निःशुल्क दी गई भूमि को पुन: अधिग्रहित करने का आदेश नहीं दिया जा सकता : हाई कोर्ट
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि बिजली आपूर्ति की शर्त पर बिजली सब-स्टेशन के निर्माण के लिए निःशुल्क दी गई भूमि को पुन अधिग्रहित करने का आदेश जारी नहीं किया जा सकता है। उच्च न्यायालय ने श्री अभिषेक स्टील्स एण्ड पॉवर लिमिटेड द्वारा भूमि के साथ मुआवजे की माँग वाली याचिका खारिज कर दी।
श्री अभिषेक स्टील्स एण्ड पॉवर लिमिटेड ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर टीएसएसपीडीसीएल को रंगारेड्डी ज़िले के मेडचल मंडल के कंड्लाकोया स्थित कारखाने के परिसर में स्थापित सब-स्टेशन को हटाने तथा भूमि सौंपने का आदेश देने की माँग की थी। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस नागेश भीमपाका ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दुम्मलापाटी श्रीनिवास ने बताया कि वर्ष 1988 में तत्कालीन एपीएसईबी को पत्र दिया गया था, जिसमें गुंड्लापोचमपल्ली स्थित इस्पात कारखाने की चार एकड़ भूमि पर सब-स्टेशन के निर्माण की अनुमति इस शर्त पर दी गई थी कि बिजली की आपूर्ति एक अलग फीडर के माध्यम से की जाएगी।
हालाँकि बिजली की आपूर्ति एक अलग फीडर लाइन के माध्यम से नहीं की गई। उन्होंने कहा कि बाजार की बिगड़ती स्थिति के कारण ऋण का भुगतान न हो पाने की वजह से कारखाना बंद हो गया और बैंक ने संपत्तियों की नीलामी कर दी थी। पहले दी गई सहमति वापस ले ली गई। जमीन का अधिग्रहण करके मुआवजा दिया जाना चाहिए।
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कारखाना या वारिस जमीन पर अधिकार नहीं जता सकते
टीएसएसपीडीसीएल की ओर से अधिवक्ता एन. श्रीधर रेड्डी ने कहा कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि कारखाने को अलग फीडर लाइन के जरिए बिजली की आपूर्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि कारखाने द्वारा दिए गए सहमति पत्र में एपीएसईबी को मालिक बताया गया और न तो कारखाना और न ही उसके वारिस उस जमीन पर कोई अधिकार जताएँगे। एकमात्र शर्त यह है कि कारखाने की सहमति के बिना जमीन नहीं बेची जानी चाहिए।
दलील सुनने के बाद न्यायाधीश ने फैसला सुनाया कि अगर मुफ्त में दी गई जमीन वापस ली जाती है, तो वह अमान्य है। अधिकारों और मुआवजे से संबंधित किसी भी विवाद का निपटारा सिविल कोर्ट में किया जाना चाहिए और अनुच्छेद-226 के तहत उच्च न्यायालय इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता। न्यायाधीश ने याचिका खारिज करते हुए आदेश जारी किए। श्री अभिषेक स्टील्स एण्ड पॉवर लिमिटेड द्वारा दायर एक और याचिका, जिसमें उन्होंने टीएसएसपीडीसीएल द्वारा श्रीनगर कॉलोनी स्थित उनके फ्लैट की बिजली आपूर्ति काटने के नोटिस को चुनौती दी गई थी, इसे भी खारिज कर दिया गया।
याचिका में कहा गया था कि यदि 1.28 करोड़ रुपये का बिजली बिल और अधिभार नहीं चुकाया गया तो बिजली काट दी जाएगी। याचिका को इस आधार पर खारिज किया गया कि बैंक द्वारा आयोजित नीलामी में किसी अन्य व्यक्ति ने इस कारखाने पर कब्जा कर लिया था और नया कनेक्शन प्राप्त कर लिया था, इसीलिए पूर्व मालिक को बकाया राशि का भुगतान करना होगा।
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