भयभीत हैं केसीआर और हरीश राव : सरकार

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय में राज्य सरकार की ओर से विवरण देते हुए बताया गया कि किसी भी डिजाइन को मंजूर किए बिना 85 हजार करोड़ रुपये से प्रारंभ कालेश्वरम परियोजना के खर्च को 1.47 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया। केसीआर सरकार की लापरवाही के कारण ही मेडीगड्डा के पास पिल्लरों में दरार पड़ गई। 1.47 लाख करोड़ रुपये की लागत के साथ प्रारंभ की गई इस परियोजना के पिल्लरों में दरार पड़ने पर इसकी जाँच से कैसे इनकार किया जा सकता है। समाचार-पत्रों में प्रकाशित समाचारों से प्रतिष्ठा भंग होने के भय से ही याचिकाकर्ताओं ने अदालत की शरण ली। याचिकाकर्ताओं की प्रतिष्ठा को आयोग की रिपोर्ट से कोई हानि नहीं पहुँची है।

मेडीगड्डा पिल्लरों में पड़ी दरार के मामले पर सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जस्टिस पी.सी. घोष के नेतृत्व में एक सदस्य आयोग द्वारा जाँच कर दी गई रिपोर्ट को चुनौती देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव और पूर्व सिंचाई मंत्री टी. हरीश राव द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज करने का सरकार की ओर से आग्रह किया गया। सरकार की ओर से बताया गया कि आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही सीबीआई जाँच के आदेश दिए गए।

इसीलिए सीबीआई की जाँच पूरी होने तक आयोग की रिपोर्ट में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। सरकार की ओर से बताया गया कि निर्माण कार्य के दौरान तत्कालीन केसीआर सरकार ने गुणवत्ता का पालन नहीं किया। हाई पॉवर कमेटी, विशेषज्ञ समिति और मंत्रिमंडल की समिति द्वारा दी गई रिपोर्ट पर ध्यान न देने को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

मेडीगड्डा जलाशय पर उठे गंभीर सवाल

इस मामले पर सरकार की ओर से सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उक्त समितियों द्वारा दिए गए दिशा-निर्देश और सलाह को अमल में न लाने के कारण ही कालेश्वरम प्रॉजेक्ट से संबंधित मेडीगड्डा जलाशय के पिल्लरों में दरार पड़ गई। उन्होंने बताया कि इस मामले की जाँच हेतु जस्टिस पी.सी. घोष आयोग के गठन के लिए सरकार द्वारा जारी सरकारी आदेश संख्या 6 को चुनौती देते हुए भारास प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव, आईएएस अधिकारी स्मिता सबरवाल, पूर्व आईएएस अधिकारी शैलन्द्र कुमार जोशी ने अलग-अलग याचिकाएँ दायर कीं।

इन याचिकाओं पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन की खण्डपीठ ने आज पुन सुनवाई की। सिंघवी ने बताया कि आयोग की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने कार्रवाई नहीं की, बल्कि इस मामले की सीबीआई जाँच के आदेश दिए। उन्होंने बताया कि मेडीगड्डा के पिल्लरों में दरार पड़ने के लिए कौन जिम्मेदार है, इसका खुलासा होना है।

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आयोग गठन पर पहले कोई आपत्ति नहीं

आयोग के गठन के लिए सरकारी आदेश जारी करने के समय हरीश राव ने कोई आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने कहा कि प्रजा प्रयोजन को ध्यान में रखते हुए सत्य का पता लगाने के लिए आयोग का गठन किया गया। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता क्यों भयभीत हो रहे हैं, यह उनकी समझ से परे है। आयोग की ओर से नोटिस जारी करने पर याचिकाकर्ताओं ने सवाल नहीं किया। आयोग की जाँच में सहयोग देने वाले हरीश राव द्वारा आयोग की रिपोर्ट पर सवाल उठाने का अर्थ क्या है। उन्होंने बताया कि आयोग के गठन के नियमों में ही स्पष्ट किया गया कि इस मामले के लिए जिम्मेदार कौन है, इसका पता लगाना है।

आयोग की इच्छा के अनुसार ही नोटिस जारी कर याचिकाकर्ताओं को पूछताछ के लिए बुलाया गया। नेशनल डैम सेफ्टि अथॉरिटी की रिपोर्ट में बैरेज निर्माण में खामियाँ होने का भी खुलासा किया गया है। मुख्य रूप से विशेषज्ञ समिति ने मेडीगड्डा रिजर्वायर का दौरा कर इसकी जाँच की और रिजर्वायर का निर्माण न करने के लिए स्पष्ट रूप से कहा था, जिस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री केसीआर ने ध्यान नहीं दिया और न ही इस मामले पर मंत्रिमंडल में चर्चा की। इतना ही नहीं, इस निर्माण के लिए मंत्रिमंडल की ओर से भी मंजूरी नहीं दी गई। निर्माण करने का निर्णय लेने के बाद भी इसके लिए मंत्रिमंडल की मंजूरी प्राप्त नहीं की गई। इस मामले पर मंगलवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।

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