शिक्षक योग्यता एवं चयन प्रक्रिया को कड़ा करने की सिफारिश
हैदराबाद, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी स्कूली शिक्षा में सुधार को लेकर मुखर होकर बोलते रहे हैं। इसी बीच खबर है कि सरकार स्कूली शिक्षकों की योग्यता बढ़ाने के प्रस्ताव पर गंभीरता के साथ विचार कर रही है। तेलंगाना शिक्षा आयोग ने सरकार को सामान्य शिक्षकों के लिए एलीमेंटरी एजुकेशन डिप्लोमा (डीईएलएड) को समाप्त करने की सिफारिश की है। साथ ही चयन परीक्षाओं को कठोर बनाने का प्रस्ताव पेश किया गया है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, तेलंगाना शिक्षा आयोग ने सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की गुणवत्ता और योग्यता बढ़ाने के उद्देश्य से व्यापक सुधारों का प्रस्ताव दिया है। आयोग ने रिपोर्ट में फिनलैंड, जापान, दक्षिण कोरिया, अमेरिका, वियतनाम, कनाडा जैसे देशों की शिक्षा प्रणालियों से प्रेरणा लेते हुए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें प्रस्तुत की गयी हैं। विशेष रूप से आयोग ने रिपोर्ट में डिप्लोमा इन एलीमेंटरी एजुकेशन पाठ्यक्रम को समाप्त करने का सुझाव दिया। आयोग ने उल्लेख किया कि कई बीएड स्नातक केवल सेकेंडरी ग्रेड टीचर्स के रूप में पात्रता प्राप्त करने हेतु यह कोर्स कर रहे हैं। इसके स्थान पर चरण आधारित डिग्री व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव रखा गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि नर्सरी से कक्षा 5 तक के लिए प्राथमिक बीएड और कक्षा 6 से 12 तक के लिए माध्यमिक बीएड प्रशिक्षण कार्यक्रम पेश किया जाएगा, जिसमें 150 दिनों का विस्तृत व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल होगा। आयोग ने कक्षा 9 से 12 तक के लिए माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और इंटरमीडिएट शिक्षा बोर्ड को एकीकृत कर एक ही निकाय बनाने का सुझाव दिया है। आयोग का मानना है कि इन सुधारों का उद्देश्य शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार लाना और तेलंगाना के विद्यालयों में विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों को सुदृढ़ करना है।
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सरकारी-निजी स्कूलों में टेट परीक्षा अनिवार्य करने का प्रस्ताव
आयोग ने शिक्षक भर्ती के लिए योग्यता परीक्षा टेट को सरकारी और निजी विद्यालयों में अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है। टेट और अंतिम चयन परीक्षा में अंग्रेजी दक्षता का एक प्रश्न-पत्र शामिल करने की सिफारिश की गई है। शिक्षकों के लिए स्वत पदोन्नति की व्यवस्था समाप्त करने तथा निरंतर व्यावसायिक विकास के लिए सेवा-कालीन शिक्षा शुरू करने की अनुशंसा की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षकों का हर पाँच वर्ष में विस्तृत मूल्यांकन कर उनकी प्रगति पर आधारित रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए। नए नियुक्त शिक्षक दो वर्षों के भीतर यदि अपेक्षित प्रगति नहीं दिखा पाते हैं, उन्हें सेवा से हटाने का प्रावधान सुझाया गया है।
सरकार को सौंपी गयी आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि शीर्ष प्रदर्शन करने वाले देशों में शिक्षण को एक विशिष्ट और प्रतिष्ठित पेशा माना जाता है, जहाँ श्रेष्ठ शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवारों का चयन कठोर परीक्षाओं, साक्षात्कारों और मूल्यांकन प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाता है। फिनलैंड में शिक्षक के लिए मास्टर डिग्री के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण अनिवार्य है, दक्षिण कोरिया में स्नातक डिग्री के साथ राष्ट्रीय परीक्षा, जापान में स्नातक डिग्री और प्रमाणन, जबकि अमेरिका और वियतनाम में लाइसेंस या परीक्षा उत्तीर्ण करने के साथ स्नातक डिग्री अनिवार्य है।
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