सॉफ्टबैंक वर्ष के अंत तक ओपनएआई को 22.5 अरब डॉलर देने की दौड़ में
हैदराबाद, जापान की बहुराष्ट्रीय कंपनी सॉफ्टबैंक समूह वर्ष के अंत तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंपनी ओपनएआई को किए गए 22.5 अरब डॉलर के निवेश वादे को पूरा करने के लिए तेज़ी से धन जुटाने में लगी है। सूत्रों के अनुसार, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सॉफ्टबैंक अपनी कई संपत्तियों की बिक्री, नकद भंडार के उपयोग और कर्ज के विभिन्न विकल्पों पर काम कर रही है। यह निवेश सॉफ्टबैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मासायोशी सोन की अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कृत्रिम बुद्धिमत्ता रणनीति मानी जा रही है, जिसके जरिए वह वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं।
धन जुटाने के लिए सॉफ्टबैंक ने पहले ही कई बड़े कदम उठाए हैं। कंपनी ने एआई चिप क्षेत्र की अग्रणी कंपनी में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी, दूरसंचार क्षेत्र में निवेश घटाया और खर्चों में कटौती करते हुए कर्मचारियों की संख्या कम की है। इसके साथ ही सॉफ्टबैंक के विज़न फंड के तहत नए सौदों की रफ्तार काफी धीमी कर दी गई है और अब बड़े निवेशों पर सीधे मासायोशी सोन की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है। कंपनी अपने भुगतान मंच से जुड़ी इकाई को शेयर बाज़ार में लाने की भी तैयारी कर रही है, जिससे बड़े पैमाने पर पूंजी जुटाई जा सके।
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वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में बढ़ती लागत और दबाव
सूत्रों का कहना है कि सॉफ्टबैंक के पास अभी भी कई वित्तीय विकल्प मौजूद हैं, जिनमें शेयर गिरवी रखकर लिए गए ऋण, बैलेंस शीट में मौजूद नकदी, सूचीबद्ध कंपनियों में हिस्सेदारी और कॉरपोरेट बॉन्ड शामिल हैं। विशेष रूप से ब्रिटिश सेमीकंडक्टर कंपनी में हिस्सेदारी के बदले लिए गए ऋण सॉफ्टबैंक के लिए बड़ा सहारा बने हुए हैं, क्योंकि उस कंपनी के शेयर मूल्य में हाल के महीनों में भारी वृद्धि हुई है। इसके अलावा, सॉफ्टबैंक चीन की एक प्रमुख राइड सेवा कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है।
यह निवेश ओपनएआई के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ओपनएआई और सॉफ्टबैंक दोनों एक विशाल परियोजना में भागीदार हैं, जिसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए अत्याधुनिक डेटा केंद्रों का निर्माण करना है। इन केंद्रों पर सैकड़ों अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है। ओपनएआई को यह धन अपने उन्नत एआई मॉडलों के प्रशिक्षण और संचालन की बढ़ती लागत को पूरा करने के लिए चाहिए, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है। कंपनी के प्रमुख ने हाल ही में कर्मचारियों से कहा है कि ओपनएआई अब एक अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां उसे अपने प्रमुख उत्पादों को और बेहतर बनाना होगा।
कुल मिलाकर, सॉफ्टबैंक की यह धन जुटाने की होड़ यह दिखाती है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में आगे रहने की होड़ कितनी महंगी और चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये भारी निवेश अपेक्षित लाभ नहीं दे पाए, तो भविष्य में वैश्विक स्तर पर एआई क्षेत्र में अस्थिरता भी देखने को मिल सकती है, लेकिन फिलहाल सॉफ्टबैंक और ओपनएआई दोनों इस दौड़ में पूरी ताकत झोंक चुके हैं।
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