दक्षिण का खाटू धाम: हैदराबाद का श्री कांची कामकोटि पीठम् श्री श्याम मंदिर

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दक्षिण के खाटू धाम काचीगुड़ा खाटू श्याम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के 30 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इसलिए 22 अप्रैल, बुधवार को इस दिव्य एवं मंगल अवसर को भक्त श्रद्धा एवं भक्ति के साथ बाबा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए आध्यात्मिक कार्पाम का आयोजन कर रहे हैं। दक्षिण भारत के तेलंगाना राज्य की राजधानी हैदराबाद के काचीगुड़ा क्षेत्र में स्थित श्री कांची कामकोटि पीठम् श्री श्याम मंदिर भक्तों की अटूट आस्था का पेंद्र है। इस पावन स्थल को श्रद्धालु प्रेमपूर्वक दक्षिण का खाटू धाम कहते हैं।

राजस्थान के खाटू धाम में भक्त बाबा श्याम के पास अपनी मनोकामना लेकर जाते हैं और पूर्ण होने पर अपनी भक्ति और कृतज्ञता प्रकट करते हैं, ठीक उसी भावना का केन्द्र है- दक्षिण भारत का खाटू धाम, श्री श्याम मंदिर। मान्यता है कि यहाँ शीश के दानी बाबा श्याम का अद्भुत एवँ चमत्कारिक प्रभाव है, जिससे भक्त स्वत ही बारंबार बाबा के दरबार में खींचे चले आते हैं और स्वयं को बाबा के चरणों में समर्पित कर देते हैं।

हर वर्ष फाल्गुन मास में आयोजित होने वाला भव्य फाल्गुन मेला इस मंदिर की महिमा और भक्तों की आस्था का विराट दृश्य प्रस्तुत करता है। विगत दो वर्ष में फाल्गुन मास में बाबा श्याम की भव्य शोभा-यात्रा निकाली जाती है, जिसमें बाबा को नगर भ्रमण करवाया जाता है। शहर सहित अनेक क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु अपनी अर्जी, अरदास और मन्नत लेकर बाबा के दरबार में आते हैं।

बाबा श्याम की भक्ति, आस्था और मंदिर का गौरवशाली इतिहास

भक्त हाथों में बाबा का निशान लेकर भजन-कीर्तन करते हुए, समूहों में झूमते-गाते पद-यात्रा करते हुए इस धाम में पहुंचकर बाबा को निशान अर्पित करते हैं। कुछ श्रद्धालु दंडवतावस्था में मंदिर तक पहुंचते हैं। छोटी एवं बड़ी एकादशी पर लगभग 25 से 30 हजार भक्त बाबा के दर्शनार्थ आते हैं और प्रतिदिन भी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रहती है।

श्री श्याम मंदिर सेवा समिति के मंत्री श्री इंद्रकरण अग्रवाल ने मंदिर की ऐतिहासिक और पौराणिक पफष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि खाटू श्यामजी का वास्तविक नाम बर्बरीक है, जिन्हें भक्त हारे का सहारा, नीले घोड़े का सवार और शीश दानी आदि नामों से भी पुकारते हैं।

काचीगुड़ा में स्थित श्री श्याम मंदिर में बाबा श्याम की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा 22 अप्रैल, 1996 को कांची कामकोटि पीठ के परम पूज्य शंकराचार्य श्री जयेन्द्र सरस्वती स्वामी तथा परम पूज्य शंकराचार्य श्री शंकरा विजयेन्द्र सरस्वती स्वामी के करकमलों द्वारा संपन्न की गई थी।

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मंदिर की सेवा, सुविधाएं और भक्तों के लिए विशेष व्यवस्था

इस दिव्य अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में तत्कालीन राज्यपाल श्री कृष्णकांत सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। स्थापना के पश्चात मंदिर की प्रसिद्धि तीव्र गति से विस्तारित हुई। आज यह बाबा श्याम का दक्षिण भारत का सबसे बड़ा मंदिर है, जो विशेष रूप से राजस्थानी समाज की आस्था का केन्द्र है।

मंदिर परिसर में विभिन्न देवी-देवताओं के गर्भगृह हैं, जैसे- श्रीगणेश, श्रीवीरभद्र स्वामी, शिव शंकर, हनुमानजी, नवग्रह, राधा-कृष्ण, लक्ष्मीनारायण तथा माता दुर्गा आदि। इस धाम में प्रतिदिन प्रात 6:15 बजे मंगला आरती, दोपहर में भोग आरती, सायं कालीन आरती और रात्रि में शयन आरती विधिपूर्वक संपन्न की जाती है। यहां निर्बाध रूप से प्रतिदिन अन्नदान किया जाता है।

मानव सेवा के रूप में फिजियोथेरेपी सेंटर संचालित किया जाता है, जिसमें निशुल्क चिकित्सा उपलब्ध की जाती है। भजन-कीर्तन और प्रसाद के लिए विशाल वातानुकूलित कक्ष हैं। प्रसाद के रूप में बेसन की चक्की, चूरमा, लड्डू आदि भक्तों में वितरित किया जाता है। भक्त अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर विशेष प्रसादी की व्यवस्था भी करवाते हैं। यहां भक्तों के लिए लिफ्ट और व्हीलचेयर की सुविधा भी उपलब्ध है।

भव्य उत्सव, बढ़ती आस्था और मंदिर के विस्तार की योजना

मंदिर में वर्षभर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्पार्मों के भव्य आयोजन किए जाते हैं, जैसे- फाल्गुन मेला, दीपावली, कार्तिक मेला, अन्नकूट महोत्सव, शिवरात्रि, हनुमान जयंती, गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी और उगादी। प्रत्येक शुक्ल और कृष्ण पक्ष की ग्यारस को विशेष भजन संध्या और प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश के प्रतिष्ठित भजन गायक अपनी प्रस्तुतियां देते हैं।

विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं द्वारा सक्रिय रूप से सहयोग किया जाता है। बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर समिति ने 1250 गज भूमि खरीदी है, जिस पर शीघ्र ही फंक्शन हॉल, कमरे तथा स्कूटर पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी।

इस योजना को सफल बनाने हेतु इससे भक्तों को जोड़ा जा रहा है। इसके लिए 1 वर्ग गज भूमि सहयोग राशि 1.51 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इस दक्षिण खाटू धाम में भक्तों की आस्था दिनप्रतिदिन बढ़ रही है। विशेष रूप से युवाओं का इस धाम से जुड़ना कलयुग में सनातन धर्म के लिए शुभ संकेत है।

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