भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाले श्री बाबा गंगाराम

भारत की भूमि देवताओं की क्रीड़ा-स्थली है। यहाँ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, लीलाधारी श्रीकृष्ण, महात्मा बुद्ध एवं महावीर स्वामी जैसे महापुरुषों ने जन्म लिया। गीता के श्लोक यदा यदाहि धर्मस्य…. के अनुसार जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतार लेते हैं। राजस्थान के झुंझुनूं नगर में सन् 1895 में ऐसे ही एक अवतारी दिव्यात्मा बाबा गंगाराम ने जन्म लिया, जिन्हें आज विष्णु अवतारी बाबा गंगाराम के नाम से लोग पूज रहे हैं। सीकर-लोहारु राजमार्ग पर अवस्थित है- बाबा का पावन धाम श्री पंचदेव मंदिर।

इस देव स्थान के प्रति लोगों की श्रद्धा प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। देश के कोने-कोने से भक्तगण बाबा के दरबार में आते है और अपनी श्रद्धा व भक्ति से बाबा की आराधना करते हैं। यह भक्तों की श्रद्धा व विश्वास का ही फल है कि उनकी सभी मनोकामनाएँ बाबा के दरबार में अवश्य पूरी होती हैं। बाबा की चित्ताकर्षक प्रतिमा के दर्शन से ही श्रद्धालुओं के आंतरिक क्लेष स्वत ही नष्ट हो जाते हैं। उनकी दिव्यानुभूति से जीवन में नई शक्ति का संचार होता है, जिसे अनुभव करके ही जाना जा सकता है।

प्राकृतिक हरीतिमा से आच्छादित मनोहारी वातावरण एवं मंदिर के आध्यात्मिक परिवेश में प्रवेश करते ही मन में एक दिव्य आनंद की अनुभूति होती है। मंदिर की संरचना एवं बाबा के श्रीविग्रह की प्रतिष्ठा दैव-कृपा से इस प्रकार बन पड़ी है कि सूर्योदय की प्रथम किरण बाबा की चरण-वंदना करती प्रतीत होती है। यह मंदिर अल्पकाल में ही लोगों की अपार आस्था का केन्द्र बिंदू है। नगरीय कोलाहल से दूर सुरम्य एवं शांतिमय वातावरण में स्थित मंदिर के तीन उन्नत आकर्षक शिखर कलश दूर से ही दिखाई देते हैं।

पंचदेवों की दिव्य उपस्थिति से ओतप्रोत यह मंदिर

इन पर विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां उकेरी गई हैं। मंदिर के शिखर पर फहराताधर्म-ध्वज ऐसा आभास देता है मानो सारे विश्व में शांति का संदेश फैला रहा हो। अभीष्ट फलदाता सत्यनारायण स्वरूप बाबा की प्रतिमा के दर्शन होते ही कदम स्वयं गर्भगृह की ओर बढ़ने लगते हैं। मुख्य गर्भगृह की बायीं ओर निर्मित दो अलग-अलग गर्भगृहों में मां दुर्गा व आंजनेय हनुमान की विशाल प्रतिमाएं स्थापित हैं। इसी प्रकार दाहिनी ओर पद्मासन पर धन की दात्री देवी लक्ष्मी की प्रतिमा है।

अन्य गर्भगृह में त्रिदेवों के देव भगवान शंकर का लिंग स्थापित है, जिसके साथ ही शिव परिवार की मूर्तियाँ हैं। सभी देव प्रतिमाएं सफेद संगमरमर से निर्मित हैं और कला की उत्कृष्ट कृत्तियां हैं। इस प्रकार इन पाँच देव मंदिरों के कारण ही इस मंदिर का नाम पंचदेव मंदिर पड़ा। इस देव-स्थान का निर्माण बाबा के परम आराधक भक्त शिरोमणि श्रीदेवकीनंदन ने बाबा के स्वप्नादेश के पश्चात् कराया था।

तत्कालीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निरंजनदेव तीर्थपुरी के सान्निध्य में गंगादशहरा वि.स. 2032 के पावन दिन मंदिर का प्रतिष्ठा समारोह पूर्ण वैदिक विधि से संपन्न हुआ था। मंदिर सभागार के ऊपर दक्षिण भारतीय शैली में गोपुरम बना हुआ है, जिसमें भगवान विष्णु की विशाल प्रतिमा गरूड़ पर विराजमान है। दोनों ओर भगवान के पार्षद जय-विजय की मूर्तियाँ हैं। भगवान के आयुध शंख और पा मूर्ति रूप में दायें-बायें उपस्थित हैं। मंदिर की बाहरी दीवारों पर बने भित्तिचित्र बाबा की लीलाओं को प्रदर्शित करते हैं। इस विशाल मंदिर का कलात्मक शिल्प, मनोहारी दृश्य एवं आध्यात्मिक वातावरण ब्रह्मानंद की अनुभूति कराता है।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button