जलबोर्ड एमडी ने किया निर्माणाधीन दो जलाशयों का दौरा

हैदराबाद, हैदराबाद महानगरीय पेयजलापूर्ति एवं मलजल निकास बोर्ड के प्रबंध निदेशक अशोक रेड्डी ने पटनचेरू निर्वाचन क्षेत्र के उस्मान नगर में निर्मित किए जा रहे 4 मिलियन लीटर (एमएल) और 2 मिलियन लीटर (एमएल) क्षमता वाले दो जलाशयों का दौरा किया। इन जलाशयों से आउटर रिंग रोड पर फैले गांवों, कॉलोनियों और गेटेड कम्युनिटी को पेयजल आपूर्ति की जाएगी।

अवसर पर एमडी अशोक रेड्डी ने कहा कि पटनचेरु निर्वाचन क्षेत्र की तेलपुर नगरपालिका में दोनों जलाशयों से पेयजल की आपूर्ति की जाएगी, जो जल बोर्ड द्वारा शुरू की गई ओआरआर परियोजना के चरण-2 और पैकेज 2 का हिस्सा हैं। वितरण लाइनों और जलाशयों का निर्माण पूरा हो चुका है। जलाशय के इनलेट और आउटलेट का निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है तथा इसका सफल परीक्षण भी किया जा चुका है।

विद्युत कार्य और क्लोरीन कक्ष का कार्य हाल ही में पूरा किया गया है। एमडी ने अधिकारियों को आंतरिक सड़कों और सौंदर्यीकरण कार्य को पूरा करने और इसे शुरू करने के लिए तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जलाशयों के पंप कक्ष, इनलेट और आउटलेट का निरीक्षण कर वितरण लाइनों, नए जलाशयों से लाभान्वित होने वाले क्षेत्रों, नए कनेक्शनों, घरेलू, थोक कनेक्शनों आदि के बारे में जानकारी ली।

अशोक रेड्डी ने बताया कि उस्मान नगर जलाशयों के सेवा क्षेत्र के लिए जल ऑडिट शुरू किया गया है। प्रयोग के तौर पर इन जलाशयों से आपूर्ति की जाने वाली प्रत्येक बूंद की गणना करने के लिए एक प्रवाह मीटर स्थापित किया जाएगा और यदि मीटर रीडिंग की गणना अंतिम उपयोगकर्ता पर भी की जाती है, तो संचरण हानि का पता चल जाएगा।

स्मार्ट वाल्व तकनीक से जल प्रबंधन में नवाचार

एमडी ने बताया कि इसके माध्यम से बर्बाद हो रहे पानी की पहचान करने और उसे रोकने के लिए कदम उठाने का अवसर मिलेगा। एमडी ने कहा कि इन दोनों जलाशयों के भीतर वितरण पाइपलाइनों पर प्रायोगिक आधार पर स्मार्ट वाल्व लगाए जाएंगे, जिससे लाइनमैनों को मैदान में जाने और मोबाइल ऐप के साथ वाल्वों को संचालित करने की आवश्यकता नहीं होगी।

वे इंटरनेट आधारित संचार के माध्यम से काम कर सकते हैं। इससे वाल्व संचालन के साथ-साथ पानी की गुणवत्ता, मात्रा और क्लोरीन प्रतिशत के बारे में भी जानकारी मिलती है। यह स्मार्ट वाल्व प्रौद्योगिकी पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर काम करती है। चूंकि इसमें बैटरी बैकअप भी है, इसलिए परिचालन के दौरान बिजली की कोई समस्या नहीं होगी। प्रायोगिक तौर पर लागू की गई यह प्रणाली अब तक सनत नगर में प्रभावी रूप से काम कर रही है।

अशोक रेड्डी ने अधिकारियों को ऑनलाइन मॉनिटरिंग की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए ताकि जलाशय के जलस्तर, क्लोरीन प्रतिशत आदि का विवरण मुख्यालय से जुड़े डैशबोर्ड पर भेजा जा सके और यदि जलाशय से आपूर्ति किए जाने वाले पानी में क्लोरीन प्रतिशत कम हो जाए तो संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचित किया जा सके।

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जलाशय परिसर में सोलर, सुरक्षा और बागवानी व्यवस्था

एमडी ने अधिकारियों को जलाशय परिसर में सभी लाइटों के लिए सोलर पैनल लगाने तथा उससे उत्पन्न बिजली से लाइटों को संचालित करने की व्यवस्था करने के निर्देश देते हुए जलाशय परिसर में सुखद वातावरण बनाने के लिए बागवानी और भूनिर्माण कार्य करने का सुझाव दिया। अधिकारियों को ड्रिप सिंचाई पद्धति का उपयोग करके बागवानी प्रबंधन को लागू करने तथा पौधों की खेती के लिए शुद्ध पानी के बजाय भूजल का उपयोग करने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने कहा कि नवनिर्मित जलाशयों पर विस्तृत जानकारी सहित साइनबोर्ड लगाए जाएं और जलाशय परिसर की दीवार पर पानी बचाने और बर्बादी रोकने के बारे में नारे लिखे जायें। उन्होंने जलाशय परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने और ऑनलाइन निगरानी के लिए उन्हें जल बोर्ड मुख्यालय से जोड़ने का सुझाव दिया।

अवसर पर एमडी ने अधिकारियों को इन सभी से संबंधित डीपीआर तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसके बाद एमडी ने जलाशय परिसर में बन रहे कार्यालय कक्ष के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और अधिकारियों को कई सुझाव दिए। उन्होंने बताया कि 20 करोड़ रुपए की लागत से बनाये गये यह दोनों जलाशय यदि सफल हो जाते हैं तो इस परियोजना के उपलब्ध हो जाने से लगभग एक लाख लोगों की आबादी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।

ओआरआर परियोजना से 25 लाख लोगों को मिलेगा लाभ

वर्तमान में 55 बल्क कनेक्शन बनाए जा रहे हैं तथा इस उद्देश्य के लिए 22 किलोमीटर वितरण लाइन का निर्माण पहले ही किया जा चुका है। एमडी ने कहा कि ओआरआर परियोजना चरण दो चरणों में 1200 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की जा रही है जिसमें 71 नये सेवा जलाशय (क्षमता 140.50 मिलियन लीटर) तथा 2758 किलोमीटर का नया पाइपलाइन नेटवर्क निर्मित किया जा रहा है।

जब यह परियोजना पूरी होते ही जलाशय उपलब्ध हो जाएंगे तो कुल 3.6 लाख परिवार और 25 लाख की आबादी को लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर 7 नगर निगम, 18 नगरपालिकाओं और 24 ग्राम पंचायतों को लाभ होगा। इसे दो पैकेजों में पूरा करने का निर्णय लिया गया है। पैकेज 1 परियोजना के लिए 613 करोड रुपये की लागत होगी जिसमें 33 सेवा जलाशयों और 1522 किलोमीटर पाइपलाइन नेटवर्क का निर्माण किया जा रहा है।

इसमें सरूर नगर, महेश्वरम, शमशाबाद, हयातनगर, इब्राहिमपटनम, घटकेसर और कीसरा (7 मंडल) शामिल हैं, जिससे कुल 4.36 लाख लोग लाभान्वित होंगे। पैकेज 2 में 38 नये सर्विस जलाशय और 1250 किलोमीटर पाइपलाइन नेटवर्क का निर्माण किया जा रहा है। इसकी वार्षिक लागत 587 करोड़ रुपए होगी। इसमें राजेंद्र नगर, शमीरपेट, मेडचल, कुतुबुल्लापुर, पटनचेरु, आरसीपुरम और बोलाराम (5 मंडल) शामिल हैं जिससे कुल 1.96 लाख लोग लाभान्वित होंगे। अवसर पर परियोजना निदेशक टीवी श्रीधर, जीएम, डीजीएम और प्रोडक्शन कंपनी के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

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