बाबा गंगाराम का पावन धाम श्रीपंचदेव मंदिर

बाबा की आज्ञा पाकर भक्त देवकीनंदन का रोम-रोम आनंद से पुलकित हो उठा। भक्तिमति परमसाध्वी गायत्री देवी ने यथोचित्त वाणी में यही कहा- शुभ कार्य में देर क्यों? यह विचारकर वे अपने सांसारिक कार्यों को छोड़कर बाबा के पावन धाम के शिलान्यास हेतु कलकत्ता से झुंझुनूं पधारे। झुंझुनूं विलुप्त सरस्वती नदी के भू-भाग में स्थित है। संवत् 2031 में ज्येष्ठ शुक्ल दशमी गंगादशहरा वे समारोहपूर्वक वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर का शिलान्यास संपन्न कराया।

मंदिर के प्रथम शिलाखंड को स्वयं भगवान शेष ने मानो अपने फन उठाकर धारण किया। मरूभूमि का कण-कण बाबा के दिव्य तेज को अपने में समाहित करता हुआ, आलोकित हो उठा। मंदिर का निर्माण शीघ्रातिशीघ्र हो, ऐसी उनकी इच्छा थी। उन्होंने उसी अवसर पर ठीक एक वर्ष पश्चात् मंदिर के शुभ उद्घाटन की उद्घोषणा की। इसी के साथ वह इस बात से चिंतित हो गए कि भव्य मंदिर का निर्माण अल्प समय में हो पाएगा? महापुरुषों को सत्कार्यों के मार्ग स्वत ही प्राप्त हो जाते हैं।

देखते ही देखते मंदिर का विशाल भवन बन गया। ज्यों-ज्यों मंदिर की शिखा उठ रही थी, त्यों-त्यों इसकी ख्याति फैलने लगी।
शुभकार्यों में अवरोध आया ही करते हैं। भीषण झंझावतों और संकटों को उन्होंने प्रभु का प्रसाद माना। मृदुभाषी भक्त देवकीनंदन ने हर परिस्थिति का सामना किया। उन्हें दया, करूणा, स्नेह और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति गायत्रीदेवी संबल प्रदान करती थीं। संवत् 2032 की ज्येष्ठ शुक्ल दशमी गंगादशहरा का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।

बाबा गंगाराम : मरूधर में लोक-आस्था और भक्ति का केंद्र

भक्त देवकीनंदन के विश्वास एवं समर्पण से गंगाराम नाम रूपी गंगा का भूतल पर अवतरण हुआ। बाबा गंगाराम के दिव्य श्रीविग्रह सहित शिव् -परिवार, देवी दुर्गा, महालक्ष्मी व वीर हनुमान के श्रीविग्रहों का प्राण-प्रतिष्ठा समारोह संपन्न हुआ। बाबा गंगाराम का पावन धाम श्रीपंचदेव मंदिर जन-कल्याण और बाबा की सगुण उपासना के केन्द्र के रूप में शांति का अग्रदूत बन गया। विष्णु का अवतार हुआ, मरूधर की किस्मत जागी। कुंभ स्नान करे मरूधर में, रागी और अनुरागी।।

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मंदिर स्थापना के पश्चात् बाबा गंगाराम के प्रति लोक-आस्था में निरंतर अभिवृद्धि होती गई। भक्ति की उत्कृष्ट परंपरा का प्रतीक श्रीपंचदेव मंदिर जन-जन की सांसारिक समृद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नयन का केन्द्र बन गया। बाबा गंगाराम के दिव्य स्वप्नादेश एवं श्रीपंचदेव मंदिर के निर्माण की गौरवगाथा सर्वविदित है। बाबा का अलौकिक तेज धीरे-धीरे फैलने लगा। भक्त देवकीनंदन ने स्वयं को भगवान विष्णु के चरणों में समर्पित कर दिया। स्वप्नादेश के आधार पर मंदिर का निर्माण हो गया। भक्त देवकीनंदन ने अपने आपको भगवान विष्णु के चरणों में समर्पित कर दिया।

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