2026 में तेज होंगे सुधार, पीएम मोदी ने बताया एजेंडा

नई दिल्ली, नए साल से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को आश्वस्त किया है कि उनकी सरकार ‘ईज ऑफ लिविंग’ यानी लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए और भी जोर-शोर से काम करेगी। शुक्रवार को उन्होंने बताया कि इस साल सरकार ने टैक्स कानूनों को सरल बनाया, विवादों को सुलझाने की प्रक्रिया तेज की, मजदूरों के लिए नए नियम लाए और अनुपालन को आसान बनाया गया। शनिवार और रविवार को प्रधानमंत्री राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पांचवें राष्ट्रीय मुख्य सचिव सम्मेलन बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

शुक्रवार को सुधारों को लेकर किए गए सिलसिलेवार पोस्ट को शेयर करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार आने वाले समय में और अधिक जोश के साथ काम करेगी। उन्होंने कहा, ‘हमारी सरकार ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और यह थ्रेड उन उदाहरणों को दिखाता है कि हमने इस दिशा में कैसे काम किया है। आने वाले समय में हमारे सुधारों का सिलसिला और भी तेजी से जारी रहेगा।’

इस साल किए गए बड़े बदलाव

पीएम मोदी द्वारा टैग किए गए MyGovIndia के अकाउंट पर कहा गया, सुधारों की असली कसौटी यह है कि क्या वे लोगों का तनाव कम करते हैं। इस साल शासन में एक बड़ा बदलाव आया, जहां सुधारों का ध्यान नतीजों पर रहा, न कि मुश्किलों पर। आसान टैक्स कानून, विवादों का तेजी से निपटारा, आधुनिक श्रम संहिताएं और गैर-आपराधिक अनुपालन ने नागरिकों और व्यवसायों दोनों के लिए मुश्किलें कम कीं। इन सुधारों का मकसद भरोसा, पूर्वानुमान और लंबी अवधि की वृद्धि रहा, जिससे यह पता चला कि कैसे अच्छी नीतियां रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बना सकती हैं।

12 लाख तक की आय टैक्स फ्री

सरकार द्वारा बताया गया कि करदाताओं के लिए बड़ी राहत देते हुए अब 12 लाख रुपये तक की आय पर शून्य कर लागू किया गया है। इससे मध्यम वर्ग को अपनी कमाई बचाने, खर्च करने और निवेश करने में अधिक स्वतंत्रता मिली है। आयकर अधिनियम, 2025 के जरिए कर अनुपालन को सरल, पारदर्शी और करदाता-अनुकूल बनाया गया है।

छोटे व्यवसाय अब लाभ खोने के डर के बिना बढ़ सकते हैं। निवेश और टर्नओवर की बढ़ी हुई सीमाएं MSMEs को विस्तार करने की अनुमति देती हैं, साथ ही उन्हें ऋण और टैक्स छूट का लाभ भी मिलता रहता है। इससे व्यवसायों को बड़ा होने, अधिक लोगों को नौकरी देने और मजबूत स्थानीय उद्यम बनाने को बढ़ावा मिलता है।

ग्रामीण रोजगार योजनाओं में विस्तार के साथ गांवों में बुनियादी ढांचे के निर्माण पर जोर दिया गया है। इससे मजदूरी के साथ-साथ स्थायी संपत्तियों का सृजन हो रहा है, जो ग्रामीण आजीविका को मजबूत करेगा। सरकार का कहना है कि अब श्रमिकों को दर्जनों कानूनों से जूझना नहीं पड़ेगा, क्योंकि 29 श्रम कानूनों को चार स्पष्ट संहिताओं में सरल बनाया गया है। जिनमें मजदूरी, सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा शामिल हैं।

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