स्वयं को देखना है आत्म-निरीक्षण

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आत्म-निरीक्षण का मतलब स्वयं की जांच करना है। हम हर रोज़ अपने विचारों, वचनों और कार्यों का निरीक्षण करने से यह जान सकते हैं कि हम कहाँ खड़े हैं? हम पाएंगे कि हमारी आत्मा पर अनेक दाग़ हैं जिन्हें हमें साफ करना है। हमारे मन में चौबीसों घंटे उल्टे विचार आते रहते हैं जिससे हम दिनभर उल्टे वचन और कार्य करते हैं। ये हमारी हर क्षेत्र की प्रगति में सबसे बड़ी रूकावट है। क्रोध, झूठ, वासना, लालच और अहम यह सभी अवगुण हमारे मन में हर समय आंधी की तरह चलते रहते हैं।

यदि हम इन नकारात्मक विचारों को नियंत्रण में ला सकें तो हमारा मन स्थिर और शांत हो जाएगा। इन अवगुणों को दूर करने का पहला कदम है- अपनी कमजोरियों का अहसास होना। हम अपने विचारों, वचनों और कार्यों पर नज़र रखेंगे और उन पर नियंत्रण रखने की कोशिश करेंगे। जिस प्रकार हम अध्यापक के पास जाते हैं तो उनसे कुछ पढ़ने से पहले वे हमारी बुद्धिमता की जांच करते हैं।

गुरु और ध्यान से अवगुणों पर विजय पाकर जीवन में शांति पाएँ

ठीक उसी प्रकार जब हम किसी पूर्ण गुरु के पास जाते हैं तो वे हमारे मन के अवगुणों को भांप लेते हैं और उनको दूर करने के उपाय बताते हैं। जिससे हम अपने आपको शीशे में देखते हैं और अपनी त्रुटियों को दूर करके धीरे-धीरे उन पर विजय प्राप्त करते हैं। हमें यह समीक्षा स्वयं को कोसने के लिए नहीं बल्कि स्वयं को बेहतर बनाने के लिए करनी चाहिए।

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संत राजिन्दर सिंह महाराज

यह निराशा और निरादर का कारण नहीं बननी चाहिए, बल्कि जहाँ-जहाँ हम कमजोर हैं, वहाँ हम बेहतर बनकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होते हैं। ध्यान-अभ्यास के द्वारा हम सद्गुणों के संपर्क में आते हैं जिससे हमारे अवगुणों के सुधार की प्रक्रिया और तेज हो जाती है। प्रभु की निर्मल करने वाली प्रेम की धारा हमारे अवगुणों को हटाने में सहायक होती है। इस प्रकार हमारा जीवन संपूर्ण शांति, आनंद और प्रेम से भर जाता है।

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