शुभ मुहूर्त
विक्रम पंचांग के अनुसार, इस साल कन्या संक्रांति 17 सितंबर को मनाई जाएगी।
पुण्य काल
17 सितंबर, बुधवार की दोपहर 1 बजकर 46 मिनट से शाम 6 बजकर 19 मिनट तक।
महापुण्य काल
17 सितंबर, बुधवार की दोपहर 1 बजकर 46 मिनट से दोपहर 3 बजकर 31 मिनट तक।
हर साल जब सूर्यदेव एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस विशेष दिन को संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। विक्रम पंचांग के अनुसार, इस साल सूर्य अपनी स्व-राशि सिंह से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। इस घटना को कन्या संक्रांति के नाम से जाना जाता है।
कन्या संक्रांति को स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस समय किया गया कोई भी शुभ कार्य कई गुना फल देता है। इस दौरान भक्तों को गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। यदि संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। सूर्यदेव की पूजा करनी चाहिए। अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीब और जरूरतमंद लोगों को दान देना चाहिए।
महत्व
ज्योतिष में सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है। वे आत्मा, पिता और नेतफत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। जब सूर्य राशि-परिवर्तन करते हैं। कन्या संक्रांति को सूर्य के गोचर से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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इस दिन दान-पुण्य करने से जीवन की कई समस्याओं का समाधान होता है। इस दिन गाय को घास खिलाना, वस्त्रां का दान करना और गरीबों को भोजन कराना बहुत शुभ माना जाता है। इससे व्यक्ति के मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। इस समय किया गया दान, व्यक्ति को रोग, शोक और दुःख से मुक्ति दिलाता है।
दान
गरीब और जरूरतमंदों को वस्त्र, गेहूं, चावल या किसी भी अनाज का दान करें। इन चीजों का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। दान-पुण्य के साथ दक्षिणा अवश्य दें।
