प्रेम और रिश्तों में रखें मिठास : चंद्रप्रभजी म.सा.
हैदराबाद, प्रेम से हम परिवार और समाज तो क्या, पूरी दुनिया को वश में कर सकते हैं। हो सकता है बिना चीनी की चाय किसी को अच्छी लग सकती है, पर बिना प्रेम का जीवन तो खुद जिंदगी को ही नीरस बना देता है। जिसके घर में प्रेम का संचार नहीं, समझो वह घर नहीं श्मशान है। घर में यश और दौलत से भी ज्यादा प्रेम की जरूरत है। अगर घर में प्रेम का अभाव और तकरार है, तो आपके लाख रोकने पर भी लक्ष्मी घर से चली जाएगी, पर अगर घर में प्रेम और रिश्तों में मिठास है, तो आपके घर से गई लक्ष्मी भी वापस लौट आएगी।
उक्त उद्गार सीना बेकरी लेन स्थित विमलाचल हाईट्स परिवार द्वारा आयोजित प्रवचन कार्यक्रम के दौरान जीवन को प्रेम और क्षमा से परिपूर्ण बनाने के सूत्र विषय पर राष्ट्र संत चंद्रप्रभजी म.सा. ने व्यक्त किये। आज प्रदीप सुराणा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्र संत ने कहा कि जिओ और जीने दो प्रेम का ही विस्तार है। प्रेम इंसानियत का यह पाठ पढ़ाता है कि आप खुद भी प्रेमपूर्वक जिओ और सबको प्रेम से जीने का अधिकार दो।
प्रेम और सामूहिक प्रार्थना से जीवन में शांति
किसी का जीवन छीनने का पाप कभी मत करो। राष्ट्र संत ने कहा कि नफरत और दूरियों की बातें करने वाले लोग आतंक को बढ़ावा देते हैं, वहीं प्रेम का पैगाम देने वाले लोग अहिंसा और विश्व-शांति को जीवित करते हैं। प्रेम के अनेक रूप हैं। माता-पिता का प्रेम वात्सल्य है, पति-पत्नी का प्रेम प्यार है, वहीं जीव-जन्तुओं के प्रति प्रेम हमारी करुणा है। श्रवण कुमार ने माता-पिता को काँवड़ में बिठाकर तीर्थ यात्रा करवायी, कबूतर को बचाने के लिए मेघरथ अपनी जंघा का मांस काटकर दे या पशुओं को बचाने के लिए अरिष्टनेमि अपने विवाह का त्याग करे – ये सब प्रेम के ही दिव्य रूप हैं।
श्रवण कुमार ने कहा कि प्रेम ही हमारी प्रार्थना हो, प्रेम ही हमारा पंथ हो, जिसके जीवन में प्रेम भरा हो वही हमारा संत हो, वही हमारा ग्रन्थ हो, प्रेम ही हमारे जीवन का मंत्र हो। प्रेम को जीने के लिए बच्चों का लाड़ करें, बराबर वालों के साथ सहकारिता निभाएँ, बड़ों की सेवा का ख्याल रखें, गरीब-गुरबों की मदद करें, जीव-जन्तु और पेड़ों को संरक्षण दें, प्रेम-धर्म की हमें यही प्रेरणा है। इंसानों से प्यार कीजिए और चीजों का इस्तेमाल। बात तब बिगड़ती है, जब हम इंसानों का इस्तेमाल करने लगते हैं और चीजों से प्यार।
सामूहिक प्रार्थना करने का दूसरा मंत्र देते हुए संतप्रवर ने कहा कि अगर घर के सभी लोग सुबह उठकर सामूहिक प्रार्थना करेंगे, तो घर का आभामण्डल ठीक रहेगा। अगर हमारे जीवन या घर पर ग्रह-गोचरों का नकारात्मक प्रभाव है, तो वह भी प्रार्थना करने से दूर हो जाएगा। संतप्रवर ने उद्योगपतियों से कहा कि वह फैक्ट्री में सुबह-सुबह प्रार्थना करवाएँ। एक माह बाद चमत्कार होगा, उत्पादन दुगुना हो जाएगा और फैक्ट्री का वातावरण मधुर बन जाएगा।
प्रणाम की आदत और परिवारिक सुख-शांति
संतप्रवर ने कहा कि जिस ईश्वर ने हमें चौबीस घंटे दिए हैं, उन्हें हम चौबीस मिनट अवश्य समर्पित करें। याद रखें, पति को पत्नी का आसरा है और पत्नी को पति का, पर अंत में दोनों को अगर किसी का आसरा है तो प्रभु का है। वह सुख में हमारे साथ रहता है, पर दुःख में अपनी गोदी में उठा लेता है। संतश्री ने प्रणाम करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि एक-दूसरे को प्रणाम करने से परिवार का वातावरण आनंदमय हो जाता है।
पहले के जमाने में बेटा पचास साल तक भी बाप से अलग नहीं होता था, क्योंकि घर में प्रणाम करने की आदत थी, लेकिन आज प्रणाम न करने की आदत होने से बेटा शादी करते ही अलग हो जाता है। जब से प्रणाम करने की आदत कम हुई है, तब से परिवारों के टूटने और तलाक बढ़ने की बाढ़-सी आ गई है। जिस घर में सुबह की शुरुआत प्रणाम से होती है, वहाँ कभी कलह का वातावरण निर्मित नहीं हो सकता।
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प्रणाम, सेवा और गुस्से पर नियंत्रण का संदेश
पूज्यश्री ने कहा कि अगर आपके घर में छोटों में प्रणाम करने की आदत नहीं है, तो आप बड़प्पन दिखाकर उन्हें प्रणाम करना शुरू कर दीजिए, वह भी प्रणाम करना सीख जाएँगे। संतश्री ने कहा कि जो औरों को देता है वही देवता कहलाता है। जो गरीब और जरूरतमंद लोगों के काम आता है, उनकी सेवा करता है, भगवान उसकी झोली सदा भरता है। डॉ. मुनि शांतिप्रियसागरजी म.सा. ने कहा कि क्रोध को जीवन का हिस्सा मत बनाइए। यह एक ऐसी आग है, जो जलती तो है दूसरे को जलाने के लिए, पर अंतत: हमें ही जला बैठती है।
यह चिंगारी की तरह उठती है, पर ज्वालामुखी की तरह धधकती है। गुस्से में अगर आप नौकरी छोड़ देते हैं, तो कॅरियर बर्बाद होगा। मोबाइल तोड़ रहे हैं, तो धन बर्बाद होगा। दीवार से सिर टकरा रहे हैं, तो शरीर बर्बाद होगा और परीक्षा नहीं दे रहे हैं, तो वर्ष बर्बाद होगा। गुस्से पर नियंत्रण कीजिए। यह आपके स्वर्ग सरीखे घर को नरक बना रहा है और मधुर संबंधों में खटास घोल रहा है। गुस्सा करना दुर्भाग्य है, तो प्रेम करना सौभाग्य है। गुस्से में आपके कारण किसी की आँख में आँसू आते हैं, पर प्रेम में आपके लिए दूसरों की आँखों में आँसू आते हैं।
गुस्से पर नियंत्रण और प्रेम का महत्व
अगर आप घर में बड़े हैं, तो बड़प्पन भी रखिए। ज्यादा चीखने-चिल्लाने से घर का वातावरण कलुषित होता है। कृपया नरम लफ्जों में ठोस बात कहिए। कड़क भाषा में हल्की बात मत कीजिए। गुस्सा हथौड़ा है और प्रेम चाभी है। हथौड़ी से ताला टूटता है और चाबी से खुलता है। अपनी भाषा में प्लीज, थैंक्स और सॉरी जैसे शब्दों का पुन:पुन: प्रयोग कीजिए। इससे संबंधों में मिठास घुलेगी। नाराज होने पर किसी को सजा देने से पहले दो बार सोचिये, दूसरों से गलती होने पर माफ कर दीजिए और खुद से गलती हो, तो माफी माँगने में संकोच मत खाइये।
अगर आप किसी की एक गलती को माफ करेंगे, तो भगवान आपकी सौ गलतियों को माफ कर देगा। म.सा. ने कहा कि दिमाग को ठंडा रखिए, आँखों में शरम रखिए, दिल में रहम रखिए और जुबान को नरम रखिए। गुस्से को छोड़ने के टिप्स अपनाइए पहला हो सके तो थोड़ी देर के लिए टाल दीजिए। इससे पूर्व राष्ट्र संत चंद्रप्रभजी म.सा. और डॉ. मुनि शांतिप्रियसागरजी म.सा. का श्रद्धालुओं द्वारा भव्य स्वागत किया गया। सोमवार, 8 सितंबर को सुबह 9 से 11 बजे तक दिव्य सत्संग और प्रवचन का आयोजन सुख शांति अपार्टमेंट, फीलखाना में होगा।
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