्स अटैक के लिए बहुत तैयार नहीं हैं।
ऐसे खतरे से निपटने के लिए अमेरिका अब भी संघर्ष कर रहा है। अमेरिकी सेना के एक ड्रोन विशेषज्ञ चेताते हैं कि ईरानी हमलावर ड्रोन संभावित रूप से अमेरिका की रक्षा प्रणालियों से बचकर निकल सकते हैं और अमेरिकी धरती पर हमला कर सकते हैं। कम लागत वाले, सस्ते, छोटे ड्रोन जो धीमी गति से और कम ऊंचाई पर उड़ते हैं, जिन्हें झुंड की शक्ल में भेजा जा सकता है, उनकी पहचान इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल जैसी नहीं होती, ऐसे ड्रोन उच्च गति वाले हथियारों का पता लगाने के लिए बनाई गई रडार प्रणालियों को असामान्य या अजीब लग सकते हैं।
एक रात में सैकड़ों ड्रोन से हवाई सुरक्षा पर हमला
यूक्रेन में ऑपरेशन स्पाइडरवेब के तहत हवाई सुरक्षा को पस्त करने के लिए कभी-कभी एक ही रात में सैकड़ों ड्रोन लॉन्च किए जाते हैं। ये ड्रोन अक्सर धीरे उड़ते हुए घंटों तक हवा में रहते हैं, जिससे अनिश्चितता बनी रहती है कि वे कब या कहां हमला करेंगे। इसलिए अमेरिकी एजेंसियां भेद्यता के बारे में काफी चिंतित नजर आ रही हैं; क्योंकि लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम सस्ते, लंबी दूरी के ड्रोन के खिलाफ अमेरिका की रक्षा में अभी गंभीर खामियां हैं। उनकी चिंता एफबीआई द्वारा राज्य भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जारी किए गए अलर्ट सूचना ने और बढ़ा दी है।
यदि ईरान के तेल ठिकानों पर बड़े हमले हुए, तो वह अपतटीय जहाज अथवा नौका,मछली पकड़ने वाली नाव जैसे किसी गैर संदिग्ध जलयान से कैलिफोर्निया पर ड्रोन हमले का प्रयास कर सकता है। कैलिफोर्निया जो अमेरिका के एक प्रतीक की तरह है, जो अपनी विशाल आबादी, पर्यटन उद्योग और आर्थिक महत्व के कारण एक निशाना हो सकता है तो वह अर्थव्यवस्था को बाधित करने और दहशत फैलाने के लिए होटल, बंदरगाह या तेल रिफाइनरियों जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना सकता है।
यूक्रेन ने 2024 के ड्रोन ऑपरेशनों में सामान्य वाहनों के रूप में छिपे हुए लॉन्च प्लेटफॉर्म का उपयोग दुश्मन के इलाके में गहराई तक हमला किया था। अमेरिका इस सूचना को लेकर इसलिए भी चिंताकुल होगा; क्योंकि वह लॉस एंजिल्स में 2026 फीफा विश्व कप और 2028 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक जैसे प्रमुख वैश्विक आयोजनों की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। ईरान ने कुछ बरसों में कामिकाज़े ड्रोन का एक विशाल शस्त्रागार बनाया है, आत्मघाती ड्रोन विस्फोटक पेलोड के साथ लक्ष्यों से टकराने के लिए डिज़ाइन किए गए है।
शाहिद-136 ड्रोन की लंबी दूरी और घातक क्षमता
इसी तरह के शाहिद-136 ड्रोन, ये डेल्टा-विंग ड्रोन 11 फीट से अधिक लंबे होते हैं, लगभग 115 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ते हैं और 44 से 88 पाउंड वजन वाले विस्फोटक वारहेड ले जाते हुए 1,500 मील से अधिक की यात्रा कर सकते हैं। जिन्हें अक्सर हवाई सुरक्षा को पस्त करने के लिए लॉन्च किया जाता है, इससे और कर्रार ड्रोन को लेकर अमेरिका अत्यधिक चिंतित है। बेशक ड्रोन युद्ध को असममित बनाते हैं- ईरान सस्ते ड्रोन से महंगे सिस्टम को थका सकता है। इसीलिए उसने यूक्रेन तक से शाहिद ड्रोन के मुताल्लिक जानकारी मांगी है।
माना कि ईरान, चीन और तुर्की जैसे देश ड्रोन तकनीकी के मामले में आगे हैं, लेकिन अमेरिका और दूसरे देश कई अब इस ड्रोन स्पर्धा में आगे निकलने और दुश्मन को चौंकाने के लिये नित नये प्रयोग कर रहे हैं, जिससे जंग में ड्रोन की उपयोगिता और बढ़ने वाली है और भविष्य में यह मानवरहित मशीन जंग के नतीजों को पलट देने तक प्रभावित कर सकता है। अमेरिकी वायु सेना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस ऐसे ड्रोन विकसित कर रही है जो बिना मानवीय हस्तक्षेप के झुंड में उड़ेंगे और दुश्मनों की पहचान करेंगे साथ ही हाइड्रोजन से चलने वाले ड्रोन जो लंबी दूरी की उड़ानों के लिए गेम-चेंजर होंगे।
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जेब में समाने वाले जासूसी ड्रोन का बढ़ता इस्तेमाल
अमेरिकी सैनिकों को व्यक्तिगत जासूसी के लिए जेब में समाने वाले ड्रोन इस्तेमाल कर ही रहे हैं। सुरागरसी के लिए एमआईटी कीट जैसा और चीन मच्छर जैसा ड्रोन विकसित कर रहा है। ड्रोन अब केवल हवा तक सीमित नहीं रहने वाले मंता रे पानी के नीचे चलने वाला ड्रोन है। यह बिना ईंधन भरे हफ्तों तक समुद्र की गहराई में मिशन चला सकता है। चीन सी-स्किमिंग एंटी-शिप ड्रोन बना रहा है, जो समुद्र की सतह के ठीक ऊपर उड़ते हुए बिना रडार की पकड़ में आए युद्धपोतों के लिए बड़ा खतरा बनता है।
ये जानकारियां स्पष्ट करती हैं कि जहां एक ओर ईरान जैसे देश सस्ते और भारी संख्या वाले ड्रोनों का उपयोग बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने के लिए कर रहे हैं, वहीं अमेरिका और उसके सहयोगी एआई लेजर और नैनो-तकनीक के माध्यम से इनसे बचने और जवाबी हमला करने की तैयारी कर रहे हैं। भविष्य में एआई-संचालित स्वार्म और हाइपरसोनिक ड्रोन प्रमुख होंगे। ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध ड्रोन हथियारों की होड़ तेज करेगा।

ड्रोन से मुकाबले के लिए लेजर शील्ड और काउंटर-स्वार्म तकनीकें भी और विकसित होंगी। फिलहाल मौजूदा हालात बताते हैं कि ड्रोन सुरक्षा अब किसी भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे पहली प्राथमिकता बन गई है। आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन अब केवल सहायक उपकरण नहीं बल्कि रणनीतिक हथियार बन चुके हैं। ड्रोन की कम लागत और दुर्गमता से प्रतिशोध आसान हो जाता है सो संघर्ष समाप्ति के बजाय, यह तकनीक उसे लंबा खींचती है, ऐसे में ड्रोन के चलते यह युद्ध अगले बरस तक खिंच सकता है।
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