उच्च न्यायालयों को प्रतिमाह दो शनिवार को खोलने के प्रस्ताव का विरोध

प्रयागराज, इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (एचसीबीए) ने देशभर के विभिन्न बार एसोसिएशनों को पत्र लिखकर उनसे प्रतिमाह दो शनिवार को उच्च न्यायालयों को खोलने के प्रस्ताव का सामूहिक रूप से विरोध करने का आग्रह किया है।

इस पत्र में बार एसोसिएशन ने वकीलों, न्यायाधीशों और अदालत के कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यदिवसों के प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता जताई है। साथ ही, इस धारणा पर भी सवाल उठाया है कि अदालतों के अधिक समय तक संचालित होने से लंबित मामलों में अपने आप कमी आ जाएगी। इसने कहा कि यह प्रस्ताव सतही तौर पर आकर्षक लग सकता है, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम न्याय की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं।

पत्र में दलील दी गई है कि हर महीने दो शनिवार को अदालतें खोलने से अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों पर शारीरिक एवं मानसिक दबाव बढ़ेगा, क्योंकि अदालतों का समय सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक निर्धारित है, लेकिन अधिवक्ताओं का काम देर तक रहता है।

देशभर के बार एसोसिएशनों से अपील की

पत्र में कहा गया है कि सप्ताहांत के दिन अक्सर अधिवक्ता जटिल मामलों की तैयारी, दलीलों का मसौदा तैयार करने और कानूनी अध्ययन में लगाते हैं। जटिल और समय-साध्य मामलों पर सामान्यतः शनिवार और रविवार को ही गहन रूप से काम किया जाता है। वास्तव में, ये दोनों दिन अधिवक्ताओं के लिए सबसे व्यस्त माने जाते हैं।

बार एसोसिएशन ने यह भी कहा कि न्यायाधीश सप्ताहांत का उपयोग निर्णय लिखने और आरक्षित मामलों का निपटारा करने में करते हैं, ऐसे में अतिरिक्त कार्यदिवस लागू होने से उन पर भी कार्यभार का दबाव बढ़ेगा। एसोसिएशन ने 27 जनवरी 2026 को भेजे गए पत्र में देशभर के बार एसोसिएशनों से अपील की है कि वे इसके विरोध में प्रस्ताव पारित करें और उसे उच्चतम न्यायालय, सभी उच्च न्यायालयों तथा केंद्रीय कानून मंत्री को भेजें।

उच्च न्यायालयों में प्रतिमाह दो शनिवार को बैठने के प्रस्ताव ने हाल के महीनों में जोर पकड़ा है। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी इसी तर्ज पर एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। (भाषा )

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