सोनू सूद : सेवा ही सच्ची सफलता है

जीतो कनेक्ट में सोनू सूद ने बताया मदद का महत्व

हैदराबाद, जैन इंटरनेशनल ट्रेड आर्गनाइजेशन (जीतो) के तत्वावधान में एचआईसीसी में भव्य रूप से आयोजित आईआईएफएल कैपिटल जीतो कनेक्ट-2025 का आज दूसरा दिन विभिन्न प्रकार के सत्रों तथा गतिविधियों के नाम रहा।

जीतो कनेक्ट के तहत आयोजित आज के कार्यक्रमों की कड़ी में गिविंग इज ग्रोइंग विषयक परिचर्चा सत्र का आयोजन किया गया जिसका संचालन जाने-माने अभिनेता तथा परोपकारी सोनू सूद ने करते हुए कहा कि मदद द्वारा किसी के चेहरे पर आई मुस्कान किसी फिल्म की बॉक्स ऑफिस पर की गई करोड़ों की कमाई से अधिक मूल्यवान होती है।

सोनू सूद ने कहा कि बचपन से ही सेवा की सीख देनी चाहिए। आज वे जिस मुकाम पर हैं, उसका कारण बचपन से अपने माता-पिता को देखकर उत्पन्न हुआ सेवाभाव है कि जरूरतमंदों की सेवा के लिए हमें हमेशा तत्पर रहना चाहिए।

गिविंग इज ग्रोइंग विषयक सत्र में सोनू सूद के साथ पगारिया ग्रुप के चेयरमैन उज्वल पगारिया, ईटीए ग्रुप ऑफ कंपनीज के गौतम जैन चोरड़िया, नाहर ग्रुप के फाउंडर चेयरमैन सुखराज नाहर, प्रमोटर आथम इनवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्टक्चर लिमिटेड के संजय डांगी ने विचार रखते हुए इस बात पर सहमति जताई कि देने की भावना न केवल हमारे समाज को मजबूत बनाती है, बल्कि यह हमारे व्यक्तिगत विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

परसेवा ही सबसे बड़ी पूंजी: वक्ताओं के अनुभव

देने की भावना हमें आत्मकेंद्रितता से बाहर निकालकर दूसरों की जरूरतों को समझने और उनकी मदद करने के लिए प्रेरित करती है। देने की कला जीवन की सबसे बड़ी साधना है। इसलिए देना ही बढ़ना है, इस मंत्र को सभी को आत्मसात करना चाहिए। गौतम जैन चोरड़िया ने लंबे समय से अपने द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान देने के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि मानवता की सेवा से बढ़कर संतोषजनक और कुछ नहीं है।

किसी भी जरूरतमंद की सेवा करने का सीधा अर्थ भगवान की सेवा करना होता है। उन्होंने कहा पैसों से सब कुछ खरीदा जा सकता है, लेकिन आशीर्वाद तथा दुवाओं की कमाई केवल परसेवा से की जा सकती है। यही वह कमाई है, जो हमारे इस जीवन के बाद काम आती है। धन का सदुपयोग अगले जीवन का खाता भी सुधरता है। इसी क्रम में सुखराज नाहर ने कहा निस्वार्थ सेवा से की गई सेवा से उन्नति तथा समृद्धि के नए-नए मार्ग खुलते जाते हैं। मानव की सेवा ईश्वर द्वारा दिया गया एक उत्तरदायित्व है, जिसका निर्वाह हर एक समर्थ व्यक्ति को करना चाहिए।

सेवा ही सच्ची पहचान है: सोनू सूद का भावुक संदेश

उज्वल पगारिया ने कहा कि अपरिग्रह और सेवा जैन धर्म के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। धन को केवल अपने परिवार तक सीमित न रखकर समाज में जरूरतमंदों के लिए भी प्रयुक्त करना चाहिए। इससे स्वयं के साथ-साथ हमारे समाज की भी सशक्तिकरण होगा। उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी को भी इन आदर्शों से परिचित कराना चाहिए। अन्य वक्ताओं ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि देने से ही समाज और व्यापार बढ़ता है। जब हम दूसरों को देते हैं, तो इससे हमारे सामाजिक संबंध भी मजबूत होते हैं। इसलिए हम सभी देने की भावना को अपने जीवन में अपनाएं और समाज को एक बेहतर स्थान बनाने में योगदान दें।

अवसर पर सोनू सूद ने भी अपने सेवा से जुड़े अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि वास्तविक जीवन में लाइट और कैमरा नहीं, केवल ऐक्शन होता है। इसलिए हमें जरूरतमंदों के प्रति सहानुभूति अपनाते हुए देने की भावना को अपनाना चाहिए। जरूरतमंद की आधी समस्या केवल भावनात्मक आश्वासन से ही समाप्त हो जाती है। हालांकि जब हम इस क्षेत्र में कदम रखते हैं, तो विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इनसे विचलित हुए बिना हमें अपने समाज को देने के गुण को लेकर आगे बढ़ते रहना चाहिए।

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सोनू सूद ने कहा कि मेरी मां कहती थी कि रास्ते में स्पीड ब्रेकर आने का अर्थ होता है कि हम सही दिशा में अग्रसर हैं। जीतो द्वारा दी जा रही सेवाओं की सराहना करते हुए सोनू सूद ने कहा कि हालांकि मुझे नाम और पहचान फिल्म इंडस्ट्री से मिली, लेकिन इस पहचान के सही मायने आम आदमी की सेवा से जुड़कर मिला। सेवा कार्य मेरे लिए भगवान द्वारा लिखी गई क्रिप्ट है। सोनू सूद ने कहा कि मैं चाहता हूँ कि सेवा का जिम्मा जो मैंने अपने कंधों पर उठाया है, वह अनवरत यूं ही चलता रहे।

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