मैक्रों की भारत यात्रा : दोस्ती की नई मिसाल

कहना गलत न होगा कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों की तीन दिवसीय यात्रा न सिर्फ दोनों देशों के बीच पुरानी दोस्ती को मजबूत कर रही है, बल्कि दुनिया के बदलते हालात में एक नई उम्मीद की किरण भी बन रही है। यह दौरा उपलब्धियों से भरा हुआ है और इसका संदेश साफ है – भारत और फ्रांस मिलकर वैश्विक स्थिरता और प्रगति के लिए काम करेंगे।

सयाने याद दिला रहे हैं कि राष्ट्रपति मैक्रों की यह चौथी भारत यात्रा है और इस बार मुंबई से दिल्ली तक का सफर दोनों देशों के रिश्तों को स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के स्तर पर ले गया है। यानी, अब हमारी दोस्ती सिर्फ पुरानी नहीं, बल्कि और मजबूत और गहरी हो गई है। मुंबई में दोनों देशों ने 21 बड़े समझौतों पर सहमति जताई, जो रक्षा, तकनीक, इनोवेशन, स्टार्टअप्स, क्रिटिकल मिनरल्स, स्वास्थ्य और स्किलिंग जैसे क्षेत्रों में हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत-फ्रांस इनोवेशन सहयोग

मिसाल के तौर पर, रक्षा क्षेत्र में राफेल जेट्स से लेकर सबमरीन और हेलीकॉप्टर तक की जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग पर बात हुई। यहाँ तक कि हैमर मिसाइल जैसी एडवांस्ड तकनीक भी शामिल है। यह सब भारत की मेक इन इंडिया मुहिम को बड़ा बूस्ट देगा और हमारे सैनिकों को और ताकतवर बनाएगा। गौरतलब है कि राष्ट्रपति मैक्रों और प्रधानमंत्री मोदी ने इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026 का भी उद्घाटन किया।

इसका मतलब है कि अगले साल दोनों देश मिलकर नए आइडियाज पर काम करेंगे – चाहे वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हो, क्लीन एनर्जी हो या स्पेस टेक्नोलॉजी। मैक्रों ने दिल्ली में एआई इंपैक्ट समिट 2026 में भी हिस्सा लिया, जहाँ एआई के फायदे और चुनौतियों पर चर्चा हुई। यह समिट भारत को एआई का ग्लोबल हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इसके अलावा, क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम और कोबाल्ट पर सहयोग से हमारी इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री को फायदा मिलेगा और क्लाइमेट चेंज से लड़ने में मदद होगी।

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फ्रांसीसी विशेषज्ञों से युवाओं को स्किल ट्रेनिंग

स्वास्थ्य और स्किलिंग के क्षेत्र में भी अच्छी खबरें हैं। दोनों देश मिलकर हेल्थकेयर में इनोवेशन लाएँगे – जैसे कि नई दवाएँ और मेडिकल टेक्नोलॉजी। साथ ही, युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू होंगे, जहाँ फ्रांस के एक्सपर्ट्स भारतीय युवाओं को ट्रेनिंग देंगे। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का फैसला भी बेहद अहम है, क्योंकि यह क्षेत्र आजकल वैश्विक तनाव का केंद्र है। दोनों देश मिलकर यहाँ शांति और स्थिरता के लिए काम करेंगे।

दरअसल, राष्ट्रपति मैक्रों का यह कहना प्रकारांतर से दुनिया भर के लिए एक संदेश है कि भारत फ्रांस का सबसे भरोसेमंद पार्टनर है और दुनिया के बदलते हालात में हमारी दोस्ती उल्लेखनीय तेजी से बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे और आगे बढ़ाते हुए कहा कि हमारी दोस्ती की कोई सीमा नहीं है – गहरे समुद्रों से लेकर ऊँचे पहाड़ों तक! संदेश साफ है कि अनिश्चित वैश्विक माहौल में भारत और फ्रांस मिलकर स्थिरता लाने के लिए संकल्पित हैं। यूक्रेन संकट हो या मिडिल ईस्ट की अशांति – दोनों देश ग्लोबल प्रोग्रेस के लिए साथ खड़े हैं। मैक्रों की यात्रा का एक और संदेश है इनोवेशन का – 2026 को इनोवेशन ईयर बनाने से युवाओं को प्रेरणा मिलेगी कि नए आइडियाज से दुनिया बदली जा सकती है।

अंतत, यह दौरा सिर्फ सरकारी समझौतों तक सीमित नहीं है। मैक्रों के साथ आए बिजनेस लीडरों, स्टार्टअपों और रिसर्चरों के साथ संवाद से दोनों देशों के लोगों के बीच कनेक्शन बढ़ेगा। जैसे कि फ्रांस के कल्चरल इवेंट्स 2028 तक भारत में होंगे, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ेगा। कुल मिलाकर, यह यात्रा भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करती है। हम एक उभरती हुई ताकत हैं और फ्रांस जैसा पुराना दोस्त हमारे साथ है तो हमारी रफ्तार और तेज होगी।

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