माइनिंग ब्लॉक ई-नीलामी में भ्रष्टाचार का संदेह जताया केटीआर ने

हैदराबाद, भारत राष्ट्र समिति (भारास) कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व मंत्री के. तारक रामाराव ने सूर्यापेट जिले के पसुपुलाबोडू, सैदुल नामा व सुल्तानपुर में माइनिंग ब्लॉक के लिए की गई ई-नीलामी प्रक्रिया में भारी भ्रष्टाचार का संदेह व्यक्त करते हुए तुरंत ही सभी टेंडर रद्द करने और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।

केटीआर ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को लिखे पत्र में संदेह जताते हुए कहा कि करीब 1,100 एकड़ रिजर्व फॉरेस्ट पर स्पष्टता नहीं है फिर भी नीलामी की गई है। उन्होंने कहा कि खनन विभाग द्वारा की गई ई-नीलामी की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं अपनाई गई है। उन्होंने कहा कि मिनरल ऑक्शन रूल्स 2015 एवं माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेग्युलेशन) एक्ट 1957 के अनुसार आवश्यक समग्र जियोलॉजिकल रिपोर्ट तक पेश नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि अवैध माइनिंग केस का सामना कर रहे दक्कन सीमेंट्स को सैदुल नामा ब्लॉक, वहीं सुल्तानपुर ब्लॉक एनसीएल इंडस्ट्रीज को आवंटित किये जाने पर संदेह है।

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केटीआर ने कहा कि यह दोनों कंपनियाँ रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में अवैध माइनिंग से संबंधित मामलों का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा कि माइन्स एंड जियोलॉजी विभाग के लीगल ऑफिसर ने इस नीलामी की सूचना को गोपनीय रखा। इसे शिकायतकर्ता को देने से इनकार किया जिससे इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) अनिवार्य होने के बावजूद नीलामी किए जाने के आरोप भी लग रहे हैं। इसके अलावा अन्य विषयों का उल्लेख पत्र में केटीआर ने किया और तुरंत ही टेंडर रद्द करने की मांग की। साथ ही सभी प्रकार की अनुमतियों के बाद ही नीलामी करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने पत्र की प्रति उप मुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्का व सरकार के मुख्य सचिव को भी भेजी।

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