सबके साथ मैत्रीभाव रखना ही संवत्सरी पर्व का संदेश : चन्द्रप्रभसागरजी
हैदराबाद, संवत्सरी बीते वर्ष में हुई भूलों के लिए क्षमा करने का एवं क्षमा माँगने का पर्व है। क्षमा का अर्थ है, जो बीत गया उसे जाने दो, उसे पकड़कर मत बैठो। खुद के दिल को ठेस लगी, फिर भी क्षमा कर दिया, तो समझो आपने संवत्सरी पर्व के सही अर्थ को जी लिया। छप्पन इंच का सीना उसका नहीं होता, जो रोज दण्ड-बैठक लगाता है, बल्कि उसका होता है, जो दूसरों की गलतियों को माफ करने का बड़प्पन दिखाता है। दूसरों को हम जितनी जल्दी क्षमा करेंगे, ऊपरवाला हमारी भूलों को उतनी ही जल्दी क्षमा कर देगा।
उक्त उद्गार नुमाइश मैदान में लोक कल्याणकारी चातुर्मास समिति, त्रयनगर, हैदराबाद द्वारा आयोजित प्रवचनमाला में 53वें दिन मूल कल्प सूत्र पारायण एवं संवत्सरी आलोचना विषय पर राष्ट्र संत चन्द्रप्रभसागरजी ने म.सा. ने व्यक्त किए। समिति के अध्यक्ष प्रदीप सुराणा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पूज्यश्री ने कहा कि वर्ष बीत जाने पर हम कैलेण्डर उतार देते हैं, फिर हम वर्ष बीत जाने पर किसी की कही बात को अपने दिल से क्यों नहीं उतार फेंकते। हम खुद की तो हजार गलतियाँ माफ कर देते हैं, फिर किसी दूसरे की दो चार गलतियों के कारण जीवनभर के लिए नफरत क्यों पालें। जैसे ब्लेक बोर्ड को टीचर हर रोज साफ कर देते हैं, वैसे ही हमें भी हर रात को सोने से पहले अपने भीतर के बोर्ड को साफ कर देना चाहिए।
पर्युषण संदेश: क्षमा और मंगल मैत्री का महत्व
संतप्रवर ने कहा कि तिरुपति, पालीताणा और वैष्णो देवी की हजारों सीढ्याँ चढ़कर तीर्थयात्रा बाद में कीजिए, पहले जिसके साथ बोलचाल बन्द है, उसके घर की पाँच सीढ़ियाँ चढ़कर उससे क्षमा माँग लीजिए, उसे गले लगा लीजिए, आपको घर बैठे ही तीर्थयात्रा करने का फल प्राप्त हो जाएगा। जन्मपत्री में शनि और रिश्तों में दुश्मनी कभी भी काम की नहीं होती। माना कि जिसे अभी आप बेकार समझते हैं, मुसीबत की आग लग जाने पर वही उसे बुझाने के काम आ जाए। इसलिए किसी के साथ भी वैर-विरोध मत रखिए। सबके साथ मंगल मैत्री का भाव रखना ही पर्युषण और संवत्सरी पर्व का मूलभूत संदेश है।
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नवकार मंत्र एवं तीन दिवसीय ध्यान-योग शिविर समारोह
डॉ. मुनि शांतिप्रियसागरजी म.सा. ने नवकार महामंत्र की सामूहिक प्रार्थना करवाते हुए मूल कल्प सूत्र का वाचन कराया। समारोह का शुभारंभ लाभार्थी परिवार सेठ माणकचंद नाहर के आर्शीवाद से चांदकंवर नाहर अशोक कुमार लाड़ कंवर, सुभाषचंद सरिता, राजेश कुमार सुनीता, हेमन्त कुमार सोनम, संदीप कुमार-डॉली, कुणाल-नेहा, हर्षा, हितिका, नव्य, अभिनंदन, दिव्यांश, संभव एवं समस्त नाहर परिवार कुकटपल्ली, भंवरलाल, पदमचंद, बसन्त कुमार, राजेन्द्र कुमार बाफना परिवार और मंगलचंद पवन कुमार अभिषेक नितिन पाण्ड्या परिवार (पवन मोटर्स किंग कोठी) द्वारा भगवान महावीर की मूर्ति के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
सभी का स्वागत विमल कुमार नाहर, मोतीलाल भलगट, उमेश बागरेचा, प्रदीप सुराणा, अमित मुणोत, पवन कुमार पांड्या, नवरतनमल गुंदेचा, अशोक कुमार नाहर, माणकचंद पोकरणा, विमल मुथा, शोभा देवी नाहर, शोभा रानी भलगट, दीपिका बागरेचा, आरती सुराणा, शीतल मुणोत, सूरज देवी गुंदेचा, लाड़ कंवर नाहर, ललिता पोकरणा, सविता मुथा ने किया। अशोक नाहर परिवार द्वारा श्रद्धालुओं को गुरुदेव का साहित्य उपहार में प्रदान किया गया। मंच संचालन करते हुए संयोजक नवरतनमल गुंदेचा और महामंत्री अशोक कुमार नाहर ने बताया कि ललितप्रभजी और चंद्रप्रभजी के सान्निध्य में शुक्रवार, 29 से रविवार, 31 अगस्त को सुबह 7 से 9 बजे तक तीन दिवसीय संबोधि ध्यान एवं योग शिविर का आयोजन किया जाएगा।
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